भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 रन से बड़ी जीत दर्ज की। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों, दोनों ने अपना दम दिखाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 328 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में जिम्बाब्वे की महिला टीम 48.5 ओवर में 207 रन बनाकर सिमट गई।
इस जीत के साथ भारत ने तीन मुकाबलों की वनडे सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब सीरीज का आखिरी मैच 28 अक्टूबर को खेला जाएगा। भारतीय टीम की जीत की सबसे बड़ी वजह कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा की शानदार बल्लेबाजी रही। दोनों ने शतक लगाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। वहीं, गेंदबाजी में युवा स्पिनर वैष्णवी शर्मा ने चार विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया।
हरमनप्रीत ने 121 गेंदों में 126 रन की बेहतरीन पारी खेली, जबकि दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर नाबाद 106 रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई बड़ी साझेदारी ने भारत को 300 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्बाब्वे ने शुरुआत में मुकाबले में बने रहने की कोशिश की, लेकिन भारतीय स्पिनरों के सामने उसकी बल्लेबाजी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी।
वैष्णवी शर्मा की फिरकी में उलझे जिम्बाब्वे के बल्लेबाज
भारतीय टीम की जीत में गेंदबाजों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा, जितना बल्लेबाजों का। 329 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम को शुरुआत में रन बनाने के मौके मिले, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने मध्य ओवरों में लगातार दबाव बढ़ाया। बाएं हाथ की स्पिनर वैष्णवी शर्मा ने अपनी सटीक गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया।
वैष्णवी ने अपने 10 ओवर के स्पेल में केवल 39 रन खर्च करते हुए चार बल्लेबाजों को आउट किया। उनके खाते में एक मेडन ओवर भी रहा। उन्होंने अपनी गेंदों की दिशा और गति में बदलाव करते हुए जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने से रोका। उनके चार विकेटों ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में कर दिया।
वैष्णवी ने बेलव्ड बीजा को एलबीडब्ल्यू आउट करके विकेट लेने का सिलसिला शुरू किया। इसके बाद जिम्बाब्वे की कप्तान जोसेफिन नकोमो भी उनकी गेंद पर एलबीडब्ल्यू होकर पवेलियन लौट गईं। इन सफलताओं से जिम्बाब्वे की टीम पर दबाव बढ़ गया और रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
युवा स्पिनर का तीसरा विकेट मिशेल मावुंगा के रूप में आया। वैष्णवी की गेंद पिच पर पड़ने के बाद घूमी और सीधे ऑफ स्टंप से जा टकराई। यह विकेट उनकी प्रभावशाली गेंदबाजी का एक बेहतरीन उदाहरण रहा। मैच के बाद वैष्णवी ने इसी गेंद पर मिले विकेट को अपना पसंदीदा विकेट बताया।
उन्होंने चौथे विकेट के रूप में मोडेस्टर मुपाचिक्वा को आउट किया। मुपाचिक्वा अच्छी बल्लेबाजी कर रही थीं और 49 रन बना चुकी थीं। उनका विकेट गिरने से जिम्बाब्वे की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। वैष्णवी के अलावा दीप्ति शर्मा ने भी गेंद से शानदार प्रदर्शन किया। दीप्ति ने नौ ओवर में 32 रन देकर तीन विकेट चटकाए। इस तरह भारतीय स्पिनरों ने विपक्षी टीम को लक्ष्य तक पहुंचने का मौका नहीं दिया।
19 रन पर दो विकेट गिरने के बाद भारत ने की दमदार वापसी
इससे पहले मुकाबले में टॉस जीतकर भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। सलामी बल्लेबाज और कप्तान स्मृति मंधाना बिना खाता खोले आउट हो गईं। वह केवल दो गेंदों का सामना कर सकीं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गईं।
शुरुआती झटकों के कारण भारतीय टीम पर दबाव बन गया। तीसरे ओवर के समाप्त होने से पहले ही भारत के दो विकेट केवल 19 रन पर गिर चुके थे। ऐसे समय में टीम को एक ऐसी साझेदारी की जरूरत थी, जो पारी को संभालने के साथ-साथ रन गति को भी बनाए रख सके।
प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने संभलकर खेलते हुए तीसरे विकेट के लिए 124 रन जोड़ दिए। इस साझेदारी ने भारत को शुरुआती मुश्किल से बाहर निकाला और बड़े स्कोर की नींव तैयार की। प्रतीका ने 67 गेंदों का सामना करते हुए 61 रन बनाए। उनकी पारी ने मध्यक्रम को मजबूती दी और हरमनप्रीत को अपनी स्वाभाविक शैली में खेलने का अवसर मिला।
प्रतीका के आउट होने के बाद भी भारत की रन गति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। हरमनप्रीत एक छोर पर मजबूती से डटी रहीं और उन्होंने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों का सामना आक्रामक अंदाज में किया। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य और बड़े शॉट लगाने की क्षमता का अच्छा मेल देखने को मिला।
हरमनप्रीत कौर ने जड़ा वनडे करियर का आठवां शतक
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उनकी पारी में 15 चौके शामिल रहे। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक था। उन्होंने पारी को उस समय संभाला, जब भारत शुरुआती दो विकेट गंवाकर दबाव में था।
हरमनप्रीत ने पहले प्रतीका रावल के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की और फिर दीप्ति शर्मा के साथ मिलकर भारतीय पारी को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 153 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को बड़े स्कोर की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया।
हरमनप्रीत की पारी की खास बात यह रही कि उन्होंने विकेटों के गिरने के बावजूद अपनी एकाग्रता बनाए रखी। शुरुआती ओवरों में विकेट गंवाने के बाद उन्होंने जोखिम भरे शॉट खेलने के बजाय पारी को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने रन बनाने की गति तेज की और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।
दीप्ति शर्मा ने आखिरी ओवर में शतक पूरा कर रचा इतिहास
दीप्ति शर्मा ने बल्लेबाजी में भी अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने 86 गेंदों पर नाबाद 106 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 15 चौके शामिल थे। दीप्ति ने तेजी से रन बनाते हुए भारतीय टीम के स्कोर को 328 रन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दीप्ति ने केवल 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। इसके बाद उन्होंने बल्लेबाजी की रफ्तार बनाए रखी और आखिरी ओवर में अपना शतक पूरा किया। उनकी पारी की मदद से भारत अंतिम ओवरों में तेजी से रन जोड़ने में सफल रहा।
हरमनप्रीत और दीप्ति की साझेदारी भारतीय महिला वनडे क्रिकेट के लिहाज से भी खास रही। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 153 रन जोड़े, जो इस प्रारूप में भारतीय महिला टीम के लिए पांचवें या उससे नीचे के विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी बन गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड स्नेह राणा और पूजा वस्त्राकर के नाम था। दोनों ने 2022 के महिला विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 122 रन जोड़े थे।
दीप्ति की इस पारी ने दिखाया कि वह निचले क्रम में भी टीम के लिए बड़ा योगदान दे सकती हैं। एक तरफ हरमनप्रीत ने शतक बनाकर पारी को संभाला, तो दूसरी ओर दीप्ति ने आक्रामक बल्लेबाजी से स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाया।
दीप्ति के नाम दर्ज हुए तीन बड़े रिकॉर्ड
जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में दीप्ति शर्मा की बल्लेबाजी केवल टीम के स्कोर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपनी शतकीय पारी के दौरान तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी हासिल कीं।
पहला रिकॉर्ड भारतीय महिला वनडे क्रिकेट में छठे या उससे नीचे के बल्लेबाजी क्रम पर शतक लगाने से जुड़ा है। दीप्ति इस क्रम पर वनडे शतक बनाने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। उनसे पहले इस स्थान पर बल्लेबाजी करते हुए भारत की ओर से सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर ऋचा घोष के नाम था। ऋचा ने पिछले साल विशाखापट्टनम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 94 रन बनाए थे।
दूसरी उपलब्धि शतक पूरा करने की गति से संबंधित है। दीप्ति ने 83 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। भारतीय महिला टीम के लिए गेंदों के हिसाब से यह पांचवां सबसे तेज वनडे शतक रहा। इस सूची में स्मृति मंधाना का नाम सबसे ऊपर है, जिन्होंने 2025 में दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ केवल 50 गेंदों में शतक लगाया था।
तीसरा रिकॉर्ड हरमनप्रीत कौर के साथ उनकी साझेदारी ने बनाया। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 153 रन जोड़े। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय महिला वनडे में पांचवें या उससे नीचे के विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
इन तीनों रिकॉर्ड ने दीप्ति के प्रदर्शन को और खास बना दिया। उन्होंने न केवल मुश्किल समय में भारतीय पारी को संभाला, बल्कि तेज रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्बाब्वे ने दिखाई चुनौती देने की कोशिश
329 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने शुरुआती दौर में अच्छी बल्लेबाजी की। टीम ने भारतीय गेंदबाजों के सामने शुरुआत में आत्मविश्वास दिखाया और 20 ओवर पूरे होने तक एक विकेट पर 104 रन बना लिए थे। उस समय मुकाबला पूरी तरह भारत के पक्ष में नहीं कहा जा सकता था, क्योंकि जिम्बाब्वे के बल्लेबाज रन बनाने में सफल हो रहे थे।
ओपनर मोडेस्टर मुपाचिक्वा और चिपो मुगेरी-तिरिपानो ने उपयोगी पारियां खेलीं। मुपाचिक्वा ने 70 गेंदों पर 49 रन बनाए, जबकि चिपो ने 57 गेंदों का सामना करते हुए 46 रन जोड़े। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआती विकेट गिरने के बाद पारी को आगे बढ़ाया और भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए इंतजार कराया।
हालांकि, यह साझेदारी ज्यादा देर तक जिम्बाब्वे को मुकाबले में बनाए नहीं रख सकी। चिपो 107 रन के कुल स्कोर पर आउट हुईं। इसके बाद मुपाचिक्वा भी 120 रन के स्कोर पर तीसरे विकेट के रूप में पवेलियन लौट गईं। इन दोनों विकेटों के गिरने से जिम्बाब्वे की रन गति प्रभावित हुई।
इसके बाद भारतीय स्पिनरों ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। लगातार विकेट गिरने से जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी बिखरती चली गई। टीम के बल्लेबाज बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए जरूरी साझेदारियां नहीं कर सके। आखिरकार पूरी टीम 48.5 ओवर में 207 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारतीय टीम की नजर अब क्लीन स्वीप पर
दूसरे वनडे में जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। पहले बल्लेबाजों ने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया और फिर गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को लक्ष्य से काफी दूर रोक दिया। हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा के शतक, प्रतीका रावल की अर्धशतकीय पारी तथा वैष्णवी शर्मा की चार विकेट की सफलता भारत की जीत के मुख्य आधार रहे।
अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे 28 अक्टूबर को खेला जाएगा। भारतीय टीम इस मुकाबले में भी जीत दर्ज करके सीरीज को 3-0 से अपने नाम करना चाहेगी। वहीं, जिम्बाब्वे की टीम आखिरी मैच में बेहतर प्रदर्शन करके सीरीज का समापन जीत के साथ करने की कोशिश करेगी।
दूसरे मुकाबले के प्रदर्शन ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी की गहराई को सामने रखा। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बावजूद टीम ने 328 रन बनाए और फिर अनुशासित गेंदबाजी से 121 रन की बड़ी जीत हासिल की।




