पंजाब और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में सर्दी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह और देर शाम चलने वाली ठंडी हवाओं ने जनजीवन पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि अगले कुछ दिनों तक ठंड का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पंजाब के कई जिलों के लिए कोल्ड वेव (Cold Wave) का येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण पंजाब में तापमान लगातार नीचे जा रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले से ही ठंड का असर बढ़ चुका है और वहीं से आने वाली ठंडी हवाएं अब पंजाब के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर रही हैं।
दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर भी देखने को मिल रहा है। दिन में धूप निकलने के कारण कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक गर्माहट महसूस हो रही है, जबकि सूर्यास्त के बाद तापमान तेजी से गिर रहा है। यही वजह है कि सुबह और देर रात लोगों को अधिक ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब के औसत न्यूनतम तापमान में लगभग 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। तापमान अब सामान्य स्तर के काफी करीब पहुंच गया है और कई जिलों में रात के समय ठंड पहले की तुलना में अधिक महसूस की जा रही है।
फरीदकोट राज्य का सबसे ठंडा जिला दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान लगभग 2.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं कई अन्य जिलों में भी तापमान तेजी से नीचे आया है, जिससे लोगों ने गर्म कपड़ों और हीटर का उपयोग बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रात का तापमान लगातार नीचे बना रहता है तो अगले कुछ दिनों में कोल्ड वेव की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
दिन के तापमान में बना हुआ है अंतर
हालांकि रातें काफी ठंडी हो चुकी हैं, लेकिन दिन के समय कई जिलों में धूप निकलने से तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है। बठिंडा में अधिकतम तापमान लगभग 27.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा।
दिन और रात के तापमान में इतना अधिक अंतर होने के कारण लोगों को मौसम में अचानक बदलाव महसूस हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आठ जिलों के लिए कोल्ड वेव का येलो अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने पंजाब के कई जिलों में अगले दो दिनों तक कोल्ड वेव की संभावना जताई है। जिन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है उनमें होशियारपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, मोगा और जालंधर शामिल हैं।
इन जिलों में सुबह और देर रात के समय तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। ठंडी हवाओं के कारण खुले स्थानों पर ठंड अधिक महसूस हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सुबह जल्दी बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े मौसमीय बदलाव या वर्षा की संभावना नहीं है और पूरा क्षेत्र शुष्क बना रहेगा।
पंजाब और चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता भी चिंता का विषय, अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान
सर्दी बढ़ने के साथ-साथ पंजाब और चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता (Air Quality) भी चिंता का विषय बनी हुई है। धान की कटाई और पराली का मौसम लगभग समाप्त होने के बावजूद कई शहरों में वायु गुणवत्ता अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के अनुसार बदलते मौसम, धूल, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में वातावरण की निचली परतों में हवा का प्रवाह धीमा होने के कारण प्रदूषक तत्व लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं। इसी कारण कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कई शहरों में AQI ‘Poor’ श्रेणी के करीब
सुबह के समय विभिन्न शहरों में दर्ज एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार अमृतसर का AQI लगभग 94, बठिंडा 76, जालंधर 180, खन्ना 115, लुधियाना 120, पटियाला 105 और रूपनगर 63 दर्ज किया गया।
मंडी गोबिंदगढ़ का AQI लगभग 239 रिकॉर्ड किया गया, जो सूची में सबसे अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के कारण प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बना रहता है।
AQI के आधार पर 0 से 50 तक की श्रेणी को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम और 201 से 300 के बीच की श्रेणी को खराब माना जाता है।
चंडीगढ़ में मिश्रित रही वायु गुणवत्ता
चंडीगढ़ में विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों से अलग-अलग स्तर के आंकड़े सामने आए। कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर तकनीकी कारणों से डेटा उपलब्ध नहीं हो सका, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय और सेक्टर-25 क्षेत्र का AQI लगभग 128 दर्ज किया गया।
मोहाली के समीप स्थित कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों से भी निर्धारित समय पर आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे ट्राईसिटी क्षेत्र में मौसम की स्थिति और स्थानीय उत्सर्जन का प्रभाव बना हुआ है।
प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में अधिक समय तक बने रहते हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआं, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला उत्सर्जन और स्थानीय गतिविधियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
सुबह और शाम के समय धुंध जैसी स्थिति बनने पर प्रदूषण का प्रभाव और अधिक महसूस होता है। ऐसे मौसम में सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आने वाले सात दिनों का मौसम कैसा रहेगा?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में किसी बड़े वर्षा तंत्र के सक्रिय होने की संभावना नहीं है। पूरे सप्ताह मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है।
हालांकि सुबह के समय कुछ जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से नदी और निचले इलाकों में दृश्यता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। वाहन चालकों को सुबह के समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अगले दो दिनों तक तापमान में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन उसके बाद न्यूनतम तापमान में लगभग 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट आने की संभावना जताई गई है। इसके बाद तापमान कुछ दिनों तक स्थिर रह सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
मौसम में लगातार बदलाव के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह जल्दी या देर रात बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनना, पर्याप्त पानी पीना और लंबे समय तक ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचना उपयोगी माना जाता है।
जिन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है, वहां अस्थमा या श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को आवश्यकता पड़ने पर मास्क का उपयोग करने और अत्यधिक प्रदूषण वाले समय में बाहरी गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी जाती है।
कृषि और दैनिक जीवन पर भी दिखेगा असर
लगातार गिरते तापमान का असर केवल आम जनजीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। गेहूं और अन्य रबी फसलों के लिए नियंत्रित ठंड लाभदायक मानी जाती है, लेकिन अत्यधिक ठंड या लगातार कोहरे की स्थिति में फसलों की निगरानी आवश्यक होती है।
इसी प्रकार सुबह के समय घना कोहरा बनने पर सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग समय-समय पर जारी होने वाले अपडेट पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है ताकि बदलते मौसम का प्रभाव कम किया जा सके।




