दिसंबर में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद, 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य; मानसून में पुल बंद होने और मध्यमार्ग पर बढ़ने वाले यातायात के दबाव से मिलेगी राहत
चंडीगढ़। शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और मानसून के दौरान लोगों को आवाजाही में होने वाली परेशानियों से राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने सुखना चो पर फोरलेन एलिवेटेड पुल बनाने की तैयारी तेज कर दी है। बापूधाम-शास्त्री नगर के पास बनने वाले इस पुल का निर्माण कार्य दिसंबर में शुरू होने की संभावना है। करीब 16.63 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना को 12 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य के लिए प्राप्त टेंडरों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
यह पुल शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा समय में सुखना चो पर बना लो-लेवल पुल बरसात के मौसम में लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। सुखना झील से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने या चो में जलस्तर बढ़ने पर सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग को बंद करना पड़ता है। इसके कारण चंडीगढ़, मनीमाजरा, पंचकूला और आसपास के इलाकों के बीच आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। नया एलिवेटेड पुल बनने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
टेंडरों का मूल्यांकन जारी, दिसंबर में शुरू हो सकता है काम
प्रशासन की योजना के अनुसार, सुखना चो पर प्रस्तावित फोरलेन एलिवेटेड पुल के निर्माण पर 16.63 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चीफ इंजीनियर सीबी ओझा के अनुसार, परियोजना के लिए प्राप्त टेंडरों का मूल्यांकन किया जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि दिसंबर में पुल का निर्माण शुरू हो सकेगा।
निर्माण कार्य के लिए 12 महीने की समयसीमा तय की गई है। इस हिसाब से परियोजना को निर्धारित अवधि में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। पुल की ऊंचाई मौजूदा लो-लेवल पुल से अधिक रखी जाएगी, ताकि बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने पर भी सड़क संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सके।
शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंडीगढ़ और आसपास के शहरी क्षेत्रों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। ऐसे में किसी प्रमुख मार्ग के बंद होने से न केवल स्थानीय यातायात प्रभावित होता है, बल्कि दूसरे व्यस्त मार्गों पर भी वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। सुखना चो पर नया पुल बनने से इस तरह की स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।
बरसात में बंद करना पड़ता है मौजूदा पुल
बापूधाम-शास्त्री नगर के पास सुखना चो पर बना मौजूदा पुल कम ऊंचाई पर स्थित है। सामान्य दिनों में इस मार्ग से वाहनों की आवाजाही होती रहती है, लेकिन मानसून के दौरान स्थिति बदल जाती है। सुखना झील में पानी का स्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है, जिससे चो में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा कारणों से पुल और उससे जुड़े रास्ते को बंद करना पड़ता है।
इस समस्या का असर आसपास के क्षेत्रों से शहर में प्रवेश करने वाले लोगों पर पड़ता है। नौकरी, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अचानक अपना रास्ता बदलना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय बढ़ने के साथ ईंधन की खपत और यातायात का दबाव भी बढ़ता है।
जुलाई 2023 में पानी के तेज बहाव के कारण इस पुल को काफी नुकसान पहुंचा था। उस समय पुल को पांच दिन तक बंद रखना पड़ा था। इस घटना ने मानसून के दौरान इस मार्ग की संवेदनशीलता को उजागर किया था। पुल बंद होने से लोगों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर रहना पड़ा और शहर की यातायात व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिला।
प्रस्तावित एलिवेटेड पुल को मौजूदा पुल से ऊंचा बनाने का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में सड़क संपर्क को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। हालांकि, मानसून के दौरान निर्बाध आवाजाही वास्तविक जलस्तर, पुल की तकनीकी संरचना और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
पुल बंद होते ही मध्यमार्ग पर बढ़ जाता है दबाव
सुखना चो के पास स्थित यह मार्ग मनीमाजरा, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों से चंडीगढ़ आने-जाने वाले लोगों के लिए अहम है। बड़ी संख्या में वाहन चालक इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुल बंद होने की स्थिति में यातायात का दबाव दूसरे मार्गों पर स्थानांतरित हो जाता है।
विशेष रूप से मध्यमार्ग पर वाहनों की संख्या बढ़ने से सुबह और शाम के व्यस्त समय में जाम की स्थिति बन जाती है। कार्यालयों में जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग सकता है। इसके अलावा, वाहनों की लंबी कतारों के कारण आसपास के प्रमुख चौराहों पर भी यातायात की गति प्रभावित हो सकती है।
फोरलेन एलिवेटेड पुल तैयार होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। पुल की ऊंचाई अधिक होने से मानसून के दौरान रास्ता बंद करने की नौबत कम आने की संभावना है। इससे मध्यमार्ग पर अतिरिक्त यातायात का दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या केवल एक मार्ग तक सीमित नहीं है। वाहनों की बढ़ती संख्या, व्यस्त चौराहों और प्रमुख संस्थानों की ओर जाने वाले रास्तों पर यातायात का दबाव भी जाम के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में नया पुल शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
सेक्टर-26 से आईटी पार्क और पंचकूला तक बेहतर संपर्क
प्रस्तावित पुल का लाभ केवल बापूधाम और शास्त्री नगर के आसपास रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सेक्टर-26 को सेक्टर-13, चंडीगढ़ आईटी पार्क, किशनगढ़ और पंचकूला स्थित मनसा देवी कॉम्प्लेक्स से जोड़ने वाले मार्ग पर भी यातायात सुचारु रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इन क्षेत्रों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। आईटी पार्क में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा विभिन्न सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और शैक्षणिक संस्थानों में जाने वाले लोग भी इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। बरसात के दौरान पुल बंद होने से इन यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे यात्रा लंबी हो सकती है।
नया पुल बनने से इन क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क अधिक भरोसेमंद हो सकेगा। खासकर उन लोगों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें रोजाना तय समय पर कार्यालय या अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचना होता है। यातायात का प्रवाह बेहतर रहने से समय की बचत होने और वैकल्पिक मार्गों पर अनावश्यक दबाव कम होने की संभावना है।
रॉक गार्डन, बर्ड पार्क और प्रमुख संस्थानों तक पहुंच होगी आसान
इस मार्ग का उपयोग केवल स्थानीय निवासी और नौकरीपेशा लोग ही नहीं करते, बल्कि शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और संस्थानों तक पहुंचने वाले लोग भी इसी सड़क नेटवर्क पर निर्भर रहते हैं। रॉक गार्डन और बर्ड पार्क जाने वाले पर्यटकों के साथ हरियाणा सचिवालय तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर जाने वाले लोगों के लिए भी यह संपर्क मार्ग उपयोगी है।
मानसून के दौरान पुल बंद होने पर इन स्थानों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी अपने रास्ते में बदलाव करना पड़ सकता है। विशेष रूप से सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान पर्यटन स्थलों पर आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात प्रबंधन की चुनौती और बढ़ सकती है।
एलिवेटेड पुल बनने के बाद इस मार्ग पर संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवाजाही को सुचारु रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पंचकूला और मनीमाजरा से चंडीगढ़ आने वाले वाहन चालकों को भी एक अधिक भरोसेमंद विकल्प मिल सकेगा।
शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक और कदम
चंडीगढ़ में यातायात संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए सड़क संपर्क को बेहतर बनाना और प्रमुख मार्गों पर बाधाओं को दूर करना जरूरी है। सुखना चो पर प्रस्तावित फोरलेन एलिवेटेड पुल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य बरसात के दौरान बार-बार बाधित होने वाले मार्ग को अधिक सुरक्षित बनाना और आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बनाए रखना है।
परियोजना के निर्माण में टेंडर प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। टेंडरों का मूल्यांकन पूरा होने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा। इसके बाद तय समयसीमा के अनुसार काम पूरा करने की चुनौती रहेगी। निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि आसपास के निवासियों और वाहन चालकों को कम से कम परेशानी हो।
यदि परियोजना निर्धारित समय में पूरी होती है, तो इससे मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने के साथ-साथ दैनिक यातायात को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, पुल बनने के बाद भी शहर के दूसरे व्यस्त मार्गों पर जाम कम करने के लिए यातायात प्रबंधन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम जारी रखना होगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई में अंडरपास की भी तैयारी
शहर में यातायात को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) में प्रस्तावित अंडरपास के निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से टेंडर जारी किए जा चुके हैं।
इन दोनों संस्थानों के आसपास रोजाना विद्यार्थियों, मरीजों, उनके परिजनों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की आवाजाही रहती है। विशेष रूप से पीजीआई के आसपास मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही को देखते हुए यातायात व्यवस्था का सुचारु रहना महत्वपूर्ण है। पंजाब यूनिवर्सिटी के आसपास भी शैक्षणिक गतिविधियों के चलते वाहनों और पैदल चलने वालों की आवाजाही बनी रहती है।
ऐसे में अंडरपास और एलिवेटेड पुल जैसी परियोजनाएं शहर के यातायात ढांचे को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं। इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने, उचित यातायात प्रबंधन और संबंधित मार्गों के प्रभावी इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, सुखना चो पर 16.63 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला फोरलेन एलिवेटेड पुल चंडीगढ़ के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। दिसंबर में निर्माण शुरू होने की उम्मीद और 12 महीने में काम पूरा करने के लक्ष्य के साथ अब नजर टेंडर मूल्यांकन और आगामी निर्माण प्रक्रिया पर रहेगी। पुल तैयार होने के बाद मानसून के दौरान मार्ग बंद होने की समस्या कम करने, मध्यमार्ग पर यातायात का दबाव घटाने और चंडीगढ़, मनीमाजरा तथा पंचकूला के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।




