हरियाणा में 14,300 एकड़ जमीन पर औद्योगिक विस्तार की तैयारी, नए निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

हरियाणा में 14,300 एकड़ जमीन पर औद्योगिक विस्तार की तैयारी, नए निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

खरखौदा, कोसली, बावल और सोहना में औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की योजना; मारुति सुजुकी, एटीएल, यूनो-मिंडा और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां कर रहीं बड़ा निवेश

चंडीगढ़। हरियाणा में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मौजूदा औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आइएमटी) में बड़ी कंपनियों की परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के साथ नए औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत चार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और एक नए औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए लगभग 14,300 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। सरकार का लक्ष्य हरियाणा को देशी और वैश्विक कंपनियों के लिए प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करना है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रयासों से प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने, निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार होने से विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, औद्योगिक विकास की भावी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क, बिजली-पानी, औद्योगिक भूखंडों की उपलब्धता और निवेशकों को प्रशासनिक सहायता जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि कंपनियों को परियोजनाएं स्थापित करने में सहूलियत मिल सके।

चार औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार की योजना

हरियाणा सरकार ने औद्योगिक नेटवर्क को मौजूदा क्षेत्रों से आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त भूमि की पहचान की है। इसके तहत खरखौदा, बावल और सोहना के औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया जाएगा, जबकि कोसली में नई आइएमटी विकसित करने की योजना है।

प्रस्तावित भूमि का विवरण इस प्रकार है:

  • खरखौदा: औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए लगभग 5,800 एकड़ भूमि।
  • कोसली: नई औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित करने के लिए लगभग 5,000 एकड़ भूमि।
  • बावल: मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए लगभग 2,000 एकड़ भूमि।
  • सोहना: औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए लगभग 1,500 एकड़ भूमि।

इन चारों क्षेत्रों के लिए कुल लगभग 14,300 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित की गई है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नया आधार तैयार होने की उम्मीद है।

खरखौदा में अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होने से वहां पहले से विकसित औद्योगिक ढांचे को और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। वहीं, कोसली में नई आइएमटी की योजना से औद्योगिक निवेश को नए क्षेत्र तक पहुंचाने की संभावनाएं बनेंगी। बावल और सोहना में विस्तार से मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, चिह्नित भूमि पर परियोजनाओं का विकास संबंधित प्रक्रियाओं, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और औद्योगिक जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ेगा।

छह प्रमुख आइएमटी में फैला औद्योगिक नेटवर्क

हरियाणा में फिलहाल छह प्रमुख औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित की गई हैं। ये औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न आकारों में फैले हैं और उद्योगों को स्थापित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राज्य की प्रमुख आइएमटी और उनका क्षेत्रफल इस प्रकार है:

औद्योगिक क्षेत्रलगभग क्षेत्रफल
मानेसर4,000 एकड़
रोहतक3,600 एकड़
बावल3,300 एकड़
खरखौदा3,200 एकड़
फरीदाबाद1,800 एकड़
सोहना1,500 एकड़

इन औद्योगिक क्षेत्रों में विनिर्माण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार की योजना है कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध भूमि और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाए, ताकि नए निवेशकों को प्रदेश में परियोजनाएं स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान मिल सके।

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख बाजारों से संपर्क और औद्योगिक ढांचे को निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। नए क्षेत्रों के विकास से उद्योगों को विस्तार के लिए अतिरिक्त स्थान मिलने की संभावना है।

बड़ी कंपनियों की परियोजनाओं से निवेश को गति

हरियाणा में कई बड़ी कंपनियां औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से निवेश कर रही हैं। इनमें वाहन निर्माण, वाहन कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन परियोजनाओं से राज्य के औद्योगिक आधार को मजबूत करने की उम्मीद है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, प्रमुख निवेश परियोजनाओं में मारुति सुजुकी, एटीएल, आदित्य बिरला ग्रुप और यूनो-मिंडा जैसी कंपनियां शामिल हैं।

प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इन कंपनियों की परियोजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

कंपनीलगभग भूमिनिवेश
मारुति सुजुकी800 एकड़₹18,000 करोड़
एटीएल178 एकड़₹7,000 करोड़
आदित्य बिरला ग्रुप70 एकड़₹1,140 करोड़
यूनो-मिंडा94 एकड़₹11,000 करोड़

इन परियोजनाओं के अलावा फ्लिपकार्ट, डेंसो, टोयोटा बोशोकु और अमूल भी प्रदेश में निवेश से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों की मौजूदगी से औद्योगिक विकास को विविधता मिलने की संभावना है।

फ्लिपकार्ट का 1,300 करोड़ रुपये का निवेश

लॉजिस्टिक्स और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं में फ्लिपकार्ट का निवेश भी शामिल है। कंपनी 140 एकड़ भूमि पर 1,300 करोड़ रुपये की परियोजना के साथ निवेश कर रही है।

इसके अलावा, डेंसो 37 एकड़ भूमि पर 570 करोड़ रुपये, टोयोटा बोशोकु 21 एकड़ भूमि पर 400 करोड़ रुपये और अमूल 10 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं।

अन्य परियोजनाओं में फैवेली ट्रांसपोर्ट पांच एकड़ भूमि पर 200 करोड़ रुपये और यूफ्लेक्स 14 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं।

इन परियोजनाओं के जरिए विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में गतिविधियों के विस्तार की संभावना है। विनिर्माण इकाइयों के साथ लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े निवेश भी औद्योगिक विकास में भूमिका निभा सकते हैं।

हरियाणा में यामाहा, एस्कोर्ट्स, व्हर्लपूल, इंडियन ऑयल, एशियन पेंट्स, जेसीबी, होंडा, हीरो, टाटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक कंपनियां औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। इन कंपनियों की मौजूदगी प्रदेश में उद्योगों के विविध क्षेत्रों के विकास को दर्शाती है।

निवेशकों को मिलेंगी प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं

औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को आसान बनाने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार पर भी ध्यान दे रही है। इसके तहत प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि उद्योगों को परियोजनाएं शुरू करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

इसके साथ ही स्पष्ट भूमि स्वामित्व, पूर्व-स्वीकृत औद्योगिक भूमि उपयोग, सिंगल-विंडो सहायता और बेहतर सड़क संपर्क को प्राथमिकता दी जा रही है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य निवेशकों के लिए भूमि और अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

सिंगल-विंडो व्यवस्था के माध्यम से निवेशकों को विभिन्न विभागों से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता मिल सकती है। वहीं, बेहतर सड़क संपर्क से कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होने की उम्मीद है।

सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास को निवेश आकर्षित करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। भूमि की उपलब्धता के साथ बिजली, पानी, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं का होना भी उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए अहम है।

कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर

औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए कौशल विकास केंद्र, सामान्य सुविधा केंद्र, स्टार्टअप सहायता और इन्क्यूबेशन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने का उद्देश्य है। इससे कंपनियों को प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध कराने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।

सामान्य सुविधा केंद्रों के जरिए उद्योगों को साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर है। वहीं, स्टार्टअप सहायता और इन्क्यूबेशन सुविधाओं से नए उद्यमों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

औद्योगिक विकास के साथ कौशल प्रशिक्षण को जोड़ने से रोजगार के अवसरों का लाभ स्थानीय स्तर पर पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन, उद्योगों की भर्ती जरूरतों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।

पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के सुधार के लिए 500 करोड़ का सक्षम कोष

हरियाणा सरकार नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के साथ पहले से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए 500 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि वाला सक्षम कोष बनाया गया है।

इस कोष का उद्देश्य पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों को समर्थन देना है। औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों, अन्य नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता उद्योगों के सुचारु संचालन के लिए महत्वपूर्ण होती है।

पुराने क्षेत्रों में सुविधाओं के सुधार और नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को साथ लेकर चलने से राज्य के औद्योगिक नेटवर्क को मजबूत करने की योजना है। इससे मौजूदा कंपनियों को विस्तार करने और नए निवेशकों को परियोजनाएं स्थापित करने के लिए बेहतर माहौल मिल सकता है।

औद्योगिक विस्तार से रोजगार की संभावनाएं

हरियाणा में अतिरिक्त भूमि की पहचान, बड़ी कंपनियों की निवेश परियोजनाओं और औद्योगिक सुविधाओं के विकास को रोजगार सृजन से जोड़कर देखा जा रहा है। नए औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयां स्थापित होने से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं में भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

सरकार की रणनीति में नए निवेश आकर्षित करने के साथ मौजूदा उद्योगों की जरूरतों को पूरा करना भी शामिल है। इसके लिए औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, प्रशासनिक सहायता, बेहतर संपर्क व्यवस्था और कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार लगभग 14,300 एकड़ अतिरिक्त भूमि के माध्यम से औद्योगिक विस्तार की नई संभावनाएं तलाश रही है। खरखौदा, कोसली, बावल और सोहना में प्रस्तावित विकास, बड़ी कंपनियों की निवेश परियोजनाएं और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रारंभिक सक्षम कोष की व्यवस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ भूमि विकास, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और निवेश परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन से तय होगा।