चांदी ने बनाया इतिहास, ₹2.45 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंची सोना भी ₹1.37 लाख के पार, निवेशकों की सुरक्षित पसंद बरकरार

चांदी ने बनाया इतिहास, ₹2.45 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंची सोना भी ₹1.37 लाख के पार, निवेशकों की सुरक्षित पसंद बरकरार

भारतीय सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। चांदी की कीमत पहली बार ₹2.44 लाख प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई है, जबकि सोना भी ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, केंद्रीय बैंकों की खरीद और औद्योगिक मांग में लगातार वृद्धि जैसे कई कारकों का असर सोना और चांदी दोनों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

हाल के महीनों में निवेशकों की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर बढ़ती रुचि भी कीमती धातुओं की कीमतों को समर्थन दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी दोनों निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, चांदी ने नया ऑल टाइम हाई दर्ज किया है, जबकि सोना भी अपने रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब कारोबार कर रहा है।

एक दिन में चांदी की कीमत में ₹7,725 की बढ़ोतरी

ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक किलोग्राम चांदी की कीमत में एक ही कारोबारी दिन के दौरान ₹7,725 की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद चांदी का भाव बढ़कर ₹2,44,788 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इससे पहले इसका भाव लगभग ₹2,37,063 प्रति किलो था।

पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन समग्र रुझान लगातार तेजी का रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों की मजबूत खरीदारी और औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी ने इस तेजी को समर्थन दिया है।

औद्योगिक मांग से चांदी को मिल रहा मजबूत समर्थन

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी अब केवल आभूषण निर्माण तक सीमित धातु नहीं रह गई है। वर्तमान समय में इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मेडिकल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर उद्योग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रीन एनर्जी और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के कारण वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। सोलर पैनलों में चांदी की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती परियोजनाएं भी कीमतों को सहारा दे रही हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में उच्च गुणवत्ता वाले विद्युत चालक (Electrical Conductor) के रूप में चांदी का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि औद्योगिक मांग बढ़ने के साथ इसकी कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।

सोने की कीमतों में भी मजबूती, वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निवेशकों की नजर

24 कैरेट सोना ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब

सोने की कीमतों में भी मजबूती का रुख बना हुआ है। ताजा कारोबारी सत्र में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹741 बढ़कर ₹1,36,909 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। हालांकि इससे पहले दिसंबर 2025 में सोना लगभग ₹1,38,161 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका था, लेकिन मौजूदा भाव भी ऐतिहासिक ऊंचाई के बेहद करीब बने हुए हैं।

बाजार जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार मजबूती भारतीय बाजार पर भी प्रभाव डाल रही है। रुपये और डॉलर की विनिमय दर में बदलाव भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है।

विभिन्न कैरेट के अनुसार सोने के ताजा भाव

ताजा बाजार दरों के अनुसार 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹1,25,409 प्रति 10 ग्राम है। वहीं 18 कैरेट सोना करीब ₹1,02,682 प्रति 10 ग्राम और 14 कैरेट सोना लगभग ₹80,092 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

कैरेट के अनुसार कीमतों में अंतर सोने की शुद्धता के आधार पर होता है। 24 कैरेट को सबसे शुद्ध माना जाता है, जबकि 22 और 18 कैरेट सोने का उपयोग मुख्य रूप से आभूषण निर्माण में किया जाता है।

शादी और निवेश सीजन में बनी हुई है मांग

कीमतों में लगातार वृद्धि के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। विवाह समारोह, पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक आयोजनों के दौरान सोने की खरीदारी आज भी बड़ी मात्रा में की जाती है।

इसके अलावा लंबे समय के निवेश के रूप में भी भारतीय परिवार सोने को प्राथमिकता देते हैं। आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जिसके कारण मांग में स्थिरता बनी रहती है।

2025 में सोना और चांदी दोनों ने बनाया रिकॉर्ड

पूरे वर्ष 2025 के दौरान सोना और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के अंत में जहां सोने की कीमत लगभग ₹76,162 प्रति 10 ग्राम थी, वहीं वर्ष 2025 के अंत तक यह बढ़कर लगभग ₹1,33,195 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। इस अवधि में सोने में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक तेजी देखने को मिली। वर्ष 2024 के अंत में लगभग ₹86,017 प्रति किलोग्राम रहने वाली चांदी वर्ष 2025 के अंत तक ₹2.30 लाख प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई। वार्षिक आधार पर इसमें लगभग 167 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण काम कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

इसके अलावा रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित विभिन्न भू-राजनीतिक घटनाओं ने भी सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाया है। जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों को समर्थन मिलता है।

चांदी की तेजी के पीछे औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी भूमिका

चांदी की कीमतों में आई तेजी का सबसे बड़ा कारण इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग मानी जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, सोलर एनर्जी सेक्टर और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के विस्तार के कारण वैश्विक स्तर पर चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की संभावित व्यापार नीतियां, आयात शुल्क (टैरिफ) से जुड़ी आशंकाएं और विनिर्माण कंपनियों द्वारा अग्रिम खरीदारी भी चांदी की कीमतों को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

बाजार विशेषज्ञों की संभावित कीमतों पर राय

कमोडिटी बाजार के कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और औद्योगिक मांग में वृद्धि जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में चांदी की कीमतें और ऊंचे स्तर तक पहुंच सकती हैं। इसी प्रकार सोने में भी सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि कीमती धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाओं, मुद्रा विनिमय दर, केंद्रीय बैंक की नीतियों, वैश्विक मांग और निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले बाजार की ताजा स्थिति, व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्य और योग्य वित्तीय सलाहकार की राय पर विचार करना आवश्यक होता है।

भारतीय निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में बनी हुई है लोकप्रियता

भारत में सोना और चांदी लंबे समय से पारंपरिक निवेश के महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं। परिवारों द्वारा बचत, आभूषण खरीद, धार्मिक अवसरों और दीर्घकालिक निवेश के लिए इनकी मांग लगातार बनी रहती है। महंगाई, आर्थिक उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भी बड़ी संख्या में निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं को शामिल करना पसंद करते हैं। इसी कारण घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों की मांग समय-समय पर मजबूत बनी रहती है।

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