HKRN पर विधानसभा में सरकार का पलटवार, सैनी बोले- ठेकेदारी खत्म कर भर्ती को बनाया पारदर्शी और नियमबद्ध

HKRN पर विधानसभा में सरकार का पलटवार, सैनी बोले- ठेकेदारी खत्म कर भर्ती को बनाया पारदर्शी और नियमबद्ध

चंडीगढ़: हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) को लेकर विधानसभा में चल रही सियासी बहस के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदेश में संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की व्यवस्था मौजूदा सरकार की देन नहीं है। यह व्यवस्था कई दशकों से सरकारी तंत्र का हिस्सा रही है और समय के साथ इसमें कर्मचारियों की संख्या बढ़ती गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इसी पुरानी व्यवस्था को ठेकेदारों के प्रभाव से बाहर निकालकर पारदर्शी, नियमबद्ध और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया है।

सैनी ने विपक्ष पर HKRN को राजनीतिक चश्मे से देखने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के लिए यह केवल कर्मचारियों की नियुक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि उन युवाओं और उनके परिवारों के हितों से जुड़ा विषय है, जो संविदा आधार पर रोजगार हासिल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि निगम के गठन के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में योग्यता, आरक्षण और निर्धारित मानकों को लागू किया गया है।

1967 से चली आ रही है अस्थायी नियुक्तियों की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में आंकड़े पेश करते हुए कहा कि हरियाणा में अस्थायी और अनुबंध आधारित कर्मचारियों की मौजूदगी HKRN बनने से कई दशक पहले की है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 1967 को प्रदेश सरकार के कुल 97,385 कर्मचारी थे। इनमें 11,397 कर्मचारी कंटीजेंसी पेड, वर्क-चार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट जैसी श्रेणियों में कार्यरत थे।

सैनी के मुताबिक वर्ष 2013 तक सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर 2,55,319 हो गई। इसी दौरान कंटीजेंसी पेड, वर्क-चार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बढ़कर 84,642 पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक अनुबंध आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी थी। वर्ष 1967 से 2005 के बीच इन संयुक्त श्रेणियों में कर्मचारियों की संख्या 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई, जबकि इसके बाद के नौ वर्षों में यह संख्या करीब 1.10 लाख तक पहुंच गई।

मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों के जरिए विपक्ष के उस आरोप का जवाब देने की कोशिश की कि संविदा रोजगार की समस्या HKRN के गठन के बाद पैदा हुई।

ठेकेदारों की भूमिका खत्म करने का दावा

सैनी ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों को ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त किया जाता था। इससे कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वेतन में समानता नहीं थी और कई मामलों में भुगतान में भी देरी होती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले 12 महीने काम करने के बावजूद कर्मचारियों को 11 महीने के वेतन जैसी व्यवस्था का सामना करना पड़ता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था उनकी सरकार ने शुरू नहीं की, बल्कि सरकार ने पहले से मौजूद प्रणाली की कमियों को दूर करने का प्रयास किया है।

उनके मुताबिक ठेकेदारों को कुल बिल राशि पर दो प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। HKRN के गठन के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति और भुगतान को संस्थागत ढांचे में लाने की कोशिश की गई।

सैनी ने बताया कि 19 जनवरी 2022 से समान वेतन दर लागू की गई, जिससे संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में एकरूपता लाने का प्रयास हुआ।

पोर्टल के जरिए भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRN में नियुक्ति के लिए युवाओं को ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी गई है। इसके लिए सरकार ने ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ लागू की है।

उनके अनुसार चयन के लिए योग्यता और अन्य मानदंड पहले से निर्धारित किए गए हैं। उम्मीदवारों को इन मानकों के आधार पर प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ाने और ठेकेदारों की भूमिका को हटाने में मदद मिली है।

सैनी ने कहा कि सरकार ने कभी भी HKRN के तहत मिलने वाले संविदा रोजगार को नियमित सरकारी नौकरी के बराबर बताने का दावा नहीं किया। इसका उद्देश्य केवल यह है कि ठेकेदार आधारित व्यवस्था के स्थान पर युवाओं को एक स्पष्ट और संस्थागत प्लेटफार्म मिल सके।

तबादले और DDO शिफ्टिंग की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण या DDO शिफ्टिंग के लिए कोई स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था नहीं थी। HKRN के जरिए इस दिशा में भी प्रक्रिया विकसित की गई।

उन्होंने कहा कि अब तक DDO शिफ्टिंग के 1,316 मामले स्वीकृत किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है और जरूरत के मुताबिक उन्हें दूसरी जगह समायोजित करने का रास्ता तैयार हुआ है।

कर्मचारी की मौत पर परिवार को राहत

सैनी ने संविदा कर्मचारियों के परिवारों के लिए लागू प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पूरी तरह असहाय छोड़ने के बजाय सरकार ने अनुकंपा आधार पर सहायता का प्रावधान किया है।

‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ के खंड 12 के तहत पात्र परिवारों को अनुकंपा तैनाती का विकल्प दिया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक अब तक 306 पात्र लोगों को अनुकंपा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है।

इसके अलावा परिवार को तीन लाख रुपये की अनुकंपा सहायता अथवा अनुकंपा तैनाती में से एक विकल्प चुनने का प्रावधान भी किया गया है।

महिला कर्मचारियों को छुट्टियों की सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला संविदा कर्मचारियों के लिए भी कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। HKRN की स्थापना के बाद पात्र महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश का प्रावधान किया गया।

इसके साथ ही कर्मचारियों को एक कैलेंडर वर्ष में 10 चिकित्सा अवकाश और 10 आकस्मिक अवकाश का प्रावधान है। महिला कर्मचारियों के लिए 22 दिन के आकस्मिक अवकाश की सुविधा का भी मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उल्लेख किया।

सरकार का कहना है कि संविदा कर्मचारियों के लिए केवल रोजगार उपलब्ध करवाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनके लिए बुनियादी सेवा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

EPF और ESI में अंशदान का आंकड़ा

सैनी ने कहा कि HKRN के जरिए काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए EPF और ESI जैसी व्यवस्थाओं को भी लागू किया गया है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में EPF के लिए 288.86 करोड़ रुपये, ESI के लिए 47.02 करोड़ रुपये और श्रम कल्याण निधि के तहत 4.30 करोड़ रुपये जमा किए गए।

वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में 30 जून 2026 तक 129.94 करोड़ रुपये EPF और 10.17 करोड़ रुपये ESI के रूप में जमा किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र संविदा कर्मचारियों को ESI के माध्यम से चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है।

आरक्षण को लेकर सरकार ने रखे आंकड़े

HKRN के जरिए नियुक्तियों में आरक्षण लागू करने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियों और नियमों के अनुरूप सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने बताया कि निगम के माध्यम से कुल 28,350 नए कर्मचारियों को लगाया गया। इनमें लेवल-1 के 4,548, लेवल-2 के 9,577 और लेवल-3 के 14,225 कर्मचारी शामिल हैं।

इनमें अनुसूचित जाति वर्ग से 6,788 कर्मचारी हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार यह निर्धारित 20 प्रतिशत हिस्सेदारी से अधिक 23.94 प्रतिशत है। इसी तरह पिछड़ा वर्ग के 8,128 कर्मचारियों की तैनाती की गई, जो निर्धारित 27 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले 28.67 प्रतिशत है।

गरीब परिवारों के युवाओं को अवसर देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे परिवारों के युवाओं को भी अवसर देने की व्यवस्था की है, जिनके परिवार में पहले किसी सदस्य के पास सरकारी नौकरी नहीं थी। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों के आधार पर ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है।

सैनी के मुताबिक HKRN के जरिए तैनाती प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक मानदंडों को ध्यान में रखा गया है। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य रोजगार की प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ सामाजिक संतुलन कायम करना है।

कर्मचारियों को हटाने पर भी दिया जवाब

HKRN के माध्यम से कर्मचारियों को हटाए जाने के आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रक्रिया के कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देने का आरोप सही नहीं है।

सैनी ने बताया कि निगम में कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल की SOP निर्धारित है। इसी तरह अनुशासनात्मक या पेनल कार्रवाई के लिए भी एक तय प्रक्रिया मौजूद है।

मुख्यमंत्री के अनुसार किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई मनमाने ढंग से नहीं की जाती, बल्कि निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत मामला आगे बढ़ाया जाता है।

62,497 सेवा सुरक्षा आवेदन मिले

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सेवा सुरक्षा को लेकर भी ताजा आंकड़े साझा किए। उनके मुताबिक 31 अगस्त की सुबह 10 बजे तक सेवा सुरक्षा के लिए कुल 62,497 आवेदन प्राप्त हो चुके थे।

इनमें से DDO स्तर पर 55,077 और विभागाध्यक्षों यानी HOD स्तर पर 27,896 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।

सैनी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पात्र कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा देने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो महीनों के भीतर ऐसा कोई पात्र कर्मचारी शेष नहीं रहेगा, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सेवा सुरक्षा नहीं मिली हो।

सरकार ने कहा- राजनीतिक मुद्दे के बजाय रोजगार व्यवस्था के रूप में देखें HKRN

विधानसभा में मुख्यमंत्री सैनी ने पूरे मुद्दे को राजनीतिक विवाद के बजाय रोजगार व्यवस्था के सुधार के रूप में देखने की अपील की। उनका कहना था कि हरियाणा में संविदा कर्मचारियों की व्यवस्था पहले से मौजूद थी और समय के साथ सरकारों ने इस पर निर्भरता बढ़ाई।

उनके अनुसार मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था में ठेकेदारों की भूमिका कम करने, वेतन में समानता लाने, नियुक्ति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने, आरक्षण लागू करने और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में काम किया है।

HKRN को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जारी बहस में अब दोनों पक्ष अपने-अपने आंकड़ों और दावों के साथ जनता के सामने हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि निगम को नियमित सरकारी नौकरियों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि संविदा रोजगार को व्यवस्थित करने वाली व्यवस्था के तौर पर देखा जाना चाहिए।

सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ संविदा कर्मचारियों को बेहतर सेवा शर्तें और सामाजिक सुरक्षा देना है। उनके मुताबिक HKRN के जरिए इसी दिशा में व्यवस्था तैयार की गई है और आने वाले समय में इसे और अधिक प्रभावी बनाने पर काम जारी रहेगा।