Chandigarh में Haryana की अलग Vidhan Sabha नहीं बनेगी: Centre ने Proposal किया Reject, CM Saini को साफ संदेश – मामला आगे न बढ़ाएं

Chandigarh में Haryana की अलग Vidhan Sabha नहीं बनेगी: Centre ने Proposal किया Reject, CM Saini को साफ संदेश – मामला आगे न बढ़ाएं

चंडीगढ़ में हरियाणा के लिए अलग विधानसभा भवन के निर्माण का प्रस्ताव फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस संबंध में हरियाणा सरकार को संकेत दिया है कि वर्तमान प्रस्ताव पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार को सलाह दी गई है कि इस विषय पर चंडीगढ़ प्रशासन के साथ मौजूदा प्रस्ताव के आधार पर आगे की प्रक्रिया जारी न रखी जाए।

यह मुद्दा पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है। हरियाणा सरकार चंडीगढ़ में अपने लिए अलग विधानसभा भवन बनाने की मांग कर रही थी और इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन तथा केंद्र सरकार के स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हुई। हालांकि भूमि उपलब्धता, स्वैप प्रस्ताव, प्रशासनिक आपत्तियों और राजनीतिक मतभेदों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

चंडीगढ़ भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है और यह पंजाब तथा हरियाणा दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में कार्य करता है। वर्तमान में दोनों राज्यों की विधानसभाएं निर्धारित व्यवस्था के तहत साझा विधानसभा परिसर का उपयोग करती हैं। इसी व्यवस्था के बीच अलग विधानसभा भवन का प्रस्ताव सामने आया था, जिसे लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही।

जुलाई 2023 में भूमि उपलब्ध कराने पर बनी थी प्रारंभिक सहमति

चंडीगढ़ में अलग विधानसभा भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया वर्ष 2023 के दौरान आगे बढ़ी थी। उस समय चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर हरियाणा सरकार को लगभग 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की थी।

प्रस्तावित भूमि सूचना प्रौद्योगिकी पार्क (आईटी पार्क) क्षेत्र के निकट रेलवे लाइट प्वाइंट के आसपास स्थित बताई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 640 करोड़ रुपये आंका गया था।

प्रारंभिक सहमति के बाद हरियाणा सरकार ने इस स्थान पर आधुनिक विधानसभा भवन विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य शुरू किया था। इसके बाद भूमि हस्तांतरण से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श शुरू हुआ।

हरियाणा सरकार ने भूमि स्वैप का प्रस्ताव रखा

भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन के सामने भूमि अदला-बदली (Land Swap) का प्रस्ताव भी रखा। प्रस्ताव के अनुसार, चंडीगढ़ में मिलने वाली लगभग 10 एकड़ भूमि के बदले पंचकूला के निकट लगभग 12 एकड़ भूमि चंडीगढ़ प्रशासन को देने की पेशकश की गई थी।

सरकार का मानना था कि इस व्यवस्था के माध्यम से दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बनाया जा सकता है और विधानसभा भवन निर्माण का रास्ता आसान हो सकता है।

हालांकि यह प्रस्ताव अंतिम रूप नहीं ले सका और बाद में प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की गई।

भूमि संबंधी आपत्तियां, पंजाब का विरोध और प्रशासनिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सका प्रस्ताव

जनवरी 2024 में चंडीगढ़ प्रशासन ने भूमि स्वैप प्रस्ताव का विस्तृत परीक्षण किया। शहरी नियोजन विभाग (Urban Planning Department) की रिपोर्ट में प्रस्तावित वैकल्पिक भूमि को लेकर कई तकनीकी आपत्तियां दर्ज की गईं।

रिपोर्ट में कहा गया कि पंचकूला के निकट प्रस्तावित भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई। इसी आधार पर भूमि अदला-बदली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

शहरी नियोजन विभाग ने बताईं कई तकनीकी चुनौतियाँ

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित वैकल्पिक भूमि अपेक्षाकृत नीची थी, जिससे भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं की संभावना जताई गई। इसके अतिरिक्त भूमि के बीच से एक नाला गुजरने की बात भी रिपोर्ट में उल्लेखित की गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संबंधित स्थान की कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत सीमित है और सार्वजनिक उपयोग के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास में अतिरिक्त चुनौतियां आ सकती हैं।

इन तकनीकी कारणों के आधार पर प्रशासन ने भूमि स्वैप प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और प्रक्रिया यहीं रुक गई।

कई दौर की चर्चा के बाद गृह मंत्रालय का रुख स्पष्ट हुआ

भूमि संबंधी विवाद और प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी होने के बाद इस विषय पर केंद्र सरकार के स्तर पर भी विचार-विमर्श जारी रहा। कई महीनों तक विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्तमान प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने हरियाणा सरकार को संकेत दिया कि मौजूदा प्रस्ताव के आधार पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार को सलाह दी गई कि इस विषय पर वर्तमान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

इस निर्णय के बाद फिलहाल चंडीगढ़ में अलग विधानसभा भवन निर्माण की प्रक्रिया ठहर गई है।

पंजाब सरकार ने लगातार जताया विरोध

जब हरियाणा सरकार ने अलग विधानसभा भवन की मांग को आगे बढ़ाया, उसी समय पंजाब सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसका विरोध भी दर्ज कराया। पंजाब का तर्क था कि चंडीगढ़ राज्य की राजधानी है और वर्तमान साझा व्यवस्था के अतिरिक्त नए निर्माण को लेकर उनकी सहमति आवश्यक होगी।

विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा के लिए अलग विधानसभा भवन के निर्माण का समर्थन नहीं किया जाएगा। इस कारण यह विषय राजनीतिक चर्चा का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहा है।

पंजाब के कई नेताओं का कहना था कि वर्तमान साझा विधानसभा व्यवस्था पहले से लागू है और इसी ढांचे के भीतर दोनों राज्यों की आवश्यकताओं का संचालन किया जा सकता है।

वर्तमान में दोनों राज्य साझा विधानसभा परिसर का करते हैं उपयोग

चंडीगढ़ में स्थित मौजूदा विधानसभा भवन पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों द्वारा साझा रूप से उपयोग किया जाता है। यह भवन विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बुज़िए (Le Corbusier) द्वारा डिजाइन किए गए कैपिटल कॉम्प्लेक्स का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह परिसर आधुनिक वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान प्राप्त है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत दोनों राज्यों की विधानसभा गतिविधियां निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार इसी परिसर में संचालित होती हैं।

यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा भी महत्वपूर्ण पहलू

चंडीगढ़ के कैपिटल कॉम्प्लेक्स को वर्ष 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्राप्त हुआ था। इस मान्यता के बाद परिसर के संरक्षण, वास्तुशिल्पीय स्वरूप और विकास संबंधी गतिविधियों पर विशेष नियम लागू हैं।

ऐसे क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण या बड़े संरचनात्मक बदलाव के लिए विस्तृत तकनीकी और संरक्षण संबंधी मानकों का पालन करना आवश्यक होता है। यही कारण है कि इस परिसर से जुड़े किसी भी विकास प्रस्ताव का विभिन्न स्तरों पर विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

यह मुद्दा पहली बार चर्चा में कैसे आया?

अलग विधानसभा भवन का विषय वर्ष 2022 में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (Northern Zonal Council) की बैठक के बाद प्रमुखता से सामने आया था। उस बैठक में हरियाणा के लिए विधानसभा भवन हेतु भूमि उपलब्ध कराने की संभावना पर चर्चा हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की।

प्रारंभिक स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद बाद में भूमि उपलब्धता, स्वैप व्यवस्था, तकनीकी रिपोर्ट और विभिन्न प्रशासनिक कारणों के चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

हरियाणा सरकार की क्या थी दलील?

हरियाणा सरकार का कहना था कि भविष्य में परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में वर्तमान विधानसभा परिसर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं रहेगा।

सरकार का यह भी तर्क था कि चंडीगढ़ दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है, इसलिए हरियाणा के लिए अलग विधानसभा भवन उपलब्ध कराया जाना प्रशासनिक दृष्टि से उपयोगी हो सकता है।

इसी आधार पर राज्य सरकार ने नए भवन के निर्माण का प्रस्ताव रखा था, लेकिन प्रशासनिक, तकनीकी और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण यह योजना फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाई।

आगे की संभावनाओं पर बनी रहेगी नजर

केंद्रीय गृह मंत्रालय के वर्तमान रुख के बाद चंडीगढ़ में हरियाणा की अलग विधानसभा भवन का प्रस्ताव फिलहाल स्थगित माना जा रहा है। यदि भविष्य में किसी नए स्थान, नई भूमि व्यवस्था या अन्य प्रशासनिक विकल्प पर सहमति बनती है, तो उस पर अलग प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

फिलहाल दोनों राज्यों द्वारा साझा विधानसभा परिसर का उपयोग पूर्ववत जारी रहेगा, जबकि चंडीगढ़ में नए विधानसभा भवन के निर्माण से जुड़ा मौजूदा प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

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