उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार होंगे हरियाणा के युवा, कौशल विकास और रोजगार को जोड़ने के लिए सरकार की नई पहल

उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार होंगे हरियाणा के युवा, कौशल विकास और रोजगार को जोड़ने के लिए सरकार की नई पहल

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कौशल विकास, औद्योगिक निवेश और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से नई रणनीति लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार चाहती है कि तकनीकी शिक्षा और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को समाप्त किया जाए, ताकि युवाओं को प्रशिक्षण पूरा करते ही रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें और उद्योगों को भी स्थानीय स्तर पर दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो।

नई व्यवस्था के तहत उद्योग जगत की भूमिका केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी। अब उद्योग अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी शिक्षा संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए सुझाव दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को वही कौशल सिखाया जाएगा जिसकी मांग उद्योगों में वास्तविक रूप से है और रोजगार पाने की उनकी संभावनाएं पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगी।

शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी होगी कम

राज्य सरकार ने उद्योगों के साथ हुए समझौते (एमओयू) के माध्यम से तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा तय की है। इसके तहत विभिन्न औद्योगिक इकाइयां अपनी उत्पादन प्रक्रिया, आधुनिक तकनीकों और रोजगार की आवश्यकताओं के आधार पर नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रस्ताव दे सकेंगी।

इन सुझावों के आधार पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि लंबे समय से उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच जो कौशल अंतर (स्किल गैप) बना हुआ था, उसे इस पहल के माध्यम से काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद भी उद्योगों की व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप तैयार नहीं होते, जिससे उन्हें रोजगार मिलने में कठिनाई आती है। नई व्यवस्था इस समस्या का स्थायी समाधान बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना भी तैयार की है।

नई नीति के अनुसार यदि कोई औद्योगिक इकाई हरियाणा के किसी युवा को नौकरी देती है तो सरकार संबंधित उद्योग को प्रति कर्मचारी एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन प्रदान करेगी।

इसी प्रकार यदि कोई उद्योग दिव्यांग युवक या युवती को रोजगार देता है तो उसे 1.25 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले यह प्रोत्साहन राशि केवल 48 हजार रुपये प्रति कर्मचारी थी। सरकार को उम्मीद है कि बढ़ी हुई वित्तीय सहायता से उद्योग स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक युवाओं की भर्ती के लिए प्रेरित होंगे।

युवाओं का पलायन रोकने की दिशा में प्रयास

सरकार का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां हरियाणा के युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर करियर के अवसर मिल सकें।

वर्तमान में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों या महानगरों की ओर जाते हैं। सरकार का मानना है कि यदि उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा तो युवाओं को बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी और प्रदेश की प्रतिभा का लाभ राज्य को ही मिलेगा।

इसके साथ ही उद्योगों को भी प्रशिक्षित कर्मचारियों की तलाश में अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

उद्योगों की भागीदारी से बदलेगी प्रशिक्षण व्यवस्था

नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उद्योग अब प्रशिक्षण प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनेंगे।

औद्योगिक संस्थान यह बताएंगे कि आने वाले वर्षों में किन तकनीकी कौशलों की सबसे अधिक आवश्यकता होगी। उसी के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक मशीनों, नई तकनीकों और उद्योगों में अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान ही मिल जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे रोजगार मिलने के बाद अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता भी कम होगी और उद्योगों की उत्पादकता में सुधार आएगा।

एमएसएमई और स्टार्टअप को मिलेगा नया प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सरकार केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

प्रदेश के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और आईटीआई में अध्ययन कर रहे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और नए उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया है।

इस राशि का उपयोग ऐसे विद्यार्थियों और शोध परियोजनाओं को सहयोग देने में किया जाएगा, जिनमें नवाचार और उद्यमिता की संभावनाएं हों।

नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले युवा तैयार करने की योजना

सरकार का मानना है कि आर्थिक विकास केवल सरकारी या निजी नौकरियों पर निर्भर नहीं रह सकता। इसलिए नई नीति के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता की ओर भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं जिससे विद्यार्थी केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं नए उद्योग और स्टार्टअप स्थापित कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकें।

सरकार का लक्ष्य प्रदेश में नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवा उद्यमियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार

हरियाणा में स्टार्टअप संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में लगभग एक लाख युवाओं ने स्टार्टअप शुरू करने के उद्देश्य से पंजीकरण कराया है।

इनमें से करीब 9,500 स्टार्टअप सक्रिय रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत स्टार्टअप गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए उद्यम तेजी से विकसित हो रहे हैं।

सरकार अब इन स्टार्टअप्स और औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, ताकि नवाचारों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो।

उद्योग, शिक्षा और निवेश का बनेगा मजबूत नेटवर्क

सरकार का मानना है कि यदि उद्योग, शिक्षण संस्थान और स्टार्टअप एक साझा मंच पर कार्य करेंगे तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

नई नीति के तहत उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा, शिक्षण संस्थानों को आधुनिक पाठ्यक्रम विकसित करने का अवसर मिलेगा और युवाओं को रोजगार तथा उद्यमिता के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।

इसके अलावा निवेशकों के लिए भी हरियाणा अधिक आकर्षक बनेगा क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनने की उम्मीद

राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल केवल रोजगार बढ़ाने की योजना नहीं है, बल्कि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक विकास और उद्यमिता को एकीकृत करने का व्यापक प्रयास है।

यदि इस मॉडल का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है तो हरियाणा कौशल आधारित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती प्राप्त होगी।