हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रोहड़ू को लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के मजबूत राजनीतिक आधार के तौर पर देखा जाता रहा है। ऐसे क्षेत्र में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के हालिया कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया है। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या मुख्यमंत्री को सुनने और उनसे मिलने के लिए पहुंची।
विक्रमादित्य सिंह इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुक्खू ने कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच काफी समय बिताया और स्थानीय निवासियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने मंचीय कार्यक्रम तक खुद को सीमित रखने के बजाय लोगों से सीधे संवाद किया। इस दौरान स्थानीय संस्कृति से जुड़ते हुए उन्होंने लोगों के साथ नाटी भी डाली। मुख्यमंत्री का यह अंदाज कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
लोगों के बीच देर तक रहे मुख्यमंत्री
रोहड़ू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत की। बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने के लिए पहुंचे। कई लोगों ने अपनी समस्याएं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे।
मुख्यमंत्री ने लोगों की बातें सुनीं और अधिकारियों को संबंधित मामलों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी रही। बुजुर्गों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का लोगों के बीच देर तक मौजूद रहना भी चर्चा में रहा। सामान्य राजनीतिक कार्यक्रमों में जहां नेता मंच से संबोधन के बाद लौट जाते हैं, वहीं सुक्खू ने काफी समय स्थानीय लोगों के बीच बिताया।
‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिएं’ गुनगुनाया
कार्यक्रम का माहौल उस समय और आत्मीय हो गया जब मुख्यमंत्री सुक्खू स्थानीय लोगों के साथ नाटी में शामिल हुए। उन्होंने नाटी डाली और स्थानीय गीत ‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिएं’ की पंक्तियां भी गुनगुनाईं।
मुख्यमंत्री के नाटी डालने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर भी प्रसारित हुआ। स्थानीय संस्कृति के साथ उनके इस जुड़ाव की चर्चा कार्यक्रम के बाद भी होती रही। समर्थकों और स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र की संस्कृति के प्रति मुख्यमंत्री की निकटता के तौर पर देखा।
सुक्खू का यह अंदाज खास तौर पर इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रोहड़ू की पहचान हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति और पहाड़ी जीवनशैली से गहराई से जुड़ी हुई है।
वीरभद्र सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है रोहड़ू
रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र का हिमाचल की राजनीति में अपना अलग महत्व रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया। वह रोहड़ू से लगातार पांच बार विधायक चुने गए।
वीरभद्र सिंह ने 1990, 1993, 1998, 2003 और 2007 के विधानसभा चुनाव में रोहड़ू से जीत दर्ज की। इस दौरान क्षेत्र कांग्रेस और वीरभद्र सिंह की राजनीति का महत्वपूर्ण आधार बना रहा।
2012 के विधानसभा चुनाव से पहले परिसीमन के कारण रोहड़ू विधानसभा सीट का स्वरूप बदल गया और यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इसके बाद वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इस तरह रोहड़ू से उनका प्रत्यक्ष चुनावी संबंध समाप्त हुआ, लेकिन क्षेत्र के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव और प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में रहा।
ब्राक्टा ने संभाली कांग्रेस की पकड़
वीरभद्र सिंह के बाद रोहड़ू में कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ को बनाए रखने में विधायक मोहन लाल ब्राक्टा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ब्राक्टा को वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।
2012 के विधानसभा चुनाव में मोहन लाल ब्राक्टा ने रोहड़ू से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत दर्ज की। इसके बाद भी क्षेत्र में कांग्रेस का प्रभाव बना रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी ब्राक्टा ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की।
सुक्खू सरकार के गठन के बाद मोहन लाल ब्राक्टा को मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में रोहड़ू में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौजूदगी को कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है।
विक्रमादित्य और प्रतिभा सिंह की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक चर्चा को बढ़ाया। विक्रमादित्य सिंह विदेश दौरे पर हैं, जबकि प्रतिभा सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थीं।
वीरभद्र सिंह के परिवार का रोहड़ू से लंबे समय तक जुड़ाव रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में परिवार के दोनों प्रमुख राजनीतिक चेहरों की गैरमौजूदगी के बीच बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना।
हालांकि किसी कार्यक्रम में किसी नेता की अनुपस्थिति को अपने आप में किसी राजनीतिक मतभेद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। विक्रमादित्य सिंह के विदेश दौरे पर होने की जानकारी सार्वजनिक है। वहीं किसी कार्यक्रम में भीड़ का आकार भी अकेले राजनीतिक समर्थन या लोकप्रियता का अंतिम पैमाना नहीं होता। फिर भी रोहड़ू जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हुई है।
सुक्खू का रोहड़ू में दूसरा बड़ा प्रवास
रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री सुक्खू का यह दूसरा बड़ा प्रवास बताया जा रहा है। इससे पहले वह सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत डोडरा-क्वार पहुंचे थे।
डोडरा-क्वार क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम माना जाता है। मुख्यमंत्री के वहां पहुंचने और स्थानीय लोगों से संवाद करने को सरकार की पहुंच को दूरदराज क्षेत्रों तक ले जाने के प्रयास के रूप में देखा गया था।
अब रोहड़ू में दोबारा बड़े कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी और लोगों की भागीदारी ने क्षेत्र को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
स्थानीय मुद्दों पर संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की समस्याएं भी सुनीं। क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बागवानी और अन्य विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण रहे हैं।
रोहड़ू और आसपास के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बागवानी की बड़ी भूमिका है। सेब उत्पादन क्षेत्र होने के कारण किसानों और बागवानों से जुड़े मुद्दे यहां के राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने स्थानीय लोगों की ओर से क्षेत्रीय विकास और बागवानी से संबंधित समस्याएं भी रखी गईं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ संबंधित विषयों पर चर्चा की और लोगों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।
भीड़ को लेकर कांग्रेस में चर्चा
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद कांग्रेस के भीतर भी इसे लेकर चर्चा शुरू हुई है। पार्टी के एक वर्ग में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुक्खू रोहड़ू जैसे पारंपरिक कांग्रेस क्षेत्र में लगातार अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं।
हालांकि किसी एक कार्यक्रम की भीड़ के आधार पर किसी नेता की लोकप्रियता या राजनीतिक स्वीकार्यता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों की भागीदारी कई कारणों से हो सकती है।
फिर भी मुख्यमंत्री का लोगों के बीच लंबे समय तक रहना, स्थानीय समस्याएं सुनना और सांस्कृतिक गतिविधि में शामिल होना इस कार्यक्रम को सामान्य सरकारी कार्यक्रमों से अलग बनाता है।
वीरभद्र परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र में सुक्खू की मौजूदगी
हिमाचल कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। उनके निधन के बाद भी उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका बनी हुई है। प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और मंडी से सांसद रही हैं, जबकि विक्रमादित्य सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।
ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में वीरभद्र सिंह की पुरानी कर्मभूमि में मुख्यमंत्री सुक्खू की लगातार मौजूदगी को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव संगठन और चुनावी राजनीति पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
स्थानीय संस्कृति से जुड़ने की कोशिश
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कार्यक्रम में जिस तरह स्थानीय लोगों के साथ नाटी में हिस्सा लिया, उसने राजनीतिक कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग भी दे दिया। हिमाचल में नाटी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्थानीय लोगों के साथ नाटी डालना मुख्यमंत्री के लिए सीधे संवाद का एक सहज माध्यम बना। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इसमें उत्साह से भाग लिया। मुख्यमंत्री का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद रोहड़ू का यह कार्यक्रम व्यापक चर्चा में आया।
रोहड़ू की राजनीति में आगे की तस्वीर
रोहड़ू में कांग्रेस का आधार लंबे समय से मजबूत रहा है। वीरभद्र सिंह के लगातार चुनाव जीतने से लेकर मोहन लाल ब्राक्टा की बाद की जीत तक कांग्रेस का प्रभाव यहां दिखाई देता रहा है।
अब मुख्यमंत्री सुक्खू के कार्यक्रम में बड़ी भागीदारी के बाद क्षेत्र की राजनीति को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है। मुख्यमंत्री के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सरकार के विकास कार्यों, स्थानीय संगठन और जनता से सीधे संपर्क के जरिए अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलता है।
आने वाले समय में रोहड़ू में मुख्यमंत्री की और गतिविधियां, कांग्रेस संगठन की सक्रियता तथा स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल इस चर्चा को आगे दिशा दे सकते हैं।
फिलहाल रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुक्खू का कार्यक्रम तीन वजहों से चर्चा में है—बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी, वीरभद्र सिंह के पुराने राजनीतिक गढ़ में मुख्यमंत्री की लगातार सक्रियता और स्थानीय संस्कृति के साथ उनका सीधा जुड़ाव। हालांकि इसे किसी अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष के बजाय क्षेत्र में बदलते राजनीतिक संवाद के एक घटनाक्रम के रूप में देखना अधिक उपयुक्त होगा।




