हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के सामने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से ऊना और सोलन में प्रस्तावित आधुनिक औद्योगिक पार्कों को जल्द मंजूरी देने के साथ-साथ प्रदेश के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर औद्योगिक और परिवहन ढांचा हिमाचल में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ मौजूदा उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला से नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने की। बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए केंद्र सरकार के समक्ष राज्य के दो प्रमुख प्रस्ताव रखे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने भारत औद्योगिक विकास योजना यानी ‘भव्य’ के पहले चरण के तहत दो प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना तैयार की है। इन पार्कों का उद्देश्य उद्योगों को तैयार आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना और प्रदेश में नए औद्योगिक केंद्र विकसित करना है।
राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार पहला औद्योगिक पार्क ऊना जिले के बीटन गांव में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। करीब 75 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस पार्क पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं दूसरा पार्क सोलन जिले के नालागढ़ क्षेत्र के मझोली में प्रस्तावित है। यह औद्योगिक पार्क करीब 150 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इसके लिए लगभग 154.39 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से दोनों परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए सुनियोजित औद्योगिक ढांचा तैयार करना आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से उद्योगों को अपनी इकाइयां स्थापित करने में अपेक्षाकृत कम समय लग सकता है।
प्लग-एंड-प्ले मॉडल के तहत विकसित होने वाले औद्योगिक पार्कों में उद्योगों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराने पर जोर रहता है। इससे निवेशकों को जमीन, आधारभूत ढांचे और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए अलग-अलग स्तर पर लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। राज्य सरकार का मानना है कि इस मॉडल से हिमाचल में औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और परिवहन ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में उद्योगों के विस्तार की बड़ी चुनौतियों में से एक बेहतर परिवहन संपर्क उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही के लिए रेल संपर्क मजबूत होना जरूरी है।
इसी क्रम में सुक्खू ने केंद्र सरकार से बद्दी-नालागढ़ रेल लाइन के विस्तार की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने से माल ढुलाई अधिक सुविधाजनक और किफायती हो सकती है। इससे उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलेगी और उत्पादन से जुड़े खर्च को नियंत्रित किया जा सकेगा।
बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में विनिर्माण इकाइयां काम कर रही हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पाद भेजे जाते हैं। ऐसे में रेल नेटवर्क का विस्तार इस औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि बेहतर रेल संपर्क से न केवल मौजूदा उद्योगों को लाभ मिलेगा, बल्कि नए निवेशकों के लिए भी हिमाचल अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
सुक्खू ने बैठक में यह भी रेखांकित किया कि परिवहन लागत में कमी से राज्य में स्थापित विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। यदि उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार माल देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के लिए सस्ता और भरोसेमंद परिवहन विकल्प मिलता है तो उनके संचालन की लागत कम हो सकती है। इसका सीधा असर निवेश और रोजगार पर पड़ने की संभावना रहती है।
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विस्तार को केवल बड़े निवेश तक सीमित न रखते हुए क्षेत्रीय आर्थिक विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया। ऊना और सोलन में प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों के जरिए नए उद्योगों के आने से आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष रोजगार के अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, सेवाओं और छोटे कारोबार से जुड़े अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
हिमाचल सरकार लंबे समय से राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करती रही है। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रदेश में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट स्थापित करने और उन्हें देश के प्रमुख बाजारों से जोड़ने की चुनौती मैदानी राज्यों की तुलना में अधिक है। ऐसे में राज्य सरकार का जोर अब औद्योगिक पार्कों के साथ लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को समानांतर रूप से मजबूत करने पर है।
ऊना और नालागढ़ में प्रस्तावित पार्कों को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊना क्षेत्र पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों के साथ बेहतर संपर्क के कारण औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं नालागढ़ पहले से ही हिमाचल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां अतिरिक्त औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार होने से नए निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र के सामने रखे गए प्रस्तावों में तेज मंजूरी की मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक परियोजनाओं में जमीन, आधारभूत ढांचा और निवेशकों की रुचि के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक होता है। यदि प्रस्तावित पार्कों को समय पर मंजूरी मिलती है तो राज्य सरकार उनके विकास की अगली प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा सकती है।
बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच औद्योगिक गलियारों तथा निवेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। हिमाचल की ओर से मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप केंद्र से सहयोग की मांग रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता का उपयोग प्रदेश में आधुनिक औद्योगिक आधार तैयार करने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री का फोकस इस बात पर भी रहा कि उद्योगों के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें बिजली, पानी, सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाओं से जोड़ना भी जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने औद्योगिक पार्कों की मंजूरी के साथ रेल नेटवर्क के विस्तार को एक ही व्यापक औद्योगिक रणनीति का हिस्सा बनाकर केंद्र के सामने रखा।
सरकार का मानना है कि यदि दोनों प्रस्तावों को केंद्र से मंजूरी मिलती है और बद्दी-नालागढ़ रेल संपर्क के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ा जाता है तो हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र को नई गति मिल सकती है। इससे प्रदेश में निवेश के नए अवसर खुलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी बढ़ सकते हैं।
अब सबकी नजरें केंद्र सरकार की ओर से इन प्रस्तावों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं। यदि ऊना के बीटन और सोलन के मझोली में प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को जल्द मंजूरी मिलती है तो राज्य सरकार इनके निर्माण और विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी। वहीं बद्दी-नालागढ़ रेल लाइन के विस्तार को लेकर केंद्र की सकारात्मक पहल हिमाचल के औद्योगिक परिवहन ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य सरकार हिमाचल में औद्योगिक विकास को केवल नए निवेश तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसके लिए मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही है। औद्योगिक पार्कों, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के जरिए हिमाचल को निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।




