जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में मूसलधार बारिश के कारण बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ जैसी घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे अधिक प्रभावित रामबन जिला रहा, जहां रविवार सुबह सेरी बागना क्षेत्र में बादल फटने की घटना सामने आई। इस प्राकृतिक आपदा में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घरों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
राज्य प्रशासन, पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राहत एवं बचाव एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में अभियान शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और केवल आधिकारिक मौसम एवं यातायात संबंधी सलाह का ही पालन करें।
रामबन जिले के सेरी बागना में बादल फटने की घटना
रविवार सुबह रामबन जिले के सेरी बागना इलाके में अचानक तेज बारिश के बीच बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा गांव की ओर बढ़ गया, जिससे कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार तीन लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि कई अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश के कारण कुछ ही मिनटों में हालात पूरी तरह बदल गए। कई घरों में पानी और मलबा भर गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों का लगातार सर्वे कर रहा है ताकि नुकसान का सही आकलन किया जा सके।

करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
पुलिस, जिला प्रशासन और राहत दलों ने संयुक्त अभियान चलाकर लगभग 100 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कई परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में भेजा गया है, जहां भोजन, पेयजल और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए राहत अभियान लगातार जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी।
भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद, कई मार्गों पर यातायात प्रभावित
लगातार बारिश का असर जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सड़क मार्गों पर भी देखने को मिला। रामबन और बनिहाल क्षेत्र में कई स्थानों पर भूस्खलन होने के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया। इस फैसले का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। राजमार्ग बंद होने के कारण बड़ी संख्या में वाहन रास्ते में फंस गए।
इसके अलावा किश्तवाड़-पद्दर मार्ग भी भूस्खलन के कारण बंद करना पड़ा। प्रशासन ने कहा है कि सड़क से मलबा हटाने का कार्य जारी है और मौसम अनुकूल होते ही यातायात बहाल किया जाएगा। संबंधित विभाग मशीनों और कर्मचारियों की सहायता से सड़कों को जल्द से जल्द साफ करने का प्रयास कर रहे हैं।
भूस्खलन के वीडियो सामने आए
सोशल मीडिया और स्थानीय स्रोतों के माध्यम से कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा नीचे गिरता दिखाई दे रहा है। कुछ स्थानों पर मलबा सड़क तक पहुंच गया, जबकि कई वाहन उसके नीचे दब गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ टैंकर, निजी वाहन तथा आसपास स्थित भवन भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि प्रशासन नुकसान का आधिकारिक आकलन कर रहा है और प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।
धर्मकुंड गांव में मकानों को नुकसान
रामबन जिले के धर्मकुंड क्षेत्र में भी भूस्खलन की गंभीर घटना सामने आई। चेनाब नदी के समीप स्थित इस गांव में लगभग 10 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि 25 से 30 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने करीब 90 से 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है।
उधमपुर में तेज आंधी और बारिश से बिजली व्यवस्था प्रभावित
उधमपुर जिले की सतैनी पंचायत में तेज हवाओं और बारिश के कारण कई पेड़ उखड़ गए। इससे बिजली की लाइनें प्रभावित हुईं और कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। स्थानीय प्रशासन ने बिजली विभाग की टीमों को मरम्मत कार्य में लगाया है ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल की जा सके।
स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार पिछले कई वर्षों में इस स्तर की तेज हवाएं और बारिश कम ही देखने को मिली थीं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है, जिससे लोगों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले दो से तीन दिनों तक जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। रामबन, उधमपुर, पुंछ, बारामुला और आसपास के क्षेत्रों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी मार्गों के आसपास अनावश्यक रूप से न जाने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन को भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जताया दुख
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रामबन में हुई प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता के साथ जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि राहत, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं की बहाली के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहत कार्यों की समीक्षा की
केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वे जिला प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं और राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि राहत अभियान बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की
लगातार खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। राष्ट्रीय राजमार्ग, पहाड़ी सड़कें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि मौसम और सड़क की स्थिति से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और हेल्पलाइन नंबरों से संपर्क करें। राहत एवं बचाव एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।


