ईवीएम विवाद पर विज का विपक्ष पर पलटवार, बोले- जीतने पर मशीन पर सवाल क्यों नहीं उठते

ईवीएम विवाद पर विज का विपक्ष पर पलटवार, बोले- जीतने पर मशीन पर सवाल क्यों नहीं उठते

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने ईवीएम को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मायावती के इस बयान कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए, पर विज ने कहा कि चुनाव परिणाम अपने पक्ष में नहीं आने पर ईवीएम को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने इसे परीक्षा में असफल होने के बाद छात्र द्वारा शिक्षक और स्कूल को दोष देने जैसा बताया।

विज ने विपक्षी दलों से सवाल किया कि जब चुनाव परिणाम उनके पक्ष में आते हैं, तब ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों के साथ एक समान रुख अपनाना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान विज ने कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की ओर से सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी।

हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने पर साधा निशाना

मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल विज ने कहा कि ईवीएम को चुनावी हार के लिए जिम्मेदार बताना ऐसा है जैसे कोई बच्चा स्कूल में परीक्षा में फेल होने के बाद घर जाकर कहे कि उसकी असफलता के लिए शिक्षक, स्कूल और यहां तक कि बैठने वाली बेंच भी जिम्मेदार थी।

उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि किसी दल या नेता को चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है तो उसे उचित मंच पर तथ्यों के साथ उठाया जाना चाहिए। विज ने सवाल किया कि जब विपक्षी दल किसी राज्य में चुनाव जीतते हैं, तब उन्हें ईवीएम में कोई गड़बड़ी क्यों नजर नहीं आती।

विज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में विपक्षी दलों को चुनाव परिणाम स्वीकार करने में ईवीएम को लेकर इसी तरह की आपत्ति सामने नहीं आई। उनके मुताबिक, चुनाव परिणाम पक्ष में आने पर वही व्यवस्था सही और परिणाम प्रतिकूल होने पर उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना राजनीतिक बहस को जन्म देता है।

मतदाता सूची पर सवाल तो जीते जनप्रतिनिधि भी जवाब दें

अनिल विज ने मतदाता सूचियों को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष यह दावा कर रहा है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हैं, तो उसे इस दावे को लेकर गंभीर रुख अपनाना चाहिए।

विज ने कहा कि विपक्षी दलों के कई नेता अलग-अलग स्थानों पर मतदाता सूचियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि यदि उन्हें वास्तव में लगता है कि मतदाता सूचियां गलत हैं और इन्हीं सूचियों के आधार पर चुनाव हुए हैं, तो उन चुनावों से निर्वाचित उनके सांसदों और विधायकों की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह बताना चाहिए कि जिन चुनावों में उनके उम्मीदवार विजयी हुए, वहां मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर उन्हें आपत्ति क्यों नहीं हुई। विज ने विपक्ष के इस रुख को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था पर आपत्ति केवल हार के बाद नहीं बल्कि हर परिस्थिति में एक समान आधार पर उठाई जानी चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल को लेकर कांग्रेस पर हमला

कपिल सिब्बल की ओर से सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और फैसलों को लेकर की गई टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर अनिल विज ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश की स्वायत्त और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अभियान चला रही है।

विज ने कहा कि विपक्ष की ओर से समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। उनके अनुसार, यह केवल किसी एक संस्था तक सीमित मामला नहीं है बल्कि कांग्रेस का इन संस्थाओं के प्रति लगातार विरोध का रवैया दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इन संस्थाओं के फैसलों से असहमति हो सकती है, लेकिन उन पर सवाल उठाते समय संस्थागत प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर भी विज का पलटवार

कपिल सिब्बल के उस कथित बयान पर कि अदालतें उनकी बात को नजरअंदाज कर रही हैं और निष्पक्ष फैसले नहीं हो रहे, विज ने कहा कि कांग्रेस की ओर से विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

विज ने कहा कि चुनाव आयोग से लेकर जांच एजेंसियों और न्यायपालिका तक, जब भी किसी संस्था का फैसला विपक्ष के राजनीतिक या कानूनी रुख के अनुरूप नहीं आता, तब उस संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बहस लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, संवैधानिक संस्थाओं के किसी फैसले से असहमति दर्ज कराना लोकतांत्रिक अधिकार है। विज ने अपने राजनीतिक बयान में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के बजाय उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना चाहिए।

राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना

अनिल विज ने कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का नेतृत्व देश की स्वायत्त संस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।

विज ने राहुल गांधी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की राजनीतिक कार्यशैली से करते हुए उन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और न्यायपालिका को लेकर की जा रही बयानबाजी इसी व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है।

हालांकि, ये आरोप विज की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूचियों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अलग-अलग मौकों पर अपनी आपत्तियां और सवाल सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही राजनीतिक बहस

ईवीएम, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस लगातार तेज होती रही है। विपक्षी दलों की ओर से जहां चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताता रहा है।

अनिल विज की ताजा प्रतिक्रिया भी इसी राजनीतिक बहस की कड़ी के रूप में सामने आई है। उन्होंने विपक्ष से चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपने रुख में एकरूपता रखने की मांग की। विज का कहना है कि यदि किसी राजनीतिक दल को चुनाव व्यवस्था में खामी नजर आती है तो उसे ठोस तथ्यों के साथ संबंधित संवैधानिक मंच पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।

ईवीएम के मुद्दे पर विज ने खास तौर पर इस बात को रेखांकित किया कि चुनावी परिणामों के आधार पर मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष से यह भी पूछा कि चुनाव में जीत मिलने के समय ईवीएम और मतदाता सूचियों को लेकर वही सवाल क्यों नहीं उठाए जाते।

इसी तरह न्यायपालिका और अन्य संस्थाओं को लेकर कांग्रेस की आलोचना पर विज ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की स्वतंत्रता और उनकी संवैधानिक भूमिका को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर इन संस्थाओं के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक असहमति को संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से अलग रखना चाहिए।

विज के बयान के बाद ईवीएम, मतदाता सूचियों और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर सामने आ गई है। आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बने रहने की संभावना है।