Harjot Singh Bains और मनीष सिसोदिया ने वैदिक शिक्षा से बच्चों का भविष्य संवारने का दिया संदेश

Harjot Singh Bains और मनीष सिसोदिया ने वैदिक शिक्षा से बच्चों का भविष्य संवारने का दिया संदेश

लुधियाना के बीसीएम स्कूल में सनातन सेवा समिति पंजाब और वेद प्रचार मंडल पंजाब के संयुक्त तत्वावधान में एक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, वैदिक साहित्य और नैतिक शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित करना था। समारोह में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में सनातन सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष विजय शर्मा, वेद प्रचार मंडल पंजाब के अध्यक्ष रोशन लाल आर्य, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।

आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, वैदिक साहित्य, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के प्रति जागरूक करना भी था। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षा को बताया परिवर्तन का आधार

समारोह को संबोधित करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल विद्यालयों का संचालन करना नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को बेहतर नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य या देश में सकारात्मक परिवर्तन लाना है तो इसकी शुरुआत शिक्षा व्यवस्था से ही होती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए तो वे भविष्य में समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालय केवल परीक्षा पास कराने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था होते हैं।

शिक्षकों की भूमिका को बताया सबसे महत्वपूर्ण

हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते बल्कि विद्यार्थियों को अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों का भी ज्ञान देते हैं।

उन्होंने सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास जारी रखें ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

दिल्ली के शिक्षा मॉडल का किया उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान शिक्षा मंत्री ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा सुधारों को लेकर किए गए प्रयासों ने देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में नई चर्चा शुरू की। उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में यदि सही मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले तो उनके व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

विद्यार्थियों को भारतीय ग्रंथों से जुड़ने का संदेश

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और अन्य भारतीय ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन ग्रंथों में जीवन, नैतिकता और मानवीय मूल्यों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विचार मौजूद हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों को व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी नैतिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे तो समाज और देश के विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।

विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा पर दिया जोर

मनीष सिसोदिया ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों में नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी, वैज्ञानिक सोच और मानवीय मूल्यों का विकास भी समान रूप से आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाए तो इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव होगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर चर्चा

अपने संबोधन में मनीष सिसोदिया ने भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक सोच के संबंध पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज विश्वभर में वैज्ञानिक ब्रह्मांड, प्रकृति और ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं पर शोध कर रहे हैं। भारतीय परंपरा में भी प्रकृति, जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े अनेक विचार प्राचीन ग्रंथों में वर्णित हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करने की भी अपील की। उनके अनुसार आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान दोनों का संतुलित अध्ययन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में सहायक हो सकता है।

सोशल मीडिया के दौर में सकारात्मक सोच की आवश्यकता

मनीष सिसोदिया ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। ऐसे वातावरण में विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सही जानकारी, सकारात्मक विचार और विश्वसनीय ज्ञान के स्रोतों का चयन करें।

उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत, चिंतन और अच्छे साहित्य का अध्ययन युवाओं के व्यक्तित्व को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

296 विद्यार्थियों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा

आयोजकों के अनुसार पिछले एक वर्ष से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और वैदिक साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में पंजाब के 25 विद्यालयों के कुल 296 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को समारोह में पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि प्रतियोगिता में शामिल विद्यालयों के प्राचार्यों को भी सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथियों का किया गया सम्मान

समारोह के दौरान सनातन सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष विजय शर्मा, वेद प्रचार मंडल पंजाब के अध्यक्ष रोशन लाल आर्य तथा कुसुम आहूजा ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के साथ किया गया।

पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार से की अतिरिक्त सहायता की मांग

कार्यक्रम के बाद शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आगामी केंद्रीय बजट में पंजाब की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष अपनी विभिन्न मांगें रखी हैं और उम्मीद है कि उन्हें सकारात्मक रूप से देखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदाओं और अन्य परिस्थितियों के कारण राज्य को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में पंजाब को विशेष राहत पैकेज और विभिन्न केंद्रीय मदों के तहत लंबित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र के लिए अधिक बजट की आवश्यकता बताई

हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि देश को भविष्य में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है तो शिक्षा बजट में पर्याप्त वृद्धि आवश्यक होगी।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और आधुनिक शैक्षणिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उनके अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किया गया निवेश भविष्य की पीढ़ियों और देश के समग्र विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश माना जाता है।

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