अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति का असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों ने इस घटनाक्रम का सकारात्मक स्वागत किया, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में खरीदारी बढ़ी और कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा एक बड़ा जोखिम कम हो सकता है।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 4.8% टूटकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वहीं संघर्ष शुरू होने से पहले इसकी कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को बाजार ने राहत के संकेत के रूप में देखा है।
ऊर्जा कीमतों में नरमी आने की खबर से उन उद्योगों को सबसे अधिक फायदा मिला जिनका संचालन ईंधन लागत पर काफी निर्भर करता है। एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला। यूनाइटेड एयरलाइंस के शेयरों में 5% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अमेरिकन एयरलाइंस के शेयर करीब 7% तक चढ़ गए। इसी तरह पर्यटन और ट्रैवल सेक्टर से जुड़ी क्रूज ऑपरेटर कंपनी कार्निवल के शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली और कंपनी के स्टॉक में लगभग 5.7% की तेजी दर्ज की गई।
अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट ने भी इस सकारात्मक माहौल का भरपूर लाभ उठाया। कारोबार के दौरान डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 638 अंकों से ज्यादा उछल गया। व्यापक बाजार को दर्शाने वाला S&P 500 इंडेक्स लगभग 1.5% मजबूत हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों पर आधारित नैस्डैक कंपोजिट में 2.3% की बढ़त देखने को मिली। निवेशकों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से कंपनियों की लागत और सप्लाई चेन दोनों को राहत मिल सकती है।
तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की कंपनियों में भी खरीदारी का जोर बना रहा। पिछले कुछ समय से एआई सेक्टर के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था, क्योंकि कई निवेशक इस बात को लेकर चिंतित थे कि एआई से जुड़ी कंपनियों के मूल्यांकन बहुत तेजी से बढ़ गए हैं। हालांकि नए घटनाक्रम ने बाजार की धारणा को बेहतर किया और निवेशकों ने फिर से टेक शेयरों में रुचि दिखाई।
मेमोरी चिप बनाने वाली माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर करीब 7.8% तक मजबूत हुए। वहीं चिप निर्माता एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज (AMD) के शेयरों में लगभग 7% की तेजी दर्ज की गई। एआई क्रांति की अगुआ मानी जाने वाली एनवीडिया भी पीछे नहीं रही और उसके शेयर लगभग 2.7% ऊपर चढ़े। बाजार विश्लेषकों के अनुसार S&P 500 में आई बढ़त में एनवीडिया का योगदान सबसे अधिक रहा।
इस बीच निवेशकों का ध्यान इलॉन मस्क की अंतरिक्ष तकनीक कंपनी स्पेसएक्स पर भी बना हुआ है। कंपनी के शेयर नैस्डैक पर सूचीबद्ध होने के दूसरे दिन लगभग 5.4% की मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। स्पेसएक्स के बेहतर प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि नई तकनीक और एआई से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है।
स्पेसएक्स की मार्केट वैल्यू 2.1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गई है। यह आंकड़ा कई दिग्गज अमेरिकी कंपनियों की संयुक्त वैल्यू से भी ज्यादा बताया जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक भविष्य की तकनीकों और अंतरिक्ष उद्योग में बड़े अवसर देख रहे हैं, जिसके चलते कंपनी को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
दूसरी ओर अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर भी निवेशकों की नजरें फेडरल रिजर्व पर टिकी हुई हैं। इस सप्ताह फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों पर निर्णय लेने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार ब्याज दरों में कटौती की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि कम ब्याज दरें आर्थिक गतिविधियों को और गति दे सकती हैं।
हालांकि मजबूत रोजगार बाजार और अपेक्षाकृत ऊंची महंगाई दर के कारण पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि फेड इस वर्ष सख्त रुख अपना सकता है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में बढ़ती सहमति ने निवेशकों की सोच बदल दी है। वित्तीय बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले जहां 71% मानी जा रही थी, वहीं अब यह घटकर करीब 55% रह गई है। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि फेड फिलहाल दरों को यथावत रखने का फैसला कर सकता है।
भारत में भी इस वैश्विक सकारात्मक माहौल का असर दिखाई दिया। सोमवार को घरेलू शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 736 अंक उछलकर 76,264 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 231 अंकों की मजबूती के साथ 23,853 पर बंद हुआ। निवेशकों ने तेल कीमतों में गिरावट और वैश्विक तनाव कम होने की संभावना को बाजार के लिए सकारात्मक माना।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे तेल आयातक देशों को कच्चे तेल की कीमतों में कमी से सीधा लाभ मिलता है। इससे आयात बिल कम हो सकता है, महंगाई पर दबाव घट सकता है और सरकार के वित्तीय संतुलन को भी राहत मिल सकती है। यही वजह रही कि बैंकिंग, ऑटो और उपभोक्ता क्षेत्रों के शेयरों में भी खरीदारी देखी गई।
हालांकि समझौते को लेकर अभी कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं बाकी हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अंतिम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक समझौते को पूरी तरह लागू नहीं माना जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में दोनों पक्षों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अगले लगभग 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत जारी रह सकती है। इसलिए बाजार में उत्साह के बावजूद कुछ निवेशक सतर्क भी हैं। उनका मानना है कि यदि वार्ताओं में किसी प्रकार की रुकावट आती है तो बाजारों में फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थिति सामान्य हो जाए, फिर भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को पूरी तरह स्थिर होने में समय लगेगा। कई महीनों तक प्रभावित रहे सप्लाई नेटवर्क को सामान्य स्तर पर लौटाने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता होगी।
फिलहाल निवेशकों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला संभावित समझौता किस रूप में सामने आता है। यदि वार्ता सफल रहती है तो इससे न केवल तेल बाजार बल्कि वैश्विक व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास को भी नई मजबूती मिल सकती है। यही कारण है कि दुनिया भर के वित्तीय बाजार इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।




