सीजीपी-2013 के नियमों की होगी समीक्षा, गृह जिले और एक ही जिले में स्थानांतरण के लिए तय होंगे नए दिशा-निर्देश; 6 हजार से अधिक आवेदन लंबित, 1.77 लाख कर्मचारियों की टिकी निगाहें
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को अभी कुछ और समय प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। राज्य सरकार ने सामान्य तबादलों की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने से पहले पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने और नियमों को अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी गठित की गई है। यह समिति तबादलों के मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा करेगी और आवश्यक बदलावों को लेकर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
सरकार की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। समिति की सिफारिशों के आधार पर विशेष रूप से गृह जिले और एक ही जिले के भीतर कर्मचारियों के तबादलों के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। इससे प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही तबादला व्यवस्था में बदलाव की संभावना है। हालांकि, समिति की रिपोर्ट आने और उस पर कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही नई व्यवस्था का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।
हिमाचल प्रदेश में करीब 1.77 लाख सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध के कारण इनमें से बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी विभागों में छह हजार से अधिक तबादला आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे में नई कमेटी का गठन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि इसकी सिफारिशों से न केवल भविष्य के तबादलों की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि पहले से लंबित आवेदनों पर भी असर पड़ सकता है।
मुकेश अग्निहोत्री करेंगे कमेटी की अगुवाई
सरकार की ओर से गठित चार सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को सौंपी गई है। कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी को समिति का सदस्य बनाया गया है।
वहीं, प्रधान सचिव (कार्मिक) एम. सुधा देवी समिति की सदस्य सचिव होंगी। समिति को मौजूदा तबादला नीति और वर्ष 2013 में जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों के प्रावधानों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति यह समीक्षा करेगी कि वर्तमान व्यवस्था में किन नियमों के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के गृह जिलों में स्थानांतरण, एक ही जिले के भीतर तबादलों और अन्य विशेष परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर भी सुझाव दिए जाएंगे।
सरकार का उद्देश्य तबादलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करना है, ताकि स्थानांतरण के मामलों में एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सके। समिति की सिफारिशें मिलने के बाद सरकार उनके सभी पहलुओं पर विचार करेगी। अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा।
छह हजार से अधिक आवेदन लंबित, कर्मचारियों की बढ़ी प्रतीक्षा
प्रदेश में सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध लागू होने के कारण हजारों कर्मचारी अपने स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विभिन्न विभागों में छह हजार से अधिक तबादला आवेदन लंबित हैं। इनमें कई ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं, जो लंबे समय से अपने गृह जिले या पसंदीदा स्थान पर तैनाती की मांग कर रहे हैं।
सामान्य तबादलों पर रोक के बावजूद विशेष परिस्थितियों और विभागों में रिक्त पदों की उपलब्धता के आधार पर कुछ स्थानांतरण किए जा रहे हैं। हालांकि, नियमित तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कर्मचारियों की समस्याएं बनी हुई हैं।
अब कैबिनेट सब कमेटी के गठन के बाद लंबित आवेदनों को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है। कर्मचारियों को यह उम्मीद थी कि अक्टूबर या नवंबर में सरकार सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटा सकती है, लेकिन फिलहाल सरकार ने पहले नीति की समीक्षा करने का रास्ता चुना है।
ऐसे में कर्मचारियों की निगाहें समिति की बैठकों और उसकी सिफारिशों पर रहेंगी। उन्हें यह भी उम्मीद है कि नई व्यवस्था बनाते समय लंबे समय से लंबित आवेदनों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।
11 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में उठा था तबादलों में हस्तक्षेप का मुद्दा
तबादला व्यवस्था की समीक्षा का फैसला अचानक नहीं लिया गया है। इससे पहले 11 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र में कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके विधानसभा क्षेत्र में उन्हें विश्वास में लिए बिना कर्मचारियों के तबादले करवाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि एक युवा नेता अपनी मर्जी से स्थानांतरण करवा रहा है, जिससे निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका और अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
कैबिनेट बैठक में यह मामला सामने आने के बाद तबादलों से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई थी। मंत्रियों ने स्थानांतरण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं के साथ-साथ न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक पहलुओं पर भी विचार किया था।
इसके बाद सरकार ने मौजूदा तबादला नीति की समीक्षा के लिए कैबिनेट सब कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। अब समिति के गठन के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार केवल सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि स्थानांतरण से संबंधित नियमों में भी आवश्यक बदलाव करने पर विचार कर रही है।
जनवरी में मिली थी राहत, अप्रैल में फिर लग गई रोक
हिमाचल प्रदेश में सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध हटाने और दोबारा लागू करने का सिलसिला पिछले कुछ महीनों से जारी है। प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी को सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया था। इससे कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से लंबित स्थानांतरण के मामलों का निपटारा हो सकेगा।
हालांकि, यह राहत अधिक समय तक जारी नहीं रह सकी। छह अप्रैल को सरकार ने एक बार फिर सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद चार जून को मुख्य सचिव की ओर से आदेश जारी कर इस प्रतिबंध को जारी रखने के निर्देश दिए गए।
तब से सरकारी कर्मचारी नियमित स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान विशेष परिस्थितियों में कुछ तबादले जरूर हुए, लेकिन सामान्य कर्मचारियों के लिए नियमित स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।
अक्टूबर और नवंबर में प्रतिबंध हटने की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों को भी फिलहाल राहत नहीं मिली है। अब सरकार ने नियमों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे तबादलों पर रोक हटने का समय और आगे खिसक सकता है।
गृह जिले और एक ही जिले में तबादलों पर रहेगा विशेष फोकस
कैबिनेट सब कमेटी की समीक्षा में गृह जिले और एक ही जिले के भीतर होने वाले स्थानांतरण विशेष महत्व रखेंगे। इन दोनों श्रेणियों के तबादलों को लेकर नए दिशा-निर्देश तैयार करने की संभावना है।
वर्तमान मार्गदर्शक सिद्धांतों के विभिन्न प्रावधानों का अध्ययन करते हुए समिति यह देखेगी कि कर्मचारियों के स्थानांतरण में प्रशासनिक जरूरतों, रिक्त पदों और अन्य परिस्थितियों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जा सकता है।
गृह जिले में तैनाती की मांग करने वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। इसी तरह एक ही जिले के भीतर स्थानांतरण के मामलों में भी एक समान प्रक्रिया लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि तबादलों के फैसले निर्धारित नियमों के अनुसार हों और प्रशासनिक जरूरतों को भी प्राथमिकता मिले। हालांकि, समिति की सिफारिशें आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा नीति में किन प्रावधानों को बदला जाएगा और किन नियमों को यथावत रखा जाएगा।
1.77 लाख कर्मचारियों की नई नीति पर नजर
हिमाचल प्रदेश में करीब 1.77 लाख सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में तबादला नीति में होने वाला कोई भी बदलाव बड़ी संख्या में कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है। खासकर वे कर्मचारी, जिनके आवेदन लंबे समय से लंबित हैं, नई व्यवस्था को लेकर अधिक उत्सुक हैं।
कर्मचारियों के सामने फिलहाल दो प्रमुख सवाल हैं। पहला, सामान्य तबादलों पर लगा प्रतिबंध कब हटेगा और दूसरा, नई नीति लागू होने के बाद स्थानांतरण के लिए क्या शर्तें निर्धारित की जाएंगी? इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले से लंबित छह हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा पुरानी नीति के तहत होगा या नई व्यवस्था लागू होने के बाद ही उन पर फैसला लिया जाएगा।
सरकार की ओर से फिलहाल समिति गठित कर समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की गई है। समिति की रिपोर्ट और उसके बाद मंत्रिमंडल के फैसले से ही इन सवालों का जवाब मिलेगा।
कुल मिलाकर हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों की तबादला व्यवस्था अब नए बदलाव के दौर में प्रवेश कर सकती है। एक तरफ कर्मचारी सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार पहले नियमों को व्यवस्थित करने पर जोर दे रही है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशें प्रदेश के करीब 1.77 लाख कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।




