Haryana में फर्जी बीपीएल परिवारों पर सरकार की सख्ती, 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम।

Haryana में फर्जी बीपीएल परिवारों पर सरकार की सख्ती, 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम।

हरियाणा सरकार ने बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी में गलत तरीके से शामिल हुए परिवारों की पहचान करने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि जिन लोगों ने गलत जानकारी देकर या वास्तविक आय छिपाकर बीपीएल श्रेणी का लाभ प्राप्त किया है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वयं अपनी जानकारी सही करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए 20 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई परिवार निर्धारित समय तक अपनी जानकारी में संशोधन नहीं करता और बाद में जांच के दौरान फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो ऐसे परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर करने के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है। इस अभियान का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना तथा अपात्र लाभार्थियों की पहचान करना है।

प्रदेश सरकार का मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलना चाहिए जो वास्तव में पात्र हैं। यदि गलत जानकारी के आधार पर कोई व्यक्ति बीपीएल श्रेणी में शामिल रहता है तो इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवार सरकारी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।

फैमिली आईडी और आय संबंधी रिकॉर्ड की हो रही जांच, सरकार ने दिए सख्त निर्देश

सरकार के अनुसार बीपीएल श्रेणी में शामिल परिवारों के रिकॉर्ड की समीक्षा परिवार पहचान पत्र (Family ID) और अन्य उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर की जा रही है। जांच के दौरान ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है, जहां परिवार की वास्तविक आय और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आय के बीच अंतर होने की आशंका है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद संबंधित विभागों और हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे।

20 अप्रैल तक स्वयं जानकारी सुधारने का अवसर

सरकार ने संभावित अपात्र लाभार्थियों को स्वयं अपनी जानकारी सही कराने का अवसर भी दिया है। यदि किसी परिवार ने पहले गलत आय, परिवार की स्थिति या अन्य विवरण दर्ज कराए हैं, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित जानकारी में संशोधन करा सकता है।

अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को स्वयं अपनी गलती सुधारने का अवसर देना है ताकि बाद में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। यदि समय सीमा समाप्त होने के बाद जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित परिवार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत हो सकती है कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देकर सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 318 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस प्रकार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत दंड का प्रावधान भी है।

अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई प्रत्येक मामले की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी फैमिली आईडी और आय संबंधी विवरण सही रखें तथा किसी भी प्रकार की गलत जानकारी दर्ज न करें।

प्रदेश में 51 लाख से अधिक परिवार बीपीएल श्रेणी में शामिल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में हरियाणा में 51 लाख 96 हजार 380 परिवार बीपीएल श्रेणी में शामिल हैं। इन परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाता है। इनमें राशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं शामिल हो सकती हैं।

सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों के कारण समय-समय पर पात्रता की समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

विधानसभा में उठा था फर्जी बीपीएल परिवारों का मुद्दा

फर्जी बीपीएल परिवारों का विषय हाल ही में हरियाणा विधानसभा में भी उठाया गया था। विपक्ष की ओर से इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके बाद विभिन्न जिलों में रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू की गई और संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

एक महीने में 1609 परिवारों को सूची से किया गया बाहर

सरकारी जानकारी के अनुसार 1 मार्च से 1 अप्रैल के बीच जांच अभियान के दौरान 1609 परिवारों को बीपीएल श्रेणी से बाहर किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के आधार पर की गई है।

जिला स्तर पर देखें तो सबसे अधिक 294 परिवार सोनीपत जिले से सूची से बाहर किए गए। इसके बाद कुरुक्षेत्र में 175 और हिसार में 145 परिवारों के नाम हटाए गए। वहीं पंचकूला में सबसे कम तीन परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर किया गया।

सरकार का कहना है कि अन्य जिलों में भी रिकॉर्ड की समीक्षा लगातार जारी है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यकता अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बीपीएल श्रेणी में शामिल होने की आय सीमा क्या है?

हरियाणा सरकार के वर्तमान मानकों के अनुसार बीपीएल श्रेणी का लाभ उन परिवारों को दिया जाता है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय निर्धारित सीमा के भीतर होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में यह सीमा 1.80 लाख रुपये वार्षिक निर्धारित है।

यदि किसी परिवार की वास्तविक वार्षिक आय इस सीमा से अधिक है, तो वह सामान्य परिस्थितियों में बीपीएल श्रेणी का पात्र नहीं माना जाता। इसी आधार पर सरकार आय संबंधी रिकॉर्ड और फैमिली आईडी का मिलान कर रही है।

गलत आय और फर्जी परिवार विभाजन की भी हो रही जांच

सरकार को संदेह है कि कुछ परिवारों ने वास्तविक आय से कम आय दर्शाकर बीपीएल श्रेणी का लाभ प्राप्त किया है। इसके अलावा कुछ मामलों में परिवारों द्वारा दस्तावेजों में अलग-अलग परिवार दिखाने की भी आशंका जताई गई है, जबकि वास्तविक रूप से वे एक ही परिवार के रूप में साथ रह रहे हैं।

यदि जांच में ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा और आवश्यक होने पर बीपीएल श्रेणी से नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि किसी पात्र परिवार के साथ अन्याय न हो।

परिवार पहचान प्राधिकरण ने कार्रवाई की पुष्टि की

हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के राज्य समन्वयक सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार फैमिली आईडी में दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है। जिन मामलों में गलत विवरण मिलने की संभावना है, उनकी जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि यदि कोई परिवार स्वयं अपनी जानकारी सही कर लेता है तो उसे नियमानुसार अपडेट किया जाएगा। वहीं जांच के दौरान यदि गलत जानकारी देकर लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित परिवार को बीपीएल सूची से बाहर करने के साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

सरकार का उद्देश्य पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना

सरकार का कहना है कि बीपीएल सूची का नियमित सत्यापन इसलिए आवश्यक है ताकि वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। यदि अपात्र लोग सूची में बने रहते हैं तो सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंच पाता।

इसी उद्देश्य से राज्य सरकार फैमिली आईडी, आय विवरण और अन्य सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर पात्रता की समीक्षा कर रही है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए और प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों एवं नियमों के अनुसार ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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