महिला विकास प्रोत्साहन योजना में पुरस्कार राशि एक लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव विचाराधीन; 31 दिसंबर 2026 तक कर सकेंगे आवेदन, पिछले पांच वर्षों के सामाजिक योगदान के आधार पर होगा चयन
शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के विकास, सम्मान और सशक्तीकरण के लिए उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। प्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को अब दो लाख रुपये का पुरस्कार देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश महिला विकास प्रोत्साहन योजना की मौजूदा पुरस्कार राशि को दोगुना करने की तैयारी है। वर्तमान में इस योजना के तहत चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र प्रदान करने का प्रावधान है।
सरकार का मानना है कि महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में सुधार के लिए व्यक्तिगत स्तर पर काम करने वाले लोगों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुरस्कार राशि बढ़ाने से महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संगठनों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे समाज में महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता फैलाने के प्रयासों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
महिला विकास प्रोत्साहन योजना के तहत पुरस्कार राशि में इससे पहले भी बढ़ोतरी की जा चुकी है। राज्य सरकार ने 17 फरवरी 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से पुरस्कार की राशि 21 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी थी। अब इसे दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि, फिलहाल लागू अधिसूचित प्रावधानों के अनुसार पुरस्कार एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र ही है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही बढ़ी हुई राशि लागू हो सकेगी।
व्यक्तियों के साथ संस्थाएं भी कर सकेंगी आवेदन
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल व्यक्तिगत स्तर पर काम करने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि सामाजिक संस्थाओं को भी भागीदारी का अवसर दिया गया है। पुरस्कार के लिए पात्र हिमाचली नागरिक आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), पंजीकृत समितियां और ट्रस्ट भी अपने कार्यों के आधार पर नामांकन भेज सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करना है, जिन्होंने लंबे समय तक महिलाओं के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हों। इसमें उन लोगों को प्राथमिकता मिलेगी जिन्होंने महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
योजना के तहत ऐसे कार्यों को विशेष महत्व दिया जाएगा, जिनसे महिलाओं की स्थिति में वास्तविक सुधार आया हो। केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों या किसी एक कार्यक्रम के आयोजन को पुरस्कार का आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि यह देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति या संस्था के प्रयासों से महिलाओं और बालिकाओं को कितना लाभ पहुंचा है।
पांच प्रमुख क्षेत्रों में किए गए कार्य होंगे चयन का आधार
महिला एवं बाल विकास विभाग ने पुरस्कार के लिए विभिन्न क्षेत्रों में किए गए योगदान को आधार बनाया है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और कला-संस्कृति प्रमुख रूप से शामिल हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने वाले कार्यों को महत्व दिया जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं की पढ़ाई को प्रोत्साहित करने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को शिक्षा से जोड़ने, स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या कम करने और महिलाओं को व्यावसायिक एवं कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के प्रयासों पर विचार किया जाएगा।
खेल के क्षेत्र में महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने और लड़कियों की खेल गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास भी चयन का आधार बन सकते हैं।
इसी तरह सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, जरूरतमंद और वंचित महिलाओं की सहायता करने, आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने तथा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है।
कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में महिलाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने वाले कार्यों को भी महत्व दिया जाएगा।
31 दिसंबर 2026 तक भेजे जा सकेंगे नामांकन
महिला विकास प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। पात्र व्यक्ति और संस्थाएं निर्धारित प्रारूप में अपना नामांकन ऑफलाइन या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन भेज सकते हैं।
महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी उपायुक्तों को पत्र जारी कर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को कहा गया है कि पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं तक योजना की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले अधिक से अधिक लोग इसके लिए आवेदन कर सकें।
विभाग का प्रयास है कि प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा संस्थाओं को भी इस योजना के बारे में जानकारी मिले। कई बार ऐसे क्षेत्रों में व्यक्ति और छोटे संगठन सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण काम करते हैं, लेकिन उन्हें राज्य स्तर पर उचित पहचान नहीं मिल पाती। योजना के प्रचार-प्रसार से ऐसे लोगों को भी अपनी उपलब्धियां सामने रखने का अवसर मिलेगा।
पिछले पांच वर्षों के काम का देना होगा पूरा विवरण
पुरस्कार के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति और संस्थाओं को अपने पिछले पांच कैलेंडर वर्षों के कार्यों का विस्तृत ब्योरा देना अनिवार्य होगा। आवेदन में यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित अवधि के दौरान महिलाओं के विकास और सशक्तीकरण के लिए कौन-कौन से प्रयास किए गए और उनसे समाज को किस प्रकार का लाभ मिला।
आवेदकों को वर्षवार अपने कार्यों का विवरण प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ प्रमुख उपलब्धियों, किए गए कार्यक्रमों और महिला कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी देनी होगी। आवेदन में नाम, पूरा पता, टेलीफोन नंबर, ई-मेल और जिस क्षेत्र में पुरस्कार के लिए नामांकन किया जा रहा है, उसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
यदि किसी संस्था या समूह की ओर से नामांकन भेजा जा रहा है तो उसके कार्यक्षेत्र और महिलाओं के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी भी देनी होगी। इसके अतिरिक्त नाम की अनुशंसा करने वाली संस्था का विवरण देना भी जरूरी होगा।
चयन प्रक्रिया में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि आवेदक का योगदान निरंतर और प्रभावशाली रहा है या नहीं। किसी एक उपलब्धि के बजाय पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा। इससे उन लोगों और संस्थाओं को प्राथमिकता मिल सकेगी, जिन्होंने महिला कल्याण को अपने काम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
राज्यस्तरीय समिति करेगी पुरस्कार विजेताओं का चयन
योजना के तहत पुरस्कार के लिए पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं का चयन करने की जिम्मेदारी राज्यस्तरीय चयन समिति को सौंपी गई है। इस समिति की अध्यक्षता सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता करेंगे।
समिति में शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा सेवाएं एवं खेल तथा भाषा, कला एवं संस्कृति विभागों के प्रधान सचिव या सचिव सदस्य के रूप में शामिल होंगे। महिला एवं बाल विकास निदेशक समिति के सदस्य सचिव होंगे।
विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को समिति में शामिल करने का उद्देश्य यह है कि महिलाओं के विकास से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए कार्यों का विशेषज्ञता के आधार पर मूल्यांकन किया जा सके। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में योगदान की प्रकृति अलग-अलग होती है। ऐसे में संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाया जा सकेगा।
समिति आवेदकों की ओर से प्रस्तुत किए गए विवरण, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान का मूल्यांकन करेगी। इसके आधार पर योग्य व्यक्तियों और संस्थाओं का चयन किया जाएगा।
15 लोगों का समूह भी कर सकेगा अनुशंसा
योजना के तहत नामांकन भेजने की प्रक्रिया को भी व्यापक बनाया गया है। किसी पात्र व्यक्ति या संस्था का नाम एनजीओ, पंजीकृत सोसायटी, ट्रस्ट अथवा कम से कम 15 व्यक्तियों के समूह की अनुशंसा पर भी भेजा जा सकता है।
इसके अलावा सरकारी विभाग और संस्थान भी अपने स्तर पर महिला विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम पुरस्कार के लिए सुझा सकते हैं।
इस व्यवस्था से ऐसे लोगों को भी पहचान मिलने का रास्ता खुलेगा, जो स्वयं आवेदन करने के बजाय अपने सामाजिक कार्यों के कारण स्थानीय स्तर पर जाने जाते हैं। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में महिला शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, स्वरोजगार और सामाजिक सुधार के लिए काम करने वाले लोगों को स्थानीय समुदायों का व्यापक समर्थन प्राप्त होता है। ऐसे में सामूहिक अनुशंसा के माध्यम से उनके योगदान को राज्य स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा।
उपायुक्त करेंगे आवेदनों में दी गई जानकारी का सत्यापन
पुरस्कार के लिए प्राप्त होने वाले नामांकनों की जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित जिले के उपायुक्तों को दी गई है। उपायुक्त आवेदक की ओर से प्रस्तुत की गई जानकारी और उसके कार्यों की प्रामाणिकता की जांच करेंगे।
इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदन में दिए गए दावे वास्तविक हों और संबंधित व्यक्ति या संस्था ने वास्तव में महिला विकास एवं सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। सत्यापन के बाद योग्य नामांकन राज्यस्तरीय चयन समिति के पास भेजे जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और केवल वास्तविक योगदान करने वाले व्यक्तियों तथा संस्थाओं को पुरस्कार के लिए योग्य मानना है। जिला प्रशासन के स्तर पर सत्यापन होने से स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन भी किया जा सकेगा।
महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को मिलेगा प्रोत्साहन
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की महिला विकास प्रोत्साहन योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से उन लोगों को सम्मानित करने की व्यवस्था की गई है, जो अपने व्यक्तिगत प्रयासों या संस्थागत गतिविधियों के जरिए महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
पुरस्कार राशि को दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव इस योजना को और आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों और महिला कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए काम करने वाले लोगों के प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान मिल सकती है।
फिलहाल योजना के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 है और मौजूदा अधिसूचना के अनुसार पुरस्कार राशि एक लाख रुपये निर्धारित है। दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार की ओर से इस संबंध में लिया जाने वाला निर्णय महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, यह योजना हिमाचल प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के लिए समर्पित व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मान देने के साथ समाज में महिलाओं के विकास के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और भागीदारी को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती है।




