चंडीगढ़। नगर निगम के डंपिंग ग्राउंड से कचरा उठाने और उसके निपटारे के काम में कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बुधवार को चंडीगढ़ नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी के जरिए कचरा उठाने का काम कर रहे एक ठेकेदार से भुगतान जारी करने के बदले बड़ी रकम की मांग की थी।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद नगर निगम के सेनेटरी विंग के साथ-साथ स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की रकम की मांग केवल एक अधिकारी के स्तर पर की जा रही थी या इसके पीछे निगम के अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
सेक्टर-11 मार्केट में रिश्वत लेते पकड़ा
सीबीआई ने सेनेटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को सेक्टर-11 की मार्केट में एक कार के भीतर रिश्वत की रकम लेते हुए गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी के जरिए कचरा निकालने और उठाने का काम कर रहे ठेकेदार प्रशांत से रिश्वत की मांग की जा रही थी।
ठेकेदार ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग से परेशान होकर सीबीआई से शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर जांच एजेंसी ने मामले की प्राथमिक जांच की और इसके बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की। बुधवार को तय योजना के अनुसार ठेकेदार को रिश्वत की रकम देने के लिए कहा गया और जैसे ही रकम का लेनदेन हुआ, सीबीआई टीम ने शक्ति शर्मा को पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने आरोपी अधिकारी से पूछताछ शुरू कर दी है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रिश्वत की रकम किसके कहने पर मांगी गई थी और इसमें निगम के अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका थी।
ठेकेदार से मांगे जा रहे थे 14 लाख रुपये
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, शक्ति शर्मा ने ठेकेदार प्रशांत से कुल 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह रकम कथित तौर पर उसके काम और लंबित भुगतान से जुड़ी थी। ठेकेदार डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी मशीनों के माध्यम से कचरे की खुदाई और उसे उठाने का काम कर रहा था।
आरोप है कि ठेकेदार को उसके काम की पेमेंट जारी कराने के लिए रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा हर महीने भी एक निश्चित रकम देने की मांग की जा रही थी।
बताया जा रहा है कि ठेकेदार का मासिक बिल करीब 10 लाख रुपये का बनता है। आरोप है कि इस भुगतान में से हर महीने एक लाख रुपये बतौर रिश्वत देने की मांग की जा रही थी। इसी कथित मांग के चलते ठेकेदार ने मामले की शिकायत जांच एजेंसी से की।
डंपिंग ग्राउंड में लगी हैं कई जेसीबी
चंडीगढ़ के डंपिंग ग्राउंड में पुराने कचरे की खुदाई और उसे अलग-अलग हिस्सों से उठाने का काम लंबे समय से चल रहा है। इसके लिए नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में जेसीबी मशीनें काम पर लगाई गई हैं। बताया जा रहा है कि करीब एक दर्जन से अधिक जेसीबी इस काम में लगी हुई हैं।
डंपिंग ग्राउंड से पुराने कचरे को हटाने, उसकी खुदाई करने और निपटारे के लिए अलग-अलग स्तर पर ठेके और भुगतान किए जाते हैं। काम का दायरा बड़ा होने के कारण इसमें करोड़ों रुपये खर्च होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में रिश्वत के आरोप में एक अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सीबीआई अब यह भी जांच सकती है कि जेसीबी से जुड़े काम में कितने ठेकेदारों को काम दिया गया, उनके बिल कितने हैं, भुगतान किस आधार पर हुआ और अधिकारियों ने किन स्तरों पर इन बिलों को मंजूरी दी।
कई बड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सेनेटरी इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। सीबीआई को आशंका है कि कथित रिश्वतखोरी का नेटवर्क केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसी की नजर नगर निगम के सेनेटरी विंग के साथ-साथ मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारियों पर भी है।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठेकेदार से मांगी गई रकम का हिस्सा कहीं अन्य अधिकारियों तक तो नहीं पहुंचना था। इसके लिए आरोपी अधिकारी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा सकती है।
जांच में यदि किसी अन्य अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सीबीआई का मुख्य फोकस रिश्वत की मांग और उसके पीछे मौजूद संभावित नेटवर्क का पता लगाने पर है।
चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी सवाल
मामले में चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसी कथित तौर पर कुछ अन्य अधिकारियों तक पहुंचने की तैयारी में थी, लेकिन किसी कारण से प्रस्तावित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब सीबीआई इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि क्या किसी अधिकारी को कार्रवाई की जानकारी पहले मिल गई थी या फिर किसी अन्य वजह से ट्रैप की योजना सफल नहीं हो पाई।
हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अधिकारियों की भूमिका को लेकर सामने आ रही जानकारियों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
डंपिंग ग्राउंड पर अब तक खर्च हो चुके करोड़ों रुपये
चंडीगढ़ के डंपिंग ग्राउंड से कचरे के निपटारे का काम लंबे समय से नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुराने कचरे को हटाने और प्रोसेस करने पर अब तक बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगम डंपिंग ग्राउंड से कचरा उठाने और उसके निपटारे पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है।
इसके अलावा डंपिंग ग्राउंड और गार्बेज प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़े अलग-अलग कामों के लिए कई कंपनियों को करोड़ों रुपये की पेमेंट की गई है। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि कुछ कंपनियों को बिना पर्याप्त अनुभव के काम सौंपा गया और कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।
अब सेनेटरी इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के बाद इन सभी पुराने ठेकों और भुगतान की प्रक्रिया भी जांच एजेंसी की नजर में आ सकती है।
कंपनियों के चयन और भुगतान की जांच संभव
सीबीआई अब केवल रिश्वत की रकम तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि डंपिंग ग्राउंड में कचरे के निपटारे से जुड़े पूरे सिस्टम की जांच कर सकती है। इसमें टेंडर जारी करने से लेकर कंपनियों के चयन, काम का आवंटन, जेसीबी की तैनाती, कचरे की मात्रा, बिल तैयार करने और भुगतान जारी करने तक के रिकॉर्ड की जांच शामिल हो सकती है।
जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि जिन कंपनियों को काम मिला, उनके पास निर्धारित अनुभव और तकनीकी क्षमता थी या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि कंपनियों के बिलों को किस अधिकारी ने सत्यापित किया और भुगतान की अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई।
यदि जांच के दौरान किसी अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो मामला रिश्वतखोरी से आगे बढ़कर ठेका प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं तक पहुंच सकता है।
गीले और सूखे कचरे का काम भी सवालों में
डंपिंग ग्राउंड में फिलहाल गीले और सूखे कचरे को उठाने तथा उसके निपटारे का काम भी अलग-अलग एजेंसियों और कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से जुड़ा काम भी लगातार चर्चा में रहा है।
ऐसे में सीबीआई की कार्रवाई के बाद कचरा प्रबंधन से जुड़े पूरे तंत्र की निगरानी बढ़ने की संभावना है। जांच एजेंसी यह देख सकती है कि अलग-अलग कामों के लिए कितनी राशि मंजूर हुई, वास्तविक काम कितना हुआ और उसके मुकाबले कितना भुगतान किया गया।
कॉल डिटेल और रिकॉर्ड खंगाल सकती है सीबीआई
शक्ति शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई उसके संपर्क में रहने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। इसके लिए मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन को भी खंगाला जा सकता है।
इसके अलावा नगर निगम से डंपिंग ग्राउंड से संबंधित फाइलें, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, बिल, भुगतान रिकॉर्ड और अधिकारियों की मंजूरी से जुड़े दस्तावेज लिए जा सकते हैं।
नगर निगम में डंपिंग ग्राउंड और कचरा निपटारे से जुड़े कामों के लिए विशेष विंग भी गठित है। इस विंग में लंबे समय से तैनात अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
गिरफ्तारी के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
एक सेनेटरी इंस्पेक्टर के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। खासतौर पर तब, जब डंपिंग ग्राउंड से कचरे के निपटारे पर पहले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
अब सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पांच लाख रुपये की रिश्वत की मांग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए थी या इसके पीछे कोई बड़ा तंत्र काम कर रहा था। यदि जांच में अन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या पूछताछ हो सकती है।
फिलहाल सीबीआई ने कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच का दायरा बढ़ने के संकेत हैं। डंपिंग ग्राउंड से जुड़े ठेकों, भुगतान और अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नगर निगम में कथित रिश्वत का यह मामला कितनी दूर तक फैला हुआ है।




