ITR Filing 2025-26: सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स बचाने का मौका, 31 जुलाई से पहले जान लें ये जरूरी नियम

ITR Filing 2025-26: सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स बचाने का मौका, 31 जुलाई से पहले जान लें ये जरूरी नियम

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है। ऐसे में पेंशन प्राप्त करने वाले और अन्य गैर-व्यावसायिक आय वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए समय रहते अपने टैक्स से जुड़े नियमों को समझना बेहद जरूरी है। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती, जबकि कुछ मामलों में आईटीआर भरना अनिवार्य हो जाता है, खासकर तब जब टैक्स स्रोत पर काटा जा चुका हो और उसका रिफंड प्राप्त करना हो।

सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखते हुए आयकर कानून में कई विशेष प्रावधान किए हैं। हालांकि इनका लाभ तभी मिल सकता है जब पात्रता की शर्तों को सही तरीके से समझा जाए। इसके अलावा नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में से कौन-सी आपके लिए बेहतर रहेगी, इसका फैसला भी आय और निवेश के आधार पर करना चाहिए।

75 वर्ष या उससे अधिक उम्र वालों को मिल सकती है आईटीआर से राहत

आयकर अधिनियम की धारा 194P के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के कुछ वरिष्ठ नागरिकों को आयकर रिटर्न दाखिल करने से छूट दी गई है। लेकिन यह राहत सभी पर लागू नहीं होती।

इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलता है जिनकी आय मुख्य रूप से पेंशन से हो और ब्याज की आय उसी बैंक से प्राप्त हो जहां उनकी पेंशन जमा होती है। इसके साथ संबंधित बैंक में निर्धारित फॉर्म-12BBA (बैंक द्वारा स्वीकार किया जाने वाला घोषणा पत्र) जमा करना भी जरूरी होता है। इसके बाद बैंक स्वयं कर की गणना करता है, आवश्यक टीडीएस काटता है और ऐसे मामलों में अलग से आईटीआर दाखिल करने की आवश्यकता नहीं रहती।

हालांकि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की आय में शेयर बाजार से कमाई, म्यूचुअल फंड, मकान का किराया, व्यवसाय, पूंजीगत लाभ या अन्य अतिरिक्त स्रोत शामिल हैं, तो यह छूट लागू नहीं होगी और उन्हें सामान्य नियमों के अनुसार आयकर रिटर्न दाखिल करना पड़ेगा।

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में सोच-समझकर करें चुनाव

वित्त वर्ष 2025-26 में नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प है। यानी यदि करदाता कोई अलग विकल्प नहीं चुनता है तो उसकी टैक्स गणना स्वतः नई व्यवस्था के अनुसार होगी।

यदि कोई वरिष्ठ नागरिक पुरानी टैक्स व्यवस्था का लाभ लेना चाहता है तो उसे आईटीआर भरते समय स्पष्ट रूप से इसका विकल्प चुनना होगा। दोनों व्यवस्थाओं में कर की गणना अलग-अलग तरीके से होती है, इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले तुलना करना समझदारी होगी।

जिन लोगों ने विभिन्न टैक्स बचत योजनाओं में अच्छा निवेश किया है या वे कई तरह की कटौतियों का लाभ लेते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था अधिक लाभदायक साबित हो सकती है। वहीं जिनकी आय सीमित है और कटौतियां कम हैं, वे नई टैक्स व्यवस्था में कम कर दे सकते हैं।

विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले दोनों व्यवस्थाओं के अनुसार टैक्स की गणना कर लेना बेहतर रहता है, ताकि अनावश्यक टैक्स भुगतान से बचा जा सके।

पुरानी टैक्स व्यवस्था में अब भी उपलब्ध हैं कई महत्वपूर्ण कटौतियां

भले ही नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा हो, लेकिन पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली कई छूटें आज भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी हैं।

धारा 80C के अंतर्गत एलआईसी, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे निवेशों पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ लिया जा सकता है।

धारा 80D के तहत वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 50 हजार रुपये तक की कटौती प्राप्त कर सकते हैं। यदि किसी के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है तो कुछ निर्धारित शर्तों के अनुसार वास्तविक चिकित्सा खर्च पर भी समान सीमा तक राहत उपलब्ध हो सकती है।

धारा 80TTB वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत बैंक, सहकारी बैंक या डाकघर में जमा राशि से प्राप्त ब्याज पर 50 हजार रुपये तक की कटौती का लाभ मिलता है। हालांकि यह सुविधा अनिवासी भारतीय (NRI) करदाताओं को उपलब्ध नहीं होती।

इसके अलावा धारा 80DDB गंभीर बीमारियों के इलाज पर राहत देती है। कैंसर, किडनी फेल्योर जैसी अधिसूचित गंभीर बीमारियों के उपचार पर निर्धारित शर्तों के तहत अधिकतम एक लाख रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है।

टीडीएस कट चुका है तो रिफंड के लिए आईटीआर भरना जरूरी

कई बार वरिष्ठ नागरिकों की बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर बैंक टीडीएस काट लेता है। यदि किसी बैंक में ब्याज आय निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है तो बैंक नियमों के अनुसार स्रोत पर कर काटता है।

यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल आय कर योग्य सीमा से कम है, तो वह वित्त वर्ष की शुरुआत में संबंधित बैंक में फॉर्म-15H जमा कर सकता है। ऐसा करने पर बैंक सामान्यतः टीडीएस नहीं काटता।

लेकिन यदि समय पर यह फॉर्म जमा नहीं किया गया और बैंक ने टीडीएस काट लिया, जबकि वास्तविक आय कर योग्य नहीं थी, तो कटे हुए टैक्स का पैसा वापस पाने के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक होगा। बिना आईटीआर दाखिल किए रिफंड प्राप्त नहीं किया जा सकता।

ई-वेरिफिकेशन करना भी उतना ही जरूरी

सिर्फ आईटीआर जमा कर देना पर्याप्त नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद निर्धारित समय के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन भी करना जरूरी होता है।

यदि करदाता समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं करता, तो दाखिल किया गया रिटर्न अधूरा माना जा सकता है और उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। इसलिए आईटीआर जमा करने के बाद ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अलग-अलग आयु वर्ग के लिए अलग टैक्स छूट

पुरानी टैक्स व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों को आयु के आधार पर अलग-अलग बेसिक टैक्स छूट मिलती है।

60 वर्ष से 80 वर्ष के बीच आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीन लाख रुपये तक की आय पर कर नहीं लगता। वहीं 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले सुपर सीनियर सिटीजन को पांच लाख रुपये तक की आय पर बेसिक छूट उपलब्ध है।

इसके विपरीत नई टैक्स व्यवस्था में सभी करदाताओं के लिए समान बेसिक छूट सीमा लागू रहती है और इसमें उम्र के आधार पर अलग सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

धारा 87A के तहत भी मिलती है राहत

कम आय वाले करदाताओं के लिए धारा 87A के तहत टैक्स रिबेट का भी प्रावधान है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र करदाताओं को पांच लाख रुपये तक की आय पर अधिकतम 12,500 रुपये तक की टैक्स राहत मिल सकती है।

वहीं नई टैक्स व्यवस्था में पात्रता पूरी होने पर 12 लाख रुपये तक की आय पर अधिकतम 60 हजार रुपये तक की रिबेट का लाभ उपलब्ध है। इससे बड़ी संख्या में करदाताओं का टैक्स दायित्व शून्य तक पहुंच सकता है।

रिटर्न भरने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

आईटीआर दाखिल करने से पहले अपनी पेंशन, बैंक ब्याज, अन्य आय, निवेश, टीडीएस और उपलब्ध कटौतियों का पूरा विवरण एकत्र कर लेना चाहिए। यदि एक से अधिक आय स्रोत हैं तो सभी को सही तरीके से शामिल करना जरूरी है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि आपके लिए नई टैक्स व्यवस्था बेहतर है या पुरानी। सही विकल्प चुनने से टैक्स की बचत हो सकती है और भविष्य में आयकर विभाग की ओर से किसी प्रकार की परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

31 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करना और उसके बाद ई-वेरिफिकेशन पूरा करना हर पात्र वरिष्ठ नागरिक के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है बल्कि यदि किसी प्रकार का टैक्स रिफंड बनता है तो उसे प्राप्त करने में भी आसानी होती है।

(Photo : AI Generated)