भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। निवेशकों की बढ़ती रुचि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के चलते सोने की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। वहीं चांदी भी ऐतिहासिक स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जिससे आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और निवेशकों दोनों की नजरें बाजार पर बनी हुई हैं।
सोने की कीमतों में आई इस तेजी ने एक ओर निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है, तो दूसरी ओर शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और घरेलू मांग के कारण आने वाले समय में भी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 दिसंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 732 रुपये की बढ़त के साथ 1,33,442 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले इसका भाव 1,32,710 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस बढ़ोतरी के साथ सोने ने अपना नया ऑल टाइम हाई दर्ज किया है।
चांदी में हल्की गिरावट, लेकिन रिकॉर्ड स्तर के करीब बनी हुई कीमत
सोने की तुलना में चांदी के दाम में दिन के कारोबार के दौरान कुछ गिरावट देखने को मिली। IBJA के अनुसार, चांदी का भाव 2,958 रुपये घटकर 1,92,222 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले इसकी कीमत 1,95,180 रुपये प्रति किलो थी, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है।
हालांकि एक दिन की गिरावट के बावजूद चांदी अभी भी ऐतिहासिक ऊंचाई के बेहद करीब बनी हुई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेश दोनों के कारण चांदी की कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती बनी रह सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का असर
कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं से लेकर ज्वेलरी उद्योग तक दिखाई दे रहा है। शादी के सीजन में जहां आभूषणों की खरीदारी बढ़ जाती है, वहीं ऊंचे दामों के कारण कई ग्राहक खरीदारी टालने या कम वजन के आभूषण चुनने लगे हैं।
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में बदलाव देखने को मिला है। कई लोग भारी आभूषणों की जगह हल्के डिजाइन या निवेश के लिए छोटे गोल्ड बार और सिक्कों की ओर भी रुख कर रहे हैं।
इस साल सोने और चांदी ने दिया शानदार रिटर्न, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी
वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक सोने और चांदी दोनों ने निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिया है। कीमतों में आई तेजी ने इन्हें सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले निवेश विकल्पों में शामिल कर दिया है।
सोना इस साल 57 हजार रुपये से ज्यादा महंगा हुआ
IBJA के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोने की कीमत 76,162 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अब यह बढ़कर 1,33,442 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। यानी वर्ष की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में कुल 57,280 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दी है। इसी वजह से घरेलू बाजार में भी कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं।
चांदी ने भी एक लाख रुपये से अधिक की छलांग लगाई
चांदी की कीमतों में भी इस वर्ष उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलोग्राम चांदी का भाव 86,017 रुपये था। वर्तमान में यह बढ़कर 1,92,222 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। यानी वर्ष के दौरान चांदी करीब 1,06,205 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सौर ऊर्जा उद्योग और निवेश की बढ़ती रुचि ने इसकी कीमतों को मजबूती प्रदान की है।
अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग क्यों होते हैं?
अक्सर ग्राहकों के मन में यह सवाल होता है कि एक ही दिन अलग-अलग शहरों में सोने और चांदी की कीमतें अलग क्यों दिखाई देती हैं। इसका मुख्य कारण स्थानीय कर, परिवहन लागत, ज्वेलर्स का मार्जिन, मेकिंग चार्ज और अन्य व्यावसायिक खर्च होते हैं।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी की जाने वाली कीमतों में केवल शुद्ध धातु का आधार मूल्य शामिल होता है। इसमें 3 प्रतिशत जीएसटी, ज्वेलरी बनाने का शुल्क (मेकिंग चार्ज) और ज्वेलर्स का लाभ शामिल नहीं होते। यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, पटना, लखनऊ या अन्य शहरों में ग्राहकों को अलग-अलग कीमतें देखने को मिलती हैं।
IBJA की कीमतों का उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने में भी किया जाता है। कई बैंक और वित्तीय संस्थान गोल्ड लोन का मूल्यांकन करने के लिए भी इन्हीं दरों को आधार मानते हैं।
सोने की कीमत बढ़ने के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही खरीदारी मानी जा रही है।
वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम वाले निवेश विकल्पों से दूरी बना रहे हैं। ऐसे समय में सोने को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।
जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक या राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आती है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी दिखाई देता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिला समर्थन
दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि कर रहे हैं। विशेष रूप से चीन सहित कई देशों ने बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्षभर में केंद्रीय बैंकों द्वारा सैकड़ों टन सोना खरीदा गया है, जिससे वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है।
जब केंद्रीय बैंक बड़े स्तर पर सोने की खरीद करते हैं तो बाजार में उपलब्ध आपूर्ति पर असर पड़ता है और कीमतों में मजबूती देखने को मिलती है। इसी कारण घरेलू बाजार में भी सोने के भाव लगातार ऊपर बने हुए हैं।
सोना खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
सोने की ऊंची कीमतों के बीच खरीदारी करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सही जानकारी के साथ खरीदारी करने से उपभोक्ता गुणवत्ता और कीमत दोनों के मामले में बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना खरीदें
उपभोक्ताओं को हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) से प्रमाणित हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोने की शुद्धता निर्धारित मानकों के अनुरूप है। हॉलमार्क पर अंकित अल्फान्यूमेरिक कोड के माध्यम से आभूषण की पहचान और प्रमाणिकता की पुष्टि की जा सकती है।
22 कैरेट, 24 कैरेट और 18 कैरेट सोने की शुद्धता अलग-अलग होती है, इसलिए खरीदारी से पहले कैरेट की जानकारी अवश्य जांच लें।
कीमत और वजन की पुष्टि करना जरूरी
आभूषण खरीदते समय केवल दुकानदार द्वारा बताई गई कीमत पर निर्भर रहने के बजाय उस दिन के आधिकारिक बाजार भाव की भी जांच करनी चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसी विश्वसनीय संस्थाओं द्वारा जारी कीमतों से तुलना करने के बाद ही खरीदारी करना बेहतर माना जाता है।
इसके साथ ही आभूषण का वास्तविक वजन, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्कों की जानकारी बिल में स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इससे भविष्य में किसी प्रकार के विवाद या भ्रम की संभावना कम हो जाती है।
निवेश और आभूषण खरीदने में अंतर समझना जरूरी
यदि कोई व्यक्ति केवल निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदना चाहता है, तो उसके लिए गोल्ड बार, गोल्ड कॉइन या अन्य निवेश विकल्प अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। वहीं आभूषण खरीदने की स्थिति में मेकिंग चार्ज और डिजाइन लागत भी कुल कीमत का हिस्सा बन जाती है। इसलिए खरीदारी से पहले उद्देश्य के अनुसार विकल्प चुनना लाभदायक माना जाता है।
सर्राफा बाजार में कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए विशेषज्ञ निवेशकों और खरीदारों को सलाह देते हैं कि वे खरीदारी से पहले बाजार की स्थिति, आधिकारिक दरों और उत्पाद की गुणवत्ता की पूरी जानकारी प्राप्त करें, ताकि सही समय और सही मूल्य पर निर्णय लिया जा सके।




