Ambala में Plastic Bottle Factory में भीषण आग! लाखों का सामान जलकर खाक, Fire Brigade को आग पर काबू पाने में लगे 4 घंटे!

Ambala में Plastic Bottle Factory में भीषण आग! लाखों का सामान जलकर खाक, Fire Brigade को आग पर काबू पाने में लगे 4 घंटे!

हरियाणा के अंबाला जिले के साहा थाना क्षेत्र के गांव केसरी में शनिवार देर रात एक प्लास्टिक बोतल बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी फैक्ट्री और उसके गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। फैक्ट्री में मौजूद प्लास्टिक सामग्री, तैयार बोतलें और कच्चा माल तेजी से आग पकड़ने लगे, जिसके कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई।

आग की सूचना मिलते ही आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड विभाग को घटना की जानकारी दी। प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग लगातार फैलती चली गई और कुछ ही समय में फैक्ट्री परिसर से आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं।

फैक्ट्री में रखा सारा सामान जलकर हुआ राख

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने के समय फैक्ट्री के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं मिली। हालांकि, आग इतनी भीषण थी कि फैक्ट्री के अंदर रखा अधिकांश सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।

फैक्ट्री में प्लास्टिक की तैयार बोतलें, उत्पादन के लिए रखा गया कच्चा माल और अन्य जरूरी सामान बड़ी मात्रा में मौजूद था। आग की चपेट में आने के बाद ये सभी चीजें जलकर राख हो गईं। इसके अलावा फैक्ट्री की मशीनों और अन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

फैक्ट्री संचालक की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, घटना में लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि का पता प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा।

छह दमकल वाहनों ने संभाला मोर्चा

आग की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सूचना मिलने के बाद अंबाला कैंट, बराड़ा और साहा से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग पर नियंत्रण पाने के लिए कुल छह फायर ब्रिगेड वाहनों को लगाया गया।

दमकल कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री में रखी प्लास्टिक सामग्री थी, जो तेजी से आग पकड़ रही थी। लगातार पानी की बौछार करने के बावजूद आग को पूरी तरह नियंत्रित करने में काफी समय लगा।

फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब चार घंटे तक लगातार मेहनत की, जिसके बाद आग की लपटों पर काबू पाया जा सका। आग बुझाने के बाद भी फैक्ट्री के कई हिस्सों से धुआं निकलता रहा, इसलिए दमकल कर्मियों ने मौके पर रहकर स्थिति पर नजर बनाए रखी।

ग्रामीणों ने भी राहत कार्य में दिया सहयोग

आग की सूचना मिलते ही गांव केसरी के कई लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। स्थानीय ग्रामीणों ने दमकल कर्मचारियों और प्रशासन की टीम का सहयोग किया। कुछ लोगों ने फैक्ट्री के बाहर रखा सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कोशिश की, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

ग्रामीणों ने बताया कि आग की लपटें काफी तेज थीं और कुछ ही समय में पूरी फैक्ट्री आग की चपेट में आ गई। लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी।

स्थानीय लोगों की सतर्कता और समय पर मिली सूचना के कारण आग को आसपास के इलाकों तक फैलने से रोकने में मदद मिली।

आग के दौरान सुनाई दी तेज धमाकों जैसी आवाजें

फैक्ट्री में प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग काफी खतरनाक रूप ले चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग के दौरान फैक्ट्री के अंदर से कई बार तेज आवाजें सुनाई दीं, जिससे आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया।

प्लास्टिक सामग्री जलने के कारण धुएं का घना गुबार फैल गया था। दूर से ही फैक्ट्री से निकलता धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। स्थिति को देखते हुए आसपास के लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से दूरी बनाए रखी।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की जताई जा रही आशंका

दमकल विभाग और पुलिस की प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच टीम फैक्ट्री की बिजली व्यवस्था, वायरिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किस वजह से लगी।

औद्योगिक इकाइयों में बिजली से जुड़ी छोटी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए समय-समय पर विद्युत उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच जरूरी होती है।

जिला प्रशासन ने घटनास्थल का किया निरीक्षण

घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और आग से हुए नुकसान की जानकारी जुटाई।

प्रशासन की टीम ने सुरक्षा कारणों से प्रभावित क्षेत्र की निगरानी शुरू कर दी है। जांच पूरी होने तक फैक्ट्री परिसर में अनावश्यक लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

अधिकारियों की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री में अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। औद्योगिक क्षेत्रों में आग से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन व्यवस्थाओं का होना बेहद जरूरी माना जाता है।

औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

अंबाला के केसरी गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर किया है। प्लास्टिक निर्माण से जुड़ी फैक्ट्रियों में आग का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री रखी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फैक्ट्रियों में नियमित रूप से बिजली की जांच, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना आवश्यक है। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर में आग बुझाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से समय-समय पर औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण भी महत्वपूर्ण होता है, ताकि सुरक्षा मानकों की स्थिति का पता लगाया जा सके।

किसी भी तरह की जनहानि नहीं, जांच जारी

इस भीषण आग की घटना में राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। फैक्ट्री में कर्मचारी मौजूद नहीं होने के कारण बड़ा हादसा होने से बच गया।

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभागों की जांच जारी है। आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आग लगने के कारणों और नुकसान से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आएगी।

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