चंडीगढ़ में आप का भाजपा पर हमला, सिख विरोधी रवैये और पुलिस के कथित दुरुपयोग के लगाए आरोप

चंडीगढ़ में आप का भाजपा पर हमला, सिख विरोधी रवैये और पुलिस के कथित दुरुपयोग के लगाए आरोप

आम आदमी पार्टी (आप) ने चंडीगढ़ में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उस पर सिख समुदाय को लेकर कथित आपत्तिजनक रवैया अपनाने, अवैध शराब एवं नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को संरक्षण देने और राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आप के नेता प्रतिपक्ष हरदीप सिंह बुटेरला, वरिष्ठ नेता योगेश ढींगरा और पार्षद जसबीर सिंह लाड्डी ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए और चंडीगढ़ प्रशासन से पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

आप नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति में अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाए जाने का एक पैटर्न दिखाई दे रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक सिख आईपीएस अधिकारी को भाजपा नेता की ओर से कथित रूप से ‘खालिस्तानी’ कहे जाने का मामला सामने आया था। आप नेताओं ने कहा कि किसी सिख अधिकारी या किसी भी नागरिक की धार्मिक पहचान को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी गंभीर खतरा है।

प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने किसान आंदोलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की जान गई और इसके लिए भाजपा की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। आप नेताओं ने कहा कि किसानों और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा का रवैया लगातार सवालों के घेरे में रहा है।

आप नेताओं ने चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा पर भी सिख समुदाय को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी समुदाय की धार्मिक पहचान या आस्था को लेकर टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।

शराब और नशे के नेटवर्क को लेकर भाजपा पर निशाना

पार्षद जसबीर सिंह लाड्डी ने प्रेस वार्ता में अवैध शराब और नशे के खिलाफ अपनी ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कुछ दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। उन्होंने 2020 के एक समझौता पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जिन शराब माफिया और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उनमें से कुछ लोग अब चंडीगढ़ में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

लाड्डी ने दावा किया कि पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने नशे और शराब के अवैध कारोबार से जुड़े तत्वों पर कार्रवाई की है। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को चंडीगढ़ में किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक शरण नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि अपने वार्ड और शहर के लोगों को नशे तथा अवैध शराब के कारोबार से बचाने के लिए आवाज उठाने के बाद उन्हें राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। लाड्डी के मुताबिक, कुछ भाजपा समर्थित लोग उनके आवास के बाहर पहुंचे और वहां कथित तौर पर हंगामा तथा गाली-गलौज की।

आप पार्षद ने आरोप लगाया कि इस घटना में उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय चंडीगढ़ पुलिस ने उनके विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस या भाजपा का पक्ष इस उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आया है।

लाड्डी ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा नशे या अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाई जाती है तो प्रशासन को शिकायत की जांच करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विपरीत उनके खिलाफ ही कार्रवाई करके राजनीतिक आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

आप नेताओं ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में पुलिस भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आप के चुने हुए प्रतिनिधियों पर ही कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आप नेताओं ने मांग की कि जिन मामलों में पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे हैं, उनकी स्वतंत्र समीक्षा की जाए।

लाड्डी ने दावा किया कि एक घटना के दौरान पुलिस थाने के भीतर ही भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने सिख पहचान, दाढ़ी और धार्मिक स्वरूप को लेकर कथित आपत्तिजनक धमकियां दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन कथित रूप से कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया।

आप नेताओं ने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान को लेकर धमकी या अपमान किया जाता है और पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो यह कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा करता है।

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों का भी उठाया मुद्दा

प्रेस वार्ता में स्वतंत्रता दिवस के दौरान अर्धसैनिक बलों के जवानों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए गए। जसबीर सिंह लाड्डी ने कहा कि 14 अगस्त की रात करीब 200 अर्धसैनिक बल के जवान चंडीगढ़ पहुंचे थे, लेकिन उनके ठहरने के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के कुछ कम्युनिटी सेंटरों पर स्थानीय भाजपा नेताओं का कब्जा था, जिसके कारण सुरक्षा ड्यूटी पर पहुंचे जवानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लाड्डी के अनुसार, आप पार्षदों ने सुबह करीब चार बजे प्रयास करके इन जवानों के लिए ठहरने की व्यवस्था करवाई।

आप नेताओं ने इस घटना को प्रशासनिक कुप्रबंधन का उदाहरण बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात जवानों के लिए समय रहते बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कम्युनिटी सेंटरों के इस्तेमाल को लेकर क्या व्यवस्था थी और जवानों को शुरुआती तौर पर ठहरने की जगह क्यों नहीं मिली।

प्रशासन और राज्यपाल से कार्रवाई की मांग

आप नेताओं ने चंडीगढ़ प्रशासन और राज्यपाल से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उनका कहना था कि शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से चंडीगढ़ पुलिस पर लगे कथित पक्षपात के आरोपों की जांच की मांग की। आप नेताओं के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि या आम नागरिक के साथ कानून के तहत समान व्यवहार होना चाहिए। यदि किसी मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

आप नेताओं ने कहा कि चंडीगढ़ में नशे और अवैध शराब के नेटवर्क को लेकर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण यदि किसी आपराधिक नेटवर्क को बढ़ावा मिलता है तो इसका सीधा असर शहर के युवाओं और आम लोगों पर पड़ता है।

‘नशे के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी’

प्रेस वार्ता के अंत में आप नेताओं ने भाजपा को राजनीतिक चुनौती देते हुए कहा कि पार्टी धमकियों, झूठे मामलों या दबाव से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी है और चंडीगढ़ में भी अवैध शराब तथा ड्रग्स के नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाई जाती रहेगी।

नेताओं ने कहा कि राजनीतिक विरोध को दबाने के बजाय मुद्दों पर बहस होनी चाहिए। यदि विपक्ष या सत्ता पक्ष का कोई प्रतिनिधि नशे, कानून-व्यवस्था या प्रशासन से जुड़ा सवाल उठाता है तो उसका जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

आप नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि चंडीगढ़ में कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराना है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि नशे और अवैध शराब से जुड़े मामलों की जांच राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर की जाए और यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

इस बीच, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आई है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, आप की प्रेस वार्ता के बाद चंडीगढ़ में भाजपा और आप के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।