गर्मियों में तेज धूप और सूरज की किरणों से त्वचा को बचाना बेहद जरूरी हो जाता है। कई लोग धूप से बचने के लिए छाता, टोपी या कपड़ों का सहारा लेते हैं, लेकिन त्वचा की गहराई तक पहुंचने वाली हानिकारक UV किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल काफी अहम माना जाता है। हालांकि, बाजार में अलग-अलग SPF नंबर वाली कई तरह की सनस्क्रीन उपलब्ध हैं, जिनमें SPF 15, SPF 30 और SPF 50 सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। ऐसे में कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि आखिर उनकी त्वचा और जरूरत के हिसाब से कौन सा SPF सही रहेगा।
कई बार लोग सिर्फ ज्यादा SPF देखकर कोई भी सनस्क्रीन खरीद लेते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी के लिए SPF 50 ही सबसे बेहतर विकल्प हो। सही सनस्क्रीन चुनने के लिए अपनी लाइफस्टाइल, धूप में रहने का समय और स्किन टाइप को ध्यान में रखना जरूरी है। आइए जानते हैं कि SPF का मतलब क्या होता है और कौन सा SPF आपकी त्वचा के लिए उपयुक्त हो सकता है।
SPF क्या है और यह त्वचा को कैसे बचाता है?
SPF यानी Sun Protection Factor एक ऐसा माप है, जो बताता है कि कोई सनस्क्रीन सूरज की UVB किरणों से आपकी त्वचा को कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकती है। UVB किरणें त्वचा पर सनबर्न, लालिमा और जलन जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
सनस्क्रीन में मौजूद SPF आपकी त्वचा पर एक सुरक्षा परत बनाने का काम करता है, जिससे सूरज की हानिकारक किरणों का असर कम हो जाता है। हालांकि, केवल SPF की संख्या ज्यादा होना ही पर्याप्त नहीं होता। सनस्क्रीन का सही तरीके से इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।
कई लोग सुबह एक बार सनस्क्रीन लगाकर पूरे दिन के लिए निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। अगर आप ज्यादा समय तक धूप में रहते हैं, पसीना आता है या पानी के संपर्क में आते हैं, तो सनस्क्रीन को दोबारा लगाने की जरूरत पड़ सकती है।
SPF 15: कम धूप में रहने वालों के लिए बेहतर विकल्प
अगर आपकी दिनचर्या ऐसी है जिसमें आपको ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहना पड़ता है और धूप में निकलना बहुत कम होता है, तो SPF 15 वाली सनस्क्रीन आपके लिए उपयोगी हो सकती है। यह हल्की धूप और रोजाना होने वाले सामान्य UV एक्सपोजर से बचाव देने में मदद करती है। ऐसे लोग जिन्हें केवल थोड़े समय के लिए बाहर जाना पड़ता है, उनके लिए SPF 15 एक सामान्य विकल्प हो सकता है।
हालांकि, अगर आपका काम ऐसा है जिसमें आपको लंबे समय तक बाहर रहना पड़ता है, तो SPF 15 पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाएगा। ज्यादा देर तक धूप में रहने पर त्वचा को अधिक सुरक्षा की जरूरत होती है।
SPF 30: रोजाना इस्तेमाल के लिए सबसे लोकप्रिय चुनाव
ज्यादातर लोगों के लिए SPF 30 को दैनिक इस्तेमाल के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। अगर आप ऑफिस जाते हैं, कॉलेज जाते हैं, बाजार के कामों के लिए बाहर निकलते हैं या रोजाना कुछ समय धूप में बिताते हैं, तो SPF 30 वाली सनस्क्रीन आपकी जरूरत पूरी कर सकती है।
यह सामान्य धूप से त्वचा को अच्छी सुरक्षा देती है और इसे रोजाना इस्तेमाल के लिए काफी संतुलित विकल्प माना जाता है। न तो यह बहुत हल्की सुरक्षा देती है और न ही जरूरत से ज्यादा भारी महसूस होती है।
शहरों में रहने वाले लोगों के लिए, जहां रोजाना थोड़ी-बहुत धूप का सामना करना पड़ता है, SPF 30 काफी उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, इसे भी सही मात्रा में लगाना जरूरी है, क्योंकि कम मात्रा में लगाने से सुरक्षा का स्तर कम हो सकता है।
तेज धूप और आउटडोर एक्टिविटी के लिए SPF 50 रहेगा बेहतर
अगर आपको दिनभर बाहर रहना पड़ता है, यात्रा करनी होती है, खेलकूद करनी होती है या आप ऐसी जगह रहते हैं जहां धूप बहुत तेज होती है, तो SPF 50 वाली सनस्क्रीन ज्यादा प्रभावी विकल्प हो सकती है। बीच पर छुट्टियां मनाने, ट्रैकिंग करने या लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे रहने के दौरान SPF 50 त्वचा को अतिरिक्त सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।
खासकर गर्मियों में जब सूरज की किरणें ज्यादा तेज होती हैं, तब ज्यादा सुरक्षा वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा को टैनिंग, सनबर्न और UV डैमेज से बचाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि SPF 50 का मतलब यह नहीं है कि आपको पूरे दिन दोबारा सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होगी। लंबे समय तक धूप में रहने पर इसे दोबारा लगाना जरूरी रहता है।
सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ SPF नंबर पर न जाएं
कई लोग सनस्क्रीन खरीदते समय केवल SPF नंबर देखते हैं, लेकिन एक अच्छी सनस्क्रीन चुनने के लिए कुछ और बातों पर ध्यान देना भी जरूरी है। कोशिश करें कि आपकी सनस्क्रीन पर “Broad Spectrum” लिखा हो। इसका मतलब है कि वह केवल UVB ही नहीं बल्कि UVA किरणों से भी बचाव प्रदान करती है।
UVA किरणें त्वचा की गहराई तक पहुंच सकती हैं और लंबे समय में उम्र बढ़ने के संकेत, झुर्रियां, त्वचा की रंगत में बदलाव और अन्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसलिए ऐसी सनस्क्रीन चुनना बेहतर होता है जो UVA और UVB दोनों तरह की किरणों से सुरक्षा दे सके।
सनस्क्रीन लगाने में लोग करते हैं ये गलतियां
कई लोग सनस्क्रीन तो लगाते हैं, लेकिन सही तरीके से नहीं लगाते। इससे उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। अक्सर लोग चेहरे पर बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाते हैं, जबकि पर्याप्त मात्रा में इसका इस्तेमाल करना जरूरी होता है। चेहरे के साथ-साथ गर्दन, कान और हाथों जैसे खुले हिस्सों पर भी सनस्क्रीन लगानी चाहिए।
सनस्क्रीन को बाहर निकलने से तुरंत पहले लगाने के बजाय करीब 15 से 20 मिनट पहले लगाना बेहतर माना जाता है, ताकि यह त्वचा पर अच्छी तरह सेट हो सके। अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं, ज्यादा पसीना आ रहा है या तैराकी कर रहे हैं, तो कुछ घंटों बाद इसे फिर से लगाना चाहिए।
अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार चुनें सनस्क्रीन
हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए सनस्क्रीन भी अपनी स्किन टाइप के अनुसार चुननी चाहिए। अगर आपकी त्वचा ऑयली है और चेहरे पर जल्दी तेल आ जाता है, तो जेल बेस्ड या ऑयल-फ्री सनस्क्रीन आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। ऐसी सनस्क्रीन त्वचा को भारी महसूस नहीं कराती और चिपचिपापन कम रखती है।
वहीं, जिन लोगों की त्वचा ड्राई होती है, उनके लिए मॉइस्चराइजिंग गुणों वाली सनस्क्रीन ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। यह त्वचा को सुरक्षा देने के साथ नमी बनाए रखने में मदद करती है।
सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को ऐसी सनस्क्रीन चुननी चाहिए जिसमें तेज खुशबू वाले केमिकल कम हों। फ्रेगरेंस-फ्री और डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा टेस्ट किए गए प्रोडक्ट ऐसे लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
सही SPF चुनना है जरूरी
सनस्क्रीन का चुनाव आपकी जरूरत के हिसाब से होना चाहिए। अगर आप कम समय के लिए बाहर जाते हैं तो SPF 15 पर्याप्त हो सकता है, लेकिन रोजाना बाहर निकलने वालों के लिए SPF 30 ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है। वहीं, ज्यादा समय तक तेज धूप में रहने वालों को SPF 50 वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसके अलावा सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल, सही मात्रा और समय-समय पर दोबारा लगाना ही त्वचा को बेहतर सुरक्षा दे सकता है।
याद रखें कि सनस्क्रीन केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि पूरे साल इस्तेमाल की जा सकती है, क्योंकि सूरज की UV किरणें मौसम बदलने के बाद भी त्वचा को प्रभावित कर सकती हैं। अपनी त्वचा की जरूरत समझकर सही SPF वाली सनस्क्रीन चुनना ही स्वस्थ और सुरक्षित त्वचा की दिशा में एक बेहतर कदम है।




