चंडीगढ़ में वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से शुक्रवार को वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत वॉकाथॉन के साथ की गई। इस वर्ष सप्ताह की थीम “कनेक्टिंग हैबिटैट्स, थ्राइविंग वाइल्डलाइफ” रखी गई है। कार्यक्रम के माध्यम से प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ने, वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्राकृतिक गलियारों को बनाए रखने और संरक्षण के प्रयासों में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया गया।
वॉकाथॉन में विद्यार्थियों, एनएसएस स्वयंसेवकों, प्रकृति प्रेमियों, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज से जुड़े लोगों और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के जरिए प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
सुखना झील से शुरू हुई वॉकाथॉन
वन्यजीव सप्ताह के उद्घाटन अवसर पर आयोजित वॉकाथॉन सुखना झील के रेगुलेटरी एंड से शुरू हुई। प्रतिभागी लेक रिजर्व फॉरेस्ट से होते हुए आगे बढ़े और चंडीगढ़ बर्ड पार्क के समीप पहुंचकर कार्यक्रम का समापन हुआ।
वॉकाथॉन के दौरान प्रतिभागियों को शहर के प्राकृतिक क्षेत्रों, वन क्षेत्रों और वन्यजीवों के लिए उपलब्ध आवासों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। आयोजन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना भी रहा कि शहरों में मौजूद वन क्षेत्र और प्राकृतिक स्थल केवल हरियाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनेक पक्षियों, तितलियों, छोटे स्तनधारियों और अन्य जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास उपलब्ध कराते हैं।
प्राकृतिक आवासों को जोड़ना जरूरी : मुख्य सचिव
यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि शहर की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के लिए उपलब्ध प्राकृतिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ना जरूरी है, ताकि उनके आवागमन और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित स्थान बने रहें। इसके साथ ही संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।
मुख्य सचिव के अनुसार चंडीगढ़ जैसे शहरी क्षेत्र में वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच संतुलित सह-अस्तित्व कायम करने के लिए प्रशासन, विशेषज्ञों, पर्यावरण संगठनों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को शहर के दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन से भी जोड़ा।
वन्यजीव सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी
कार्यक्रम के दौरान यूटी चंडीगढ़ की वन्यजीव सर्वेक्षण रिपोर्ट भी जारी की गई। इस रिपोर्ट में शहर में किए गए वन्यजीव सर्वेक्षण के दौरान सामने आए निष्कर्षों और वन्यजीवों की विविधता से संबंधित जानकारी शामिल की गई है।
रिपोर्ट में वन्यजीवों के वितरण और उनके प्राकृतिक आवासों से संबंधित आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। वन विभाग के अनुसार यह दस्तावेज भविष्य में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी योजनाएं तैयार करने में उपयोगी रहेगा।
विभाग का कहना है कि सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्राकृतिक आवासों के बेहतर प्रबंधन, वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण संबंधी गतिविधियों की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आने वाले वर्षों में वन्यजीवों की स्थिति में होने वाले बदलावों का आकलन करने के लिए भी यह रिपोर्ट संदर्भ दस्तावेज के रूप में काम करेगी।
‘पहल’ पत्रिका और प्रदूषण नियंत्रण समिति का बुलेटिन भी जारी
कार्यक्रम के दौरान वन एवं वन्यजीव विभाग की ‘पहल’ पत्रिका का नया अंक भी जारी किया गया। पत्रिका में स्वस्थ जीवनशैली, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सतत जीवन पद्धतियों से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है।
इसके साथ ही चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति का बुलेटिन भी जारी किया गया। इसके माध्यम से पर्यावरण से जुड़े विषयों और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
विभाग के अनुसार ऐसे प्रकाशन लोगों को पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ने और रोजमर्रा के जीवन में प्रकृति के अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक करने में उपयोगी हो सकते हैं।
संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को भी कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की सीनियर कोऑर्डिनेटर गीतांजलि कंवर, कुलभूषण कंवर और विक्रमजीत सिंह को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें पर्यावरण संगठनों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों और आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। ऐसे लोगों के प्रयासों को पहचान देने से संरक्षण गतिविधियों में अधिक लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिल सकता है।
पूरे सप्ताह होंगे जागरूकता कार्यक्रम
वन्यजीव सप्ताह के दौरान चंडीगढ़ में कई प्रकृति आधारित और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों और आम नागरिकों को सीधे जोड़ा जाएगा।
बटरफ्लाई पार्क में बटरफ्लाई वॉक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रतिभागियों को तितलियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी।
सिटी फॉरेस्ट और सुखना चो फॉरेस्ट में बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम भी होंगे। इनके जरिए प्रतिभागियों को शहर और आसपास के वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले पक्षियों को पहचानने और उनके व्यवहार को समझने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिताएं
वन्यजीव सप्ताह के दौरान बॉटनिकल गार्डन में विद्यार्थियों के लिए पेंटिंग, ड्राइंग और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों और युवाओं को वन्यजीवों, पेड़-पौधों और पर्यावरण संरक्षण के विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
विभाग की ओर से नुक्कड़ नाटक और जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े संदेशों को सरल और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
जागरूकता शिविरों में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जानकारी साझा की जाएगी।
शहरी क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण पर फोकस
चंडीगढ़ में वन्यजीव सप्ताह के आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू शहरी क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना है। शहर में मौजूद वन क्षेत्र, जल स्रोत, हरित क्षेत्र और प्राकृतिक गलियारे अनेक जीव-जंतुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विभाग की इस वर्ष की थीम भी इसी अवधारणा पर आधारित है। प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क बना रहने से वन्यजीवों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्ते मिल सकते हैं। वहीं, प्राकृतिक आवासों के अलग-अलग हिस्सों में बंट जाने से वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से संरक्षण गतिविधियों में केवल अलग-अलग वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के बजाय उनके बीच मौजूद प्राकृतिक संपर्क और गलियारों को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिश
वन्यजीव सप्ताह के कार्यक्रमों में नागरिकों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। वॉकाथॉन से लेकर बर्ड वॉचिंग, तितली अवलोकन, प्रतियोगिताओं और जागरूकता शिविरों तक विभिन्न गतिविधियों में आम लोगों और विद्यार्थियों को शामिल किया जा रहा है।
विभाग का मानना है कि जब लोग अपने आसपास मौजूद जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों को करीब से समझेंगे, तो उनके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी। खासकर विद्यार्थियों को प्रकृति आधारित गतिविधियों से जोड़ने से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लंबे समय तक जागरूकता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
वन्यजीव सप्ताह के उद्घाटन कार्यक्रम में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। वन सचिव मंदीप सिंह बराड़ विशिष्ट अतिथि रहे।
कार्यक्रम में वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा, मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन अनुप कुमार सोनी, सचिव कार्मिक स्वप्निल नाइक और उप वन संरक्षक सत्येंद्र मौर्य समेत प्रशासन और वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
संरक्षण के संदेश के साथ आगे बढ़ेगा सप्ताह
वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत वॉकाथॉन के जरिए करने का उद्देश्य लोगों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के अभियान से जोड़ना रहा। सप्ताहभर चलने वाली गतिविधियों के माध्यम से चंडीगढ़ के प्राकृतिक क्षेत्रों, जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर रहेगा।
इस वर्ष की थीम के अनुरूप विभाग का फोकस प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने के साथ उन्हें आपस में जोड़ने, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर है। कार्यक्रमों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि शहरों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से भी सीधे जुड़ा है।




