हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में कई ऐसे पर्व आते हैं, जिनका धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी विशेष स्थान है। दीपावली की रौनक, गोवर्धन पूजा की परंपरा, छठ महापर्व में सूर्य उपासना और देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह जैसे आयोजन इस महीने को खास बनाते हैं।
साल 2026 में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के अंतिम दिनों तक कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अगर आप पहले से पूजा की तैयारी करना चाहते हैं या त्योहारों की तारीखों का कैलेंडर बनाना चाहते हैं, तो यह सूची आपके लिए उपयोगी हो सकती है।
अक्टूबर 2026 में कब शुरू होगा कार्तिक मास?
दिए गए कैलेंडर के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 से कार्तिक मास की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं में इस महीने को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान, दीपदान, तुलसी पूजन और जरूरतमंदों को दान देने जैसी परंपराओं का पालन करते हैं।
कार्तिक मास के दौरान मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कई परिवार नियमित रूप से पूजा करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु पूरे महीने विशेष नियमों और व्रतों का पालन करते हैं। हालांकि, किसी भी पर्व की तिथि स्थानीय पंचांग और उदया तिथि के आधार पर अलग हो सकती है, इसलिए अंतिम पुष्टि करना जरूरी है।
नवंबर के त्योहारों का पूरा कैलेंडर
| तारीख | पर्व और व्रत |
|---|---|
| 27 अक्टूबर 2026 | कार्तिक मास का आरंभ |
| 29 अक्टूबर 2026 | करवा चौथ |
| 6 नवंबर 2026 | धनतेरस |
| 8 नवंबर 2026 | दीपावली |
| 10 नवंबर 2026 | गोवर्धन पूजा और चित्रगुप्त पूजा |
| 11 नवंबर 2026 | भाई दूज |
| 13 नवंबर 2026 | छठ पूजा: नहाय-खाय |
| 14 नवंबर 2026 | छठ पूजा: खरना |
| 15 नवंबर 2026 | छठ पूजा: संध्या अर्घ्य |
| 16 नवंबर 2026 | छठ पूजा: उषा अर्घ्य |
| 18 नवंबर 2026 | अक्षय नवमी |
| 21 नवंबर 2026 | देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह |
| 24 नवंबर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती |
करवा चौथ से दीपावली तक रहेगी उत्सवों की धूम
कार्तिक मास की शुरुआत के बाद 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाए जाने की तारीख दी गई है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। पारंपरिक रूप से चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।
इसके बाद 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व आएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। कई परिवारों में सोना, चांदी, बर्तन या घर के उपयोग की वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धनतेरस को दीपोत्सव की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है।
8 नवंबर को दीपावली मनाने की तारीख दी गई है। इस अवसर पर घरों में दीपक जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लोग घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं और परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपावली सुख-समृद्धि और शुभता की कामना का पर्व है।
गोवर्धन पूजा और भाई दूज क्यों हैं खास?
दीपावली के बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और चित्रगुप्त पूजा का उल्लेख है। गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण से जुड़ी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इस दिन कई जगह अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और भगवान की आराधना की जाती है।
चित्रगुप्त पूजा में चित्रगुप्त महाराज की उपासना की जाती है। विशेष रूप से कायस्थ समुदाय में इस पूजा का महत्व है। इसके अगले दिन, 11 नवंबर को भाई दूज मनाया जाएगा। इस त्योहार पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और अपनापन दर्शाता है।
छठ पूजा 2026: चार दिनों तक होगी सूर्य उपासना
नवंबर के मध्य में छठ महापर्व का आयोजन होगा। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। इसकी परंपराएं खास तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित हैं, हालांकि देश के दूसरे हिस्सों में भी श्रद्धालु इसे मनाते हैं।
छठ पूजा की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
- 13 नवंबर — नहाय-खाय: व्रती स्नान और सात्विक भोजन के साथ अनुष्ठान की शुरुआत करते हैं।
- 14 नवंबर — खरना: पूजा के बाद पारंपरिक प्रसाद ग्रहण किया जाता है और व्रत की अगली प्रक्रिया शुरू होती है।
- 15 नवंबर — संध्या अर्घ्य: अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- 16 नवंबर — उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पर्व का समापन होता है।
छठ पूजा में स्वच्छता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का विशेष महत्व माना जाता है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। घाटों पर पारंपरिक गीत, पूजा सामग्री और सामूहिक अनुष्ठान इस पर्व की खास पहचान हैं।
अक्षय नवमी और देवउठनी एकादशी पर होंगे विशेष अनुष्ठान
18 नवंबर को अक्षय नवमी की तारीख दी गई है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है।
21 नवंबर को देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का आयोजन बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और भगवान शालिग्राम के विवाह की रस्म निभाई जाती है। घरों तथा मंदिरों में पूजा, भजन और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन होते हैं। कई परंपराओं में इस पर्व के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
कार्तिक पूर्णिमा के साथ नवंबर में होंगे धार्मिक आयोजन
24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती का उल्लेख किया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दीपदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
इसी दिन गुरु नानक देव जी की जयंती भी मनाई जाने की जानकारी दी गई है। सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारों में कीर्तन, अरदास और लंगर के आयोजन में भाग लेते हैं। गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं सेवा, समानता, ईमानदारी और मानवता का संदेश देती हैं।
जरूरी सूचना: यह कैलेंडर उपलब्ध कराई गई तारीखों पर आधारित है। धार्मिक तिथियों में पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार अंतर संभव है। व्रत रखने या पूजा का मुहूर्त तय करने से पहले स्थानीय पंचांग से तारीखों की पुष्टि जरूर करें।
(Photo : AI Generated)




