संडे खत्म होते ही ऑफिस की टेंशन? जानिए क्यों बढ़ने लगती है ‘Sunday Scaries’ और कैसे पाएं राहत

हर व्यक्ति का अपने काम, ऑफिस और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर नजरिया अलग होता है। कुछ लोगों को अपना काम पसंद होता है और वे वीकेंड खत्म होने के बाद सोमवार का इंतजार करते हैं, ताकि नई ऊर्जा के साथ अपने काम पर लौट सकें। वहीं दूसरी ओर, ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जिन्हें रविवार की शाम होते-होते अगले दिन ऑफिस जाने का तनाव महसूस होने लगता है। कई लोगों के लिए रविवार का आखिरी हिस्सा आराम और परिवार के साथ बिताने के बजाय चिंता का समय बन जाता है। सोमवार को होने वाली मीटिंग, अधूरे काम,…

बिना कारण बढ़ रहा है तनाव? ‘सेकेंड हैंड स्ट्रेस’ हो सकता है वजह, जानिए कैसे करें बचाव

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) एक आम समस्या बन चुका है। पहले माना जाता था कि तनाव केवल अपनी व्यक्तिगत समस्याओं, आर्थिक चुनौतियों, काम के दबाव या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण होता है। लेकिन आधुनिक मनोविज्ञान बताता है कि कई बार व्यक्ति बिना किसी प्रत्यक्ष समस्या के भी मानसिक रूप से परेशान रहने लगता है। यदि आपको भी अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के बेचैनी, थकान, चिड़चिड़ापन या मन का भारीपन महसूस होता है, तो इसके पीछे ‘सेकेंड हैंड स्ट्रेस’ (Second-Hand Stress) एक बड़ी वजह हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर…

रोज़ 30 दिन तक 10,000 कदम चलने से शरीर में क्या बदलता है? जानिए हैरान करने वाले फायदे

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खुद को फिट और स्वस्थ रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और अनियमित दिनचर्या का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ने लगा है। ऐसे में फिटनेस के लिए हमेशा जिम या कठिन एक्सरसाइज जरूरी नहीं होती। कई बार एक आसान और नियमित आदत भी शरीर को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। रोजाना 10,000 कदम चलना एक ऐसी ही आदत है, जिसे अपनाकर लोग अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार महसूस कर सकते हैं। खासतौर पर तेज गति से चलना यानी…

पुरानी कड़वी यादें क्यों नहीं छोड़तीं पीछा? जानिए इमोशनल बैगेज के नुकसान, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और इससे बाहर निकलने के प्रभावी तरीके

जीवन में हर व्यक्ति अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभवों से गुजरता है। कुछ यादें हमें प्रेरित करती हैं, जबकि कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो वर्षों बाद भी मन को परेशान करती रहती हैं। बचपन के कठिन अनुभव, किसी करीबी को खोने का दर्द, रिश्तों में धोखा, आर्थिक नुकसान, असफलता या अपमान जैसी घटनाएं कई बार व्यक्ति के मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ देती हैं कि उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। मनोविज्ञान की भाषा में ऐसे भावनात्मक बोझ को इमोशनल बैगेज (Emotional Baggage) कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यक्ति समय…