सुबह की शुरुआत चाय से करने वालों की संख्या भारत में काफी अधिक है, लेकिन अब कॉफी को लेकर सामने आए एक नए अध्ययन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि ज्यादा कॉफी पीना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन हालिया रिसर्च में यह संकेत मिले हैं कि यदि सीमित और संतुलित मात्रा में कॉफी का सेवन किया जाए तो यह दिल की सेहत के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सही मात्रा में कैफीन लेने वाले लोगों में कई गंभीर हृदय रोगों का खतरा कम देखा गया है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।
रोजाना 400 मिलीग्राम तक कैफीन को माना गया सुरक्षित
शोध में बताया गया है कि सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग 400 मिलीग्राम तक कैफीन लेना सुरक्षित माना जा सकता है। यह मात्रा लगभग पांच कप सामान्य कैफीनयुक्त कॉफी के बराबर होती है, हालांकि अलग-अलग कॉफी की किस्मों में कैफीन की मात्रा भिन्न हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीमा के भीतर रहने पर कॉफी का सेवन कई लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने से जुड़ा पाया गया है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति इससे अधिक कैफीन लेता है, तो उसके शरीर पर इसके प्रतिकूल प्रभाव भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
दिल से जुड़ी कई बीमारियों का जोखिम हो सकता है कम
रिसर्च के अनुसार, बिना अतिरिक्त चीनी, क्रीम या फ्लेवर वाली ब्लैक या साधारण कॉफी पीने वालों में कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि नियमित लेकिन नियंत्रित मात्रा में कॉफी पीने से टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और कुछ प्रकार की अनियमित हृदय गति जैसी समस्याओं की संभावना कम हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि केवल कॉफी पीकर इन बीमारियों से पूरी तरह बचा जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम भी उतने ही जरूरी हैं।
एनर्जी ड्रिंक और कॉफी में है बड़ा अंतर
अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया कि कॉफी और एनर्जी ड्रिंक को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। कई लोग कैफीन की जरूरत पूरी करने के लिए एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें मौजूद कैफीन की मात्रा सामान्य कॉफी की तुलना में कई गुना अधिक हो सकती है। इसके अलावा इनमें अतिरिक्त शुगर और अन्य रसायन भी मौजूद रहते हैं, जो शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ एनर्जी ड्रिंक शॉट्स में प्रति तरल औंस 40 से 69 मिलीग्राम तक कैफीन पाया जाता है, जो सामान्य कॉफी की तुलना में तीन से चार गुना अधिक हो सकता है। यही वजह है कि इनका अधिक सेवन उच्च रक्तचाप, धड़कन तेज होने और अनियमित हार्टबीट जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
कैफीन शरीर में कैसे करता है काम
कॉफी पीने के बाद उसमें मौजूद कैफीन शरीर में तेजी से अवशोषित हो जाता है। इसके बाद लिवर इसे मेटाबोलाइज करता है और अधिकांश लोगों में लगभग एक घंटे के भीतर इसकी सांद्रता अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है। यही कारण है कि कॉफी पीने के कुछ समय बाद व्यक्ति अधिक सतर्क और ऊर्जावान महसूस करता है।
हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरीके से प्रतिक्रिया करता है। किसी में कैफीन का असर जल्दी खत्म हो जाता है तो किसी में यह लंबे समय तक बना रहता है। इसका कारण व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट, उम्र, मेटाबोलिज्म और स्वास्थ्य संबंधी अन्य स्थितियां हो सकती हैं।
हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता असर
शोधकर्ताओं ने कहा कि सभी लोगों पर कॉफी का प्रभाव समान नहीं होता। कुछ लोग कम मात्रा में भी कैफीन लेने के बाद घबराहट, बेचैनी, नींद न आने या धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस कर सकते हैं। वहीं कुछ लोग अधिक मात्रा में भी सामान्य महसूस करते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपनी शारीरिक स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कॉफी का सेवन करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप के मरीजों और कुछ विशेष दवाइयां लेने वाले लोगों के लिए कैफीन की सुरक्षित मात्रा अलग हो सकती है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से अधिक कॉफी पीने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
मीठी और क्रीमी कॉफी से कम हो सकते हैं फायदे
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉफी के संभावित फायदे तभी अधिक मिल सकते हैं जब उसमें अतिरिक्त चीनी, भारी क्रीम या ज्यादा फ्लेवरिंग न मिलाई जाए। बाजार में मिलने वाली कई कॉफी ड्रिंक्स में शुगर और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है, जिससे मोटापा, ब्लड शुगर बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य लाभ के उद्देश्य से कॉफी पीना चाहता है तो उसे साधारण या कम चीनी वाली कॉफी का चुनाव करना चाहिए।
जीवनशैली भी निभाती है अहम भूमिका
वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि केवल कॉफी को दिल की सुरक्षा का एकमात्र उपाय नहीं माना जा सकता। यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, अत्यधिक तला-भुना भोजन खाता है, व्यायाम नहीं करता या तनावपूर्ण जीवनशैली अपनाता है, तो केवल कॉफी पीने से हृदय रोगों का खतरा कम नहीं होगा। अच्छी नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित रखना भी हृदय को स्वस्थ रखने के लिए उतना ही जरूरी है।
अभी और शोध की है जरूरत
हालांकि इस अध्ययन के नतीजे उत्साहजनक माने जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने यह भी स्वीकार किया है कि कैफीन और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और व्यापक शोध की आवश्यकता है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए सुरक्षित हो सकता है और इससे कुछ स्वास्थ्य लाभ भी मिल सकते हैं।
शोध दल का कहना है कि भविष्य में अलग-अलग आयु वर्ग, स्वास्थ्य स्थिति और आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर किए जाने वाले अध्ययन यह स्पष्ट करेंगे कि कैफीन वास्तव में हृदय पर किस प्रकार प्रभाव डालता है और किन परिस्थितियों में यह लाभकारी या हानिकारक साबित हो सकता है।
संयम ही है सबसे बड़ा मंत्र
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय की तरह कॉफी का सेवन भी संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से लाभ की जगह नुकसान हो सकता है। इसलिए यदि आप कॉफी पीते हैं तो उसकी मात्रा पर नजर रखें, एनर्जी ड्रिंक के अत्यधिक सेवन से बचें और यदि पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही अपनी दैनिक कैफीन की मात्रा तय करें। संतुलित जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन दिल की सेहत के लिए एक सकारात्मक आदत साबित हो सकता है।




