क्या बढ़ता वजन चुरा सकता है जिंदगी के साल? जानिए मोटापे से शरीर पर पड़ने वाले असर

क्या बढ़ता वजन चुरा सकता है जिंदगी के साल? जानिए मोटापे से शरीर पर पड़ने वाले असर

आज के समय में बढ़ता वजन सिर्फ खूबसूरती या फिटनेस से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सेहत के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली, घंटों बैठे रहना, फास्ट फूड और मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन तथा एक्सरसाइज के लिए समय न निकाल पाना मोटापे की समस्या को लगातार बढ़ा रहा है। खास बात यह है कि अब केवल बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे और युवा भी तेजी से बढ़ते वजन की समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।

मोटापे को अक्सर लोग सिर्फ शरीर का वजन बढ़ना मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने का असर धीरे-धीरे कई अंगों के काम करने के तरीके पर पड़ सकता है। लंबे समय तक मोटापा रहने पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि मोटापे को समय रहते नियंत्रित करना जरूरी माना जाता है।

लेकिन क्या ज्यादा वजन होने का सीधा मतलब यह है कि व्यक्ति की उम्र कम हो जाएगी? इसका जवाब थोड़ा अलग है। केवल वजन को देखकर किसी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा तय नहीं की जा सकती। असल चिंता उन स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर होती है, जिनका खतरा लंबे समय तक मोटापा रहने पर बढ़ सकता है।

वजन बढ़ने के साथ क्यों बढ़ने लगता है बीमारियों का खतरा?

शरीर में फैट की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय मानी जाती है। पेट की चर्बी बढ़ने पर शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। इससे आगे चलकर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में परेशानी आ सकती है।

इसके अलावा मोटापे की स्थिति में शरीर में लंबे समय तक हल्की सूजन जैसी प्रक्रिया भी बनी रह सकती है। यह स्थिति शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर असर डाल सकती है। वजन बढ़ने के साथ हार्मोन में बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं, जिससे मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना रहती है।

यदि मोटापा लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति अपनी जीवनशैली में बदलाव न करे तो टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इन स्थितियों का असर आगे चलकर हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत पर भी पड़ सकता है।

क्या ज्यादा वजन सीधे उम्र कम कर देता है?

यह कहना सही नहीं होगा कि शरीर का वजन बढ़ते ही व्यक्ति की उम्र निश्चित रूप से कम हो जाती है। वास्तविक समस्या मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं की होती है। लंबे समय तक अधिक वजन रहने से जिन बीमारियों का खतरा बढ़ता है, वे व्यक्ति की ओवरऑल हेल्थ को प्रभावित कर सकती हैं।

उदाहरण के तौर पर अगर मोटापे के साथ किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी हो जाए, तो उसके हृदय और शरीर की अन्य प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में वजन को नियंत्रित करना केवल शरीर को पतला करने का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वस्थ रहने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए।

यही वजह है कि विशेषज्ञ वजन घटाने के दौरान केवल मशीन पर दिखाई देने वाले आंकड़े पर ध्यान देने के बजाय व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखने की सलाह देते हैं। कमर का घेरा, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और रोजमर्रा की शारीरिक सक्रियता भी महत्वपूर्ण होती है।

सिर्फ एक-दो किलो वजन घटाने से क्या फायदा हो सकता है?

वजन कम करने के मामले में अक्सर लोग बहुत बड़ा लक्ष्य तय कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक कई किलो वजन कम नहीं होगा, तब तक इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, स्वास्थ्य के नजरिए से छोटे और लगातार किए गए बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर किसी व्यक्ति का वजन जरूरत से अधिक है तो शरीर के वजन में मामूली कमी भी कुछ स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर दिशा में ले जाने में मदद कर सकती है। इससे ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, वजन घटने का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और यह उसकी उम्र, वर्तमान वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि तथा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

इसलिए वजन कम करने के लिए जल्दबाजी करने के बजाय ऐसा लक्ष्य बनाना बेहतर है जिसे लंबे समय तक कायम रखा जा सके।

मोटापा सिर्फ ज्यादा खाने की वजह से नहीं होता

मोटापे को लेकर एक आम धारणा यह है कि जो व्यक्ति ज्यादा खाता है या एक्सरसाइज नहीं करता, वही मोटापे का शिकार होता है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल हो सकती है। शरीर का वजन कई अलग-अलग कारणों से प्रभावित होता है।

जेनेटिक्स यानी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी इसमें भूमिका निभा सकती है। अगर परिवार में माता-पिता या अन्य करीबी सदस्यों में मोटापे की समस्या रही है, तो व्यक्ति में भी वजन बढ़ने की प्रवृत्ति हो सकती है। इसके अलावा नींद की कमी, तनाव, लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि का कम होना और भोजन की आदतें भी वजन पर असर डाल सकती हैं।

कुछ लोगों में हार्मोनल या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी वजन बढ़ने से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति के लिए एक जैसा वजन घटाने का तरीका सही नहीं हो सकता। अगर लगातार कोशिश के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा है या तेजी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

वजन घटाने के लिए बेहद सख्त डाइट जरूरी नहीं

मोटापा कम करने के नाम पर कई लोग अचानक खाना बहुत कम कर देते हैं। कुछ लोग लंबे समय तक भोजन छोड़ देते हैं या ऐसी डाइट अपनाते हैं जिसमें जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। शुरुआत में वजन कम होता हुआ दिखाई दे सकता है, लेकिन ऐसी आदतों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

बहुत ज्यादा कैलोरी कम करने या बिना विशेषज्ञ की सलाह के सख्त डाइट अपनाने से कमजोरी और पोषण की कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए वजन कम करने का बेहतर तरीका ऐसी डाइट और दिनचर्या बनाना है जिसे व्यक्ति अपनी सामान्य जिंदगी का हिस्सा बना सके।

भोजन में मौसमी और पौष्टिक सब्जियों को जगह दें। दाल, फल, साबुत अनाज और जरूरत के अनुसार प्रोटीन के अच्छे स्रोतों को आहार में शामिल किया जा सकता है। वहीं अत्यधिक तला-भुना भोजन, ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ और बार-बार जंक फूड खाने की आदत को कम करना फायदेमंद हो सकता है।

रोज की छोटी आदतें बन सकती हैं बड़ा बदलाव

वजन नियंत्रित करने के लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति घंटों जिम में बिताए। शुरुआत रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाने से भी की जा सकती है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और रोज कुछ समय पैदल चलना शारीरिक सक्रियता बढ़ाने के आसान तरीके हो सकते हैं।

सुबह या शाम नियमित वॉक को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। जिन लोगों को लंबे समय से व्यायाम करने की आदत नहीं है, वे शुरुआत हल्की गतिविधि से कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार इसे बढ़ा सकते हैं।

इसके साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। अनियमित नींद और लगातार कम सोने की आदत जीवनशैली को प्रभावित कर सकती है और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखना मुश्किल कर सकती है। इसलिए भोजन और एक्सरसाइज के साथ सोने-जागने का समय भी व्यवस्थित करने की कोशिश करनी चाहिए।

तेजी से नहीं, धीरे-धीरे कम करें वजन

वजन घटाने में सबसे बड़ी गलती अक्सर जल्द परिणाम पाने की कोशिश होती है। लोग कुछ ही हफ्तों में बहुत ज्यादा वजन कम करना चाहते हैं और इसके लिए कठोर तरीके अपनाने लगते हैं। इससे डाइट को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

इसके बजाय छोटे और वास्तविक लक्ष्य बनाना बेहतर है। भोजन की मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान देने के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें। धीरे-धीरे बनने वाली स्वस्थ आदतें लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखने में अधिक मददगार हो सकती हैं।

अगर मोटापा काफी ज्यादा है, वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर अथवा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं मौजूद हैं, तो खुद से कोई सख्त डाइट या वजन घटाने की योजना शुरू करने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

मोटापा नियंत्रित करना क्यों है जरूरी?

मोटापे को केवल बाहरी रूप-रंग से जोड़कर देखना सही नहीं है। असल उद्देश्य शरीर को स्वस्थ रखना और भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करना होना चाहिए। वजन नियंत्रित करने के लिए महंगे सप्लीमेंट या बेहद कठिन रूटीन हमेशा जरूरी नहीं होते।

संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और लगातार बनी रहने वाली स्वस्थ आदतें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि वजन घटाने की शुरुआत किसी एक दिन के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के इरादे से की जाए।

इसलिए अगर आपका वजन बढ़ रहा है तो घबराने के बजाय समय रहते अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना शुरू करें। छोटे बदलावों को लगातार अपनाने से बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। और यदि वजन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या या अन्य बीमारी पहले से मौजूद है, तो व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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