CM मान के कथित वीडियो विवाद ने पकड़ा तूल: AAP ने उठाए बड़े सवाल, हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर जताई आपत्ति

CM मान के कथित वीडियो विवाद ने पकड़ा तूल: AAP ने उठाए बड़े सवाल, हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर जताई आपत्ति

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़े कथित वीडियो विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मामले में हरियाणा पुलिस द्वारा दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भाजपा और हरियाणा सरकार को सीधे निशाने पर लिया है। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले की जांच केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि विवादित वीडियो का निर्माण किसने किया, इसके पीछे आर्थिक सहयोग किसने दिया और इसे सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से फैलाने की योजना किसने बनाई।

मंगलवार को पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वीडियो से जुड़े पूरे घटनाक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में भाजपा की सरकार होने के कारण जांच की दिशा को प्रभावित किया जा सकता है और मामले को वास्तविक तथ्यों से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

“वीडियो बनाने वालों तक क्यों नहीं पहुंच रही जांच?”

अमन अरोड़ा ने कहा कि यदि भाजपा और जांच एजेंसियां वास्तव में सच्चाई सामने लाना चाहती हैं तो उन्हें केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानने के बजाय वीडियो की उत्पत्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह वीडियो किसने तैयार किया, इसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन है, वीडियो निर्माण पर खर्च किसने किया और इसे संगठित तरीके से प्रसारित करने की योजना किसने बनाई।

उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल सामग्री के पीछे एक पूरी प्रक्रिया होती है। यदि वीडियो फर्जी है, तो उसके निर्माता और प्रसारकों की पहचान होना आवश्यक है। यदि जांच एजेंसियां इन पहलुओं को नजरअंदाज कर रही हैं तो इससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।

हरियाणा पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

दूसरी ओर हरियाणा पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में सिरसा निवासी अरुण महेंद्रू और जींद निवासी अंकित शामिल हैं। दोनों से पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित वीडियो के प्रसार और निर्माण में उनकी क्या भूमिका रही।

हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां जांच को सही दिशा में बढ़ता कदम बता रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है कि असली साजिशकर्ताओं तक पहुंचने के बजाय जांच को भटकाया जा रहा है।

डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत जस्सी के आरोपों से बढ़ा विवाद

पूरा मामला उस समय और अधिक चर्चा में आ गया जब डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह जस्सी ने गंभीर आरोप लगाए। जस्सी ने दावा किया कि उनसे मुख्यमंत्री से संबंधित वीडियो की जांच रिपोर्ट तैयार करवाने का प्रयास किया गया था।

उनका आरोप है कि गुरुग्राम के एक होटल में उनकी मुलाकात कुछ ऐसे व्यक्तियों से करवाई गई जिन्होंने खुद को पंजाब सरकार से जुड़ा बताया। जस्सी के अनुसार इन लोगों ने उन पर वीडियो को लेकर एक विशेष प्रकार की रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर उन्हें इसके लिए 10 लाख रुपये की पेशकश की गई थी। जस्सी के इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला केवल वीडियो की सत्यता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच प्रक्रिया और उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे।

फोरेंसिक रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर उठे प्रश्न

आम आदमी पार्टी और शिकायतकर्ता पक्ष के बीच सबसे बड़ा विवाद फोरेंसिक जांच रिपोर्टों को लेकर सामने आया है। अमन अरोड़ा ने कहा कि जिन दो लैब्स—साइबर यान और साइबर सेंटिनल—का नाम रिपोर्ट तैयार करने के लिए सामने आया, उनकी वास्तविक मौजूदगी को लेकर भी सवाल हैं।

उन्होंने दावा किया कि जिन संस्थानों का हवाला दिया जा रहा है, वे भौतिक रूप से कहीं दिखाई नहीं देते और उनकी विश्वसनीयता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। अरोड़ा का कहना है कि यदि किसी रिपोर्ट के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं तो पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्थाएं वास्तव में अस्तित्व में हैं और मान्यता प्राप्त हैं।

वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी तथ्यों पर आधारित रही है और किसी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया गया।

अकाल तख्त के फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद 15 जून को उस समय चर्चा के केंद्र में आया जब श्री अकाल तख्त साहिब ने एक कथित वीडियो के आधार पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी। इस घटनाक्रम के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।

अकाल तख्त की टिप्पणी के बाद मामला केवल राजनीतिक नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन गया। पंजाब की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर कई दिनों तक तीखी बयानबाजी देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने वीडियो को बताया फर्जी

विवाद बढ़ने के कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं सामने आए और वीडियो को पूरी तरह फर्जी करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और राजनीतिक लाभ के लिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके समर्थन में मोर्चा संभाला। पार्टी का दावा है कि तकनीकी जांच में भी वीडियो की प्रामाणिकता संदिग्ध पाई गई है।

1100 से अधिक फ्रेम की जांच का दावा

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और पार्टी के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने भी प्रेस वार्ता के दौरान कथित फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला दिया। उनका कहना था कि वीडियो के 1100 से अधिक फ्रेम्स का तकनीकी विश्लेषण किया गया और जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान से मेल नहीं खाता।

पार्टी नेताओं के अनुसार डिजिटल विश्लेषण में चेहरे की संरचना, हावभाव, शारीरिक विशेषताओं और अन्य तकनीकी मानकों का अध्ययन किया गया। उनके मुताबिक जांच से यह संकेत मिला कि वीडियो को आधार बनाकर मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की गई।

हालांकि विपक्षी दल इन दावों को स्वीकार करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने सुनाई पूरी कहानी

डिजिटल विशेषज्ञ जसप्रीत जस्सी ने अपनी शिकायत में कहा कि वह लंबे समय से साइबर और डिजिटल फोरेंसिक क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनके अनुसार 15 जून को उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुई थी।

जस्सी का कहना है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पंजाब सरकार का अधिकारी बताया और उनसे मुख्यमंत्री से संबंधित वायरल वीडियो की जांच रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने सीधे तौर पर ऐसा करने से इनकार किया तो उनसे कहा गया कि यदि उनके संपर्क में कोई अन्य लैब या विशेषज्ञ हो तो उसके माध्यम से रिपोर्ट तैयार करवाई जा सकती है।

इन आरोपों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कॉल करने वाला व्यक्ति कौन था और उसके दावों में कितनी सच्चाई है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी

वीडियो विवाद अब कानूनी और तकनीकी जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आम आदमी पार्टी इसे मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार को बदनाम करने की साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष निष्पक्ष जांच और पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी पड़ताल की मांग कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गर्मा सकता है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया, डिजिटल फोरेंसिक जांच, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप—सभी पहलू एक साथ जुड़े हुए हैं।

फिलहाल सभी की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल गिरफ्तार व्यक्तियों तक सीमित रहती है या फिर वीडियो के निर्माण, वित्तपोषण और प्रसार के पूरे नेटवर्क का खुलासा भी हो पाता है। इसी से तय होगा कि इस बहुचर्चित विवाद की असली सच्चाई आखिर क्या है।