हिमाचल में एचआरटीसी पेंशनर्स का सरकार को अल्टीमेटम खत्म, 3 नवंबर से मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना; कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा

हिमाचल में एचआरटीसी पेंशनर्स का सरकार को अल्टीमेटम खत्म, 3 नवंबर से मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना; कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा

207 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक साल बाद भी पेंशन का इंतजार, डीए और एरियर नहीं मिलने से बढ़ा आक्रोश; दिवाली से पहले वेतन और 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी करने की मांग

शिमला। हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के मौजूदा कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के बीच लंबित वित्तीय लाभों को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। निगम की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की लंबित देनदारियों का मुद्दा अब आंदोलन का रूप लेने लगा है। पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों के भुगतान को लेकर एचआरटीसी पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से प्रबंधन को दिया गया 31 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम समाप्त हो गया है। इसके बाद पेंशनर्स ने 3 नवंबर से निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करने का फैसला लिया है।

दूसरी ओर, दिवाली के त्योहार से पहले कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए स्टेट एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने भी अपनी मांगें तेज कर दी हैं। यूनियन ने उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मांग की है कि कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन पहली तारीख को ही जारी किया जाए। इसके साथ ही लंबित 5 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त भी दिवाली से पहले उनके खातों में डाली जाए। यूनियन का कहना है कि त्योहार के दौरान कर्मचारियों को घर की जरूरतों, खरीदारी और अन्य खर्चों के लिए समय पर वेतन मिलना बेहद जरूरी है।

एचआरटीसी में एक तरफ सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी पेंशन और वर्षों से लंबित वित्तीय लाभों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा कर्मचारियों को वेतन और महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी की चिंता सता रही है। ऐसे में निगम प्रबंधन के सामने एक साथ कई वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

एक साल से पेंशन का इंतजार कर रहे 207 सेवानिवृत्त कर्मचारी

एचआरटीसी पेंशनर्स की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले वर्ष सितंबर में सेवानिवृत्त हुए 207 कर्मचारियों को एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई है। इन सभी कर्मचारियों के पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) जारी हो चुके हैं, लेकिन निगम के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें नियमित पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

पेंशनर्स का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही उनकी आय का मुख्य आधार होती है। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें नियमित घरेलू खर्चों, दवाइयों और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पेंशन पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में एक साल से अधिक समय तक पेंशन का इंतजार करना उनके लिए गंभीर आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है।

पेंशनर्स के अनुसार, केवल नए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन का मामला ही लंबित नहीं है, बल्कि महंगाई भत्ते और अन्य वित्तीय लाभों का भुगतान भी नहीं हुआ है। उन्हें पिछले वर्ष घोषित 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा चालू वर्ष में घोषित 5 प्रतिशत डीए की किस्त भी लंबित है।

पेंशनर्स का कहना है कि जब प्रदेश सरकार के अन्य विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आयु वर्ग के अनुसार पेंशन संबंधी वित्तीय लाभ दिए जा चुके हैं तो एचआरटीसी के पेंशनर्स को भी समान आधार पर सभी लाभ मिलने चाहिए। निगम से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों ने भी अपनी पूरी सेवा के दौरान प्रदेश के परिवहन तंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर करना उचित नहीं है।

3 नवंबर से मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव

एचआरटीसी पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 अक्टूबर तक दिया गया अल्टीमेटम समाप्त हो चुका है। अब 3 नवंबर से निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा। समिति का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और लंबित वित्तीय लाभ जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

समिति के सचिव राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि पेंशनर्स लंबे समय से अपने वित्तीय अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन और सरकार की ओर से लगातार उनकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के पेंशनर्स को वित्तीय लाभ दिए जा चुके हैं। एचआरटीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी उसी तर्ज पर अपने सभी लंबित लाभ चाहते हैं।

राजेंद्र ठाकुर के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी पूरी सेवा के बाद सम्मानजनक सेवानिवृत्ति और समय पर पेंशन मिलना उनका अधिकार है। इसके बावजूद पेंशनर्स को अपने ही हक के पैसों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समिति ने प्रबंधन को पर्याप्त समय दिया और 31 अक्टूबर तक भुगतान संबंधी आदेश जारी करने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान के आदेश जारी नहीं किए गए तो 3 नवंबर से निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव शुरू किया जाएगा। आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक पेंशनर्स की समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता।

निगम की आर्थिक स्थिति बनी भुगतान में बाधा

दूसरी तरफ एचआरटीसी प्रबंधन ने वित्तीय देनदारियों को लेकर निगम की आर्थिक स्थिति का हवाला दिया है। निगम के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी के अनुसार, एचआरटीसी इस समय भारी वित्तीय घाटे और नकदी प्रवाह यानी कैश फ्लो के दबाव से जूझ रहा है। इसके बावजूद पेंशन और कर्मचारियों के वेतन का समयबद्ध भुगतान प्रबंधन की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि पेंशनर्स के लंबित एरियर, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय देनदारियों के निपटारे के लिए राज्य सरकार तथा वित्त विभाग के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। प्रबंधन की कोशिश है कि इन लंबित मामलों के भुगतान के लिए आवश्यक बजट का प्रावधान करवाया जा सके।

आदित्य नेगी ने संकेत दिया कि निगम की मौजूदा वित्तीय स्थिति के कारण सभी देनदारियों का एक साथ निपटारा करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हालांकि, प्रबंधन का प्रयास है कि सरकार के सहयोग से पेंशनर्स और कर्मचारियों को राहत दी जाए।

निगम की ओर से वित्तीय संकट का हवाला दिए जाने के बावजूद पेंशनर्स का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं हो सकता। उन्हें भुगतान की स्पष्ट समयसीमा और ठोस आदेश चाहिए। यही कारण है कि प्रबंधन की ओर से सरकार के साथ बातचीत की जानकारी दिए जाने के बाद भी पेंशनर्स आंदोलन के फैसले पर कायम हैं।

दिवाली से पहले वेतन देने की मांग, कर्मचारियों को डीए का इंतजार

एचआरटीसी में वित्तीय लाभों को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच स्टेट एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने भी कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के समक्ष मामला उठाया है। यूनियन के प्रांतीय प्रधान प्रीत महिंदर, महासचिव दीपेंद्र कंवर और संगठन मंत्री प्रमोद ठाकुर ने उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री से आग्रह किया है कि दिवाली से पहले कर्मचारियों को आर्थिक राहत दी जाए।

यूनियन नेताओं ने कहा कि 7 और 8 नवंबर को दिवाली का पर्व मनाया जाना है। ऐसे में कर्मचारियों को त्योहार की तैयारियों के लिए समय पर पैसे की आवश्यकता है। घरों में खरीदारी, बच्चों की जरूरतें, घरेलू सामान और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए वेतन का समय पर मिलना जरूरी है।

यूनियन ने मांग की है कि अक्टूबर महीने का वेतन पहली नवंबर को ही सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा करवाया जाए। नेताओं ने बताया कि अक्टूबर महीने में कर्मचारियों को पांच तारीख को वेतन मिला था। ऐसे में इस बार दिवाली से पहले वेतन में देरी नहीं होनी चाहिए।

यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को हर महीने वेतन की एक निश्चित तारीख मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने घरेलू बजट और वित्तीय जरूरतों की योजना बना सकें। वेतन में अनिश्चितता रहने से कर्मचारियों को आर्थिक प्रबंधन में परेशानी होती है। त्योहारों के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

5 प्रतिशत डीए की किस्त जारी करने पर भी जोर

कंडक्टर यूनियन ने केवल वेतन भुगतान की मांग ही नहीं उठाई, बल्कि लंबित 5 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त भी तुरंत जारी करने की मांग की है। यूनियन नेताओं के अनुसार, लगातार बढ़ती महंगाई के कारण कर्मचारियों के घरेलू खर्च में वृद्धि हो रही है। खाद्य सामग्री, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है।

ऐसे में महंगाई भत्ता कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा होता है। यूनियन का कहना है कि जब डीए की किस्त लंबित रहती है तो कर्मचारियों की वास्तविक आय पर इसका असर पड़ता है। इसलिए सरकार और निगम प्रबंधन को दिवाली से पहले 5 प्रतिशत डीए जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

यूनियन नेताओं ने परिवहन मंत्री से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और वित्त विभाग के साथ समन्वय करके कर्मचारियों को राहत दिलाएं। उनका कहना है कि त्योहार के अवसर पर कर्मचारियों को वेतन और महंगाई भत्ते के लिए इंतजार नहीं करना पड़ना चाहिए।

सरकार और प्रबंधन के सामने दोहरी चुनौती

एचआरटीसी में मौजूदा हालात निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। एक तरफ पेंशनर्स अपने लंबित वित्तीय लाभों के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा कर्मचारी भी समय पर वेतन और महंगाई भत्ता जारी करने की मांग कर रहे हैं।

पेंशनर्स का कहना है कि उनके लंबित भुगतान में लगातार देरी से आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ रही है। वहीं कर्मचारियों की मांग है कि वेतन भुगतान की व्यवस्था नियमित होनी चाहिए, ताकि उन्हें हर महीने किसी तरह की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

निगम की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार के सामने बजट उपलब्ध करवाने और लंबित देनदारियों के निपटारे की चुनौती है। यदि पेंशनर्स का आंदोलन शुरू होता है तो निगम मुख्यालय में कामकाज और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

अब सबकी निगाहें 3 नवंबर से प्रस्तावित पेंशनर्स के आंदोलन और दिवाली से पहले कर्मचारियों की मांगों पर सरकार के रुख पर टिकी हैं। यदि समय रहते भुगतान को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो एचआरटीसी में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच तनाव और बढ़ सकता है।