Haryana सरकार ने कलेक्टर दरों में प्रस्तावित संशोधन पर लगाई रोक, फिलहाल पुरानी दरों पर ही होगी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के लाखों संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं, रियल एस्टेट कारोबारियों और निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर दरों को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश के बाद राजस्व विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। अब अगले आदेश तक राज्य में जमीन, मकान, फ्लैट, व्यावसायिक संपत्तियों और अन्य अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री वर्तमान में लागू कलेक्टर दरों पर ही की जाएगी।
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो निकट भविष्य में संपत्ति खरीदने या बेचने की योजना बना रहे हैं। यदि नई कलेक्टर दरें लागू हो जातीं तो कई जिलों में संपत्ति की सरकारी कीमत बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी वृद्धि हो सकती थी। फिलहाल सरकार ने इस संभावना को टालते हुए पुराने रेट जारी रखने का फैसला लिया है।
राज्य सरकार का कहना है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि संपत्ति लेनदेन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और रियल एस्टेट बाजार में अनावश्यक अस्थिरता उत्पन्न न हो।

राजस्व विभाग ने जारी किए आधिकारिक आदेश
हरियाणा के राजस्व विभाग की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित नई कलेक्टर दरें फिलहाल लागू नहीं की जाएंगी। जब तक सरकार की ओर से नया आदेश जारी नहीं होता, तब तक वर्तमान में लागू कलेक्टर दरों के आधार पर ही सभी प्रकार की संपत्तियों का पंजीकरण किया जाएगा।
इस निर्णय के बाद सभी जिला प्रशासन और रजिस्ट्रेशन कार्यालयों को पुराने रेट के अनुसार कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
संपत्ति खरीदने वालों को मिलेगी राहत
यदि कलेक्टर दरों में वृद्धि लागू होती तो संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अधिक स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता था। सरकार के वर्तमान निर्णय से ऐसे लोगों को तत्काल राहत मिलेगी जो आने वाले दिनों में जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी दरें जारी रहने से बाजार में खरीद-बिक्री की गतिविधियां सामान्य बनी रह सकती हैं।
दिसंबर 2024 में हो चुका था संशोधन, अब अगले आदेश तक लागू रहेंगी वही दरें
राजस्व विभाग के अनुसार हरियाणा में कलेक्टर दरों का महत्वपूर्ण संशोधन पहले ही दिसंबर 2024 में किया जा चुका था। इसी कारण सरकार ने फिलहाल दोबारा संशोधन करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है।
सरकार का मानना है कि कुछ ही महीनों के अंतराल में दोबारा संशोधन करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए वर्तमान दरों को अगले आदेश तक प्रभावी रखने का फैसला लिया गया है।
क्या होती हैं कलेक्टर दरें?
कलेक्टर दरें वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होती हैं जिनके आधार पर किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री का पंजीकरण किया जाता है। यदि बाजार मूल्य अधिक हो तो उसी के अनुसार रजिस्ट्री होती है, लेकिन यदि बाजार मूल्य कम दर्शाया जाता है तो सरकार द्वारा निर्धारित कलेक्टर दर को आधार माना जाता है।
इन दरों का उपयोग स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क निर्धारित करने के लिए भी किया जाता है।
प्रत्येक वर्ष होता है संशोधन
सामान्यतः हर वर्ष नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के आसपास कलेक्टर दरों की समीक्षा और संशोधन किया जाता है। इसका उद्देश्य बाजार की स्थिति, विकास कार्यों और भूमि के बढ़ते मूल्य के अनुसार सरकारी दरों को अद्यतन रखना होता है।
हालांकि इस बार सरकार ने पहले किए गए संशोधन को देखते हुए नई प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
दिसंबर 2024 में संशोधित किए गए थे रेट
वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) सुमिता मिश्रा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में कलेक्टर दरों का संशोधन दिसंबर 2024 में पूरा किया गया था।
अब उन्हीं दरों को अगले आदेश तक लागू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलों से नहीं मांगी गई नई रिपोर्ट
राजस्व विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी जिले से नई कलेक्टर दरों के संबंध में रिपोर्ट नहीं मांगी गई है।
इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल वर्तमान व्यवस्था को जारी रखना चाहती है और नए संशोधन पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कई जिलों ने तैयार कर लिए थे प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के कई जिलों ने संभावित संशोधन को ध्यान में रखते हुए नई कलेक्टर दरों के प्रस्ताव तैयार कर लिए थे। कुछ स्थानों पर 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक वृद्धि की सिफारिश भी की गई थी।
इन प्रस्तावों को सार्वजनिक करने और आपत्तियां आमंत्रित करने की तैयारी भी की जा रही थी।
जनसुझाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले आया फैसला
कुछ जिलों में संशोधित दरों को पोर्टल पर अपलोड करने और आम जनता से सुझाव तथा आपत्तियां लेने की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।
लेकिन सरकार द्वारा संशोधन स्थगित किए जाने के बाद यह प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है।
चार महीने पहले हुए संशोधन का पड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर 2024 में कलेक्टर दरों में पहले ही संशोधन किया जा चुका था। ऐसे में कुछ ही महीनों बाद पुनः संशोधन करना आवश्यक नहीं समझा गया।
इसी कारण सरकार ने वर्तमान दरों को जारी रखने का निर्णय लिया है।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के कारण बदला था कार्यक्रम
वर्ष 2024 में कलेक्टर दरों के वार्षिक संशोधन की प्रक्रिया सामान्य समय पर पूरी नहीं हो सकी थी। पहले लोकसभा चुनाव और उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव की तैयारियों के कारण संशोधन टलता रहा।
चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई सरकार के गठन के उपरांत दिसंबर 2024 में संशोधन लागू किया गया था।
अक्टूबर में नई सरकार बनने के बाद हुआ संशोधन
हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में नई सरकार ने अक्टूबर 2024 में कार्यभार संभाला। इसके बाद लंबित प्रक्रिया को पूरा करते हुए दिसंबर 2024 में नई कलेक्टर दरें लागू की गई थीं।
इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित नए संशोधन को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
रियल एस्टेट बाजार पर पड़ सकता है सकारात्मक प्रभाव
पुरानी कलेक्टर दरें जारी रहने से संपत्ति खरीदने और बेचने वाले लोगों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही बिल्डर, डेवलपर और निवेशक भी अपनी योजनाओं को मौजूदा लागत के आधार पर आगे बढ़ा सकेंगे।
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है और संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया बिना अतिरिक्त लागत के सामान्य रूप से जारी रहेगी।




