मूड बेहतर बनाने से लेकर तनाव घटाने तक, डाइट में शामिल करें ये 10 फूड्स; खुश रहने में मिल सकती है मदद

मूड बेहतर बनाने से लेकर तनाव घटाने तक, डाइट में शामिल करें ये 10 फूड्स; खुश रहने में मिल सकती है मदद

दिनभर की भागदौड़, काम का दबाव, नींद की कमी और रोजमर्रा की परेशानियां हमारे मूड को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार बिना किसी खास वजह के भी थकान, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस होने लगती है। ऐसे में लोग अपना मूड ठीक करने के लिए मनोरंजन, घूमने-फिरने या दोस्तों के साथ समय बिताने का सहारा लेते हैं। हालांकि, अच्छी सेहत और बेहतर मानसिक स्थिति बनाए रखने में हमारी रोज की डाइट भी अहम भूमिका निभाती है।

हम जो खाते हैं, उसका असर केवल शरीर की ऊर्जा और वजन पर ही नहीं पड़ता, बल्कि मस्तिष्क के कामकाज पर भी होता है। शरीर में बनने वाले कुछ रासायनिक संदेशवाहक, जिन्हें आम भाषा में हैप्पी हार्मोन कहा जाता है, हमारी भावनाओं, प्रेरणा, तनाव और संतुष्टि से जुड़े होते हैं। इनमें सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन प्रमुख हैं। हालांकि, इन्हें केवल खुशी के हार्मोन कहना पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि शरीर में इनकी भूमिका काफी व्यापक होती है।

पोषक तत्वों से भरपूर भोजन मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को सामान्य रूप से काम करने में सहायता करता है। कुछ खाद्य पदार्थों में ऐसे विटामिन, खनिज, प्रोटीन और फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो मूड को नियंत्रित करने वाली शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक चीज को खाने से तुरंत खुशी महसूस होने लगेगी, लेकिन संतुलित आहार लंबे समय तक सेहत का ख्याल रखने में मदद कर सकता है।

आइए जानते हैं ऐसे 10 खाद्य पदार्थों के बारे में, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाकर पोषण और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से सपोर्ट किया जा सकता है।

1. पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियां सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होती हैं। पालक में फोलेट, मैग्नीशियम, आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फोलेट शरीर में कोशिकाओं के सामान्य कामकाज और मस्तिष्क से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है। वहीं, मैग्नीशियम मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सही संचालन में भूमिका निभाता है।

आहार में पालक शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है, जो सामान्य ऊर्जा और सेहत बनाए रखने में मदद करता है। आप इसे सब्जी, दाल, सूप या सलाद के रूप में खा सकते हैं। हालांकि, पालक खाने से सीधे एंडोर्फिन बढ़ने या उदासी दूर होने की गारंटी नहीं है। इसके फायदे संतुलित भोजन के हिस्से के रूप में अधिक मायने रखते हैं।

2. अखरोट से मिलते हैं ओमेगा-3 फैटी एसिड

अखरोट को दिमाग की सेहत के लिए उपयोगी मेवों में गिना जाता है। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) नाम का ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। इसके अलावा, अखरोट में फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सिडेंट भी मौजूद होते हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क सहित शरीर के कई हिस्सों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी हैं। पर्याप्त पोषण मानसिक स्वास्थ्य को सहारा दे सकता है, हालांकि अखरोट खाने मात्र से डिप्रेशन ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता। रोजाना थोड़ी मात्रा में अखरोट को नाश्ते, दलिया या दही में मिलाकर खाया जा सकता है। बिना नमक वाले अखरोट चुनना एक अच्छा विकल्प है।

3. केला देता है ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व

केला आसानी से उपलब्ध होने वाला फल है, जिसे नाश्ते या दो भोजन के बीच खाया जा सकता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, विटामिन बी6 और कुछ मात्रा में फाइबर मिलता है। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, जबकि विटामिन बी6 कई महत्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल होता है।

केले में ट्रिप्टोफैन नाम का अमीनो एसिड भी थोड़ी मात्रा में पाया जाता है। ट्रिप्टोफैन सेरोटोनिन के निर्माण में इस्तेमाल होता है, लेकिन केला खाने से सेरोटोनिन तुरंत बढ़ जाएगा या मूड तुरंत अच्छा हो जाएगा, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। फिर भी, केला संतुलित डाइट में शामिल करने के लिए एक सुविधाजनक और पौष्टिक विकल्प है।

4. दही और दूसरे प्रोबायोटिक फूड्स

पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच संबंध को गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि आंतों में रहने वाले सूक्ष्मजीव और मस्तिष्क के बीच होने वाला संवाद मूड तथा मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

दही में प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ प्रकार के उपयोगी बैक्टीरिया हो सकते हैं। हालांकि, हर दही में समान मात्रा या प्रकार के जीवित सूक्ष्मजीव नहीं होते। बिना ज्यादा चीनी वाला दही एक अच्छा विकल्प है। इसे फल, ओट्स या थोड़े मेवों के साथ खाया जा सकता है।

ध्यान रखें कि गट हेल्थ और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर शोध जारी है। दही को सेहतमंद भोजन के रूप में अपनाना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे तनाव या डिप्रेशन का इलाज नहीं समझना चाहिए।

5. डार्क चॉकलेट से मिल सकता है स्वाद और संतुष्टि का एहसास

डार्क चॉकलेट अपने खास स्वाद के साथ कुछ पोषक तत्व भी प्रदान करती है। इसमें कोको फ्लेवोनॉयड्स और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जा सकते हैं। चॉकलेट खाने का अनुभव कुछ लोगों को अच्छा महसूस करा सकता है और पसंदीदा स्वाद से संतुष्टि भी मिल सकती है।

हालांकि, डार्क चॉकलेट सीधे डोपामिन बढ़ाकर तनाव दूर कर देती है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। इसके अलावा, चॉकलेट में कैलोरी और वसा की मात्रा भी होती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना बेहतर है। अधिक कोको और कम अतिरिक्त चीनी वाली चॉकलेट चुन सकते हैं। अगर आपको चॉकलेट पसंद है, तो इसे संतुलित डाइट में कभी-कभार शामिल करना ठीक है।

6. ओट्स से दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद

ओट्स में जटिल कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कुछ मात्रा में प्रोटीन होता है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकान नाम का घुलनशील फाइबर पाचन और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में मदद कर सकता है। ओट्स का सेवन पेट भरा होने का एहसास भी लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

जब भोजन में पर्याप्त फाइबर और दूसरे जरूरी पोषक तत्व होते हैं, तो दिनभर की ऊर्जा को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है। नियमित और संतुलित भोजन करने से भूख के कारण होने वाली बेचैनी से भी बचा जा सकता है।

ओट्स को दूध या दही के साथ खाएं। स्वाद के लिए इसमें केला, बेरीज या थोड़े अखरोट मिला सकते हैं। तैयार फ्लेवर्ड ओट्स खरीदते समय अतिरिक्त चीनी की मात्रा जरूर जांचें।

7. बेरीज से मिलता है एंटीऑक्सिडेंट का फायदा

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और दूसरी बेरीज में विटामिन, फाइबर तथा विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर की कोशिकाओं को सामान्य रूप से काम करने में मदद करते हैं। फल खाने की आदत समग्र स्वास्थ्य और संतुलित पोषण के लिए उपयोगी है।

बेरीज को तनाव कम करने या खुशी बढ़ाने वाला कोई जादुई खाद्य पदार्थ नहीं माना जा सकता। फिर भी, रोजाना फल खाने की आदत अपनाने के लिए ये अच्छे विकल्प हैं। इन्हें सुबह के नाश्ते, स्मूदी, दही या ओट्स के साथ खाया जा सकता है। ताजे फल उपलब्ध न हों, तो बिना अतिरिक्त चीनी वाले फ्रोजन फल भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

8. अंडा प्रोटीन और विटामिन बी12 का अच्छा स्रोत

अंडे में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन बी12, कोलीन और कुछ मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। प्रोटीन शरीर के ऊतकों के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी है। वहीं, विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र और लाल रक्त कोशिकाओं के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए पर्याप्त पोषण जरूरी होता है। अंडे को उबालकर, सब्जियों के साथ ऑमलेट बनाकर या दूसरे संतुलित भोजन के हिस्से के रूप में खाया जा सकता है। यदि आप अंडा नहीं खाते, तो अपनी जरूरत के अनुसार दाल, बीन्स, सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत चुन सकते हैं। केवल अंडा खाने से डोपामिन का स्तर बढ़ने या मोटिवेशन में तत्काल सुधार होने की गारंटी नहीं है।

9. फैटी फिश से मिलता है ओमेगा-3

साल्मन, सार्डिन और मैकेरल जैसी तैलीय मछलियों में EPA और DHA नाम के ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। ये मस्तिष्क की संरचना और सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। मछली में प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं।

कुछ अध्ययनों में ओमेगा-3 और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन इसके प्रभाव व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। मछली खाने से डिप्रेशन का जोखिम निश्चित रूप से खत्म हो जाता है, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।

जो लोग मछली खाते हैं, वे इसे संतुलित भोजन में शामिल कर सकते हैं। शाकाहारी लोग अखरोट, अलसी और चिया सीड्स से ALA प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, शरीर ALA के केवल एक हिस्से को EPA और DHA में बदल पाता है।

10. हल्दी को बनाएं संतुलित खानपान का हिस्सा

भारतीय रसोई में हल्दी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें करक्यूमिन नाम का एक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिस पर इसके संभावित सूजनरोधी और दूसरे स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर शोध किया गया है।

हालांकि, हल्दी खाने से हैप्पी हार्मोन सीधे सक्रिय हो जाते हैं या लंबे समय तक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, इस दावे के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। सामान्य मात्रा में सब्जी, दाल या सूप में हल्दी का इस्तेमाल संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकता है। अधिक मात्रा में हल्दी या करक्यूमिन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, खासकर यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं।

सिर्फ डाइट नहीं, इन आदतों का भी रखें ध्यान

बेहतर मूड के लिए केवल कुछ खास खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव को संभालने की आदत और परिवार या दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताना भी मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कोशिश करें कि आपकी थाली में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन के अच्छे स्रोत और स्वस्थ वसा शामिल हों। भोजन का समय नियमित रखें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। बहुत ज्यादा चीनी, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अनियमित खानपान को रोजमर्रा की आदत बनाने से बचें।

यदि उदासी, घबराहट, निराशा या किसी भी काम में रुचि न होने जैसी परेशानियां लगातार बनी रहती हैं और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। केवल खानपान में बदलाव करना ऐसी समस्याओं के इलाज का विकल्प नहीं है।

डार्क चॉकलेट, केला, दही, अखरोट, ओट्स, बेरीज, पालक, अंडे, फैटी फिश और हल्दी पौष्टिक डाइट के उपयोगी हिस्से हो सकते हैं। इनसे शरीर को अलग-अलग जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जो सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देते हैं। खुश रहने का कोई एक निश्चित फॉर्मूला नहीं है, लेकिन संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली बेहतर शारीरिक और मानसिक सेहत की दिशा में एक अच्छा कदम जरूर हैं।

(Photo : AI Generated)