चीन अपने विशाल FAST रेडियो टेलीस्कोप को और ज्यादा सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-डिश रेडियो टेलीस्कोप के तौर पर पहचान बना चुका FAST अब अकेले काम करने वाली विशाल दूरबीन तक सीमित नहीं रहेगा। चीन इसके आसपास 24 अतिरिक्त रेडियो टेलीस्कोप स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इन सभी उपकरणों को FAST के साथ जोड़कर एक बड़े रेडियो-टेलीस्कोप नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल करने का लक्ष्य है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे अहम फायदा अंतरिक्ष से मिलने वाले रेडियो संकेतों की स्थिति और संरचना को ज्यादा सटीक तरीके से समझने में हो सकता है। रिपोर्टों में इस विस्तार के बाद FAST की रेजोल्यूशन क्षमता में मौजूदा व्यवस्था की तुलना में करीब 30 गुना तक सुधार की बात कही गई है। हालांकि, वास्तविक प्रदर्शन नई डिशों के निर्माण, उनकी तकनीकी क्षमता और सभी टेलीस्कोप से मिले डेटा को एक साथ प्रोसेस करने की दक्षता पर निर्भर करेगा।
FAST को क्यों बनाया गया था इतना बड़ा?
FAST का पूरा नाम Five-hundred-meter Aperture Spherical Telescope है। इसे चीन के गुइझोउ प्रांत में पहाड़ियों के बीच मौजूद एक प्राकृतिक घाटी में बनाया गया है। इसके मुख्य रिफ्लेक्टर का व्यास लगभग 500 मीटर है। चीन में इसे ‘तियानयान’ नाम भी दिया गया है, जिसका मतलब ‘आकाश की आंख’ होता है।
FAST को देखकर यह समझना आसान नहीं है कि यह किस तरह काम करता है। यह सामान्य ऑप्टिकल टेलीस्कोप से अलग है। ऑप्टिकल टेलीस्कोप दिखाई देने वाली रोशनी को कैप्चर करते हैं, जबकि FAST अंतरिक्ष से आने वाली रेडियो तरंगों का अध्ययन करता है।
ब्रह्मांड में मौजूद कई खगोलीय वस्तुएं रेडियो तरंगों के रूप में संकेत छोड़ती हैं। इन संकेतों को रिकॉर्ड करके वैज्ञानिक उन पिंडों की गति, स्थिति, संरचना और उनसे जुड़ी भौतिक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। यही कारण है कि रेडियो टेलीस्कोप आधुनिक खगोल विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हजारों पैनलों से बनी है इसकी विशाल सतह
FAST की सबसे खास तकनीकी विशेषताओं में इसका सक्रिय रिफ्लेक्टर शामिल है। इसकी विशाल सतह हजारों धातु पैनलों से मिलकर बनी है। इन पैनलों को कंप्यूटर नियंत्रित सिस्टम की मदद से अलग-अलग स्थिति में समायोजित किया जा सकता है।
इस व्यवस्था के कारण पूरी दूरबीन की सतह को जरूरत के मुताबिक बदलकर किसी खास दिशा से आने वाले रेडियो संकेतों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इतनी बड़ी संरचना का निर्माण अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि माना जाता है।
FAST की विशाल डिश का उद्देश्य केवल ज्यादा बड़ा क्षेत्र कवर करना नहीं है। इसका आकार बेहद कमजोर रेडियो संकेतों को पकड़ने में भी मदद करता है। अंतरिक्ष की बहुत दूर स्थित वस्तुओं से आने वाले संकेत पृथ्वी तक पहुंचते-पहुंचते बेहद कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में बड़ी रेडियो डिश वैज्ञानिकों को उन संकेतों को रिकॉर्ड करने में मदद करती है।
2011 में शुरू हुआ था निर्माण
FAST परियोजना का निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ था। इसके बाद 2016 में इसने शुरुआती परीक्षण अवलोकन शुरू किए। कई वर्षों तक इसकी तकनीक, उपकरणों और वैज्ञानिक संचालन की जांच की गई। जनवरी 2020 में इसे पूरी तरह वैज्ञानिक उपयोग के लिए चालू घोषित किया गया।
इस टेलीस्कोप को तैयार करने के पीछे चीन का प्रमुख उद्देश्य रेडियो खगोल विज्ञान में अपनी क्षमता बढ़ाना था। इसके जरिए वैज्ञानिक ऐसे खगोलीय संकेतों का अध्ययन कर सकते हैं जिन्हें सामान्य प्रकाश आधारित दूरबीनों से देख पाना संभव नहीं होता।
FAST ने विशेष रूप से पल्सर के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पल्सर बेहद तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे होते हैं। इनके घूमने के दौरान नियमित अंतराल पर रेडियो संकेत प्राप्त हो सकते हैं। इन संकेतों का विश्लेषण करके वैज्ञानिक न्यूट्रॉन तारों और अत्यधिक घने पदार्थ की प्रकृति को समझने की कोशिश करते हैं।
अब 24 नई दूरबीनों की क्यों जरूरत पड़ रही है?
FAST का आकार बहुत बड़ा होने के बावजूद इसकी एक सीमा है। एक विशाल डिश किसी स्रोत से आने वाले बेहद कमजोर संकेतों को पकड़ने में सक्षम हो सकती है, लेकिन किसी रेडियो स्रोत की बिल्कुल सटीक स्थिति और उसके सूक्ष्म विवरण को निर्धारित करने के लिए कई दूरबीनों से मिले डेटा को एक साथ इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
इसी जरूरत को देखते हुए चीन FAST के आसपास 40 मीटर व्यास वाली 24 नई रेडियो डिश लगाने की योजना बना रहा है। इस परियोजना को FAST Core Array के नाम से जाना जा रहा है।
नई डिशें अकेले-अलग-अलग टेलीस्कोप के रूप में काम करने के बजाय FAST के साथ मिलकर अवलोकन करेंगी। कई टेलीस्कोप एक ही खगोलीय स्रोत को अलग-अलग स्थानों से रिकॉर्ड करेंगे और बाद में उनके डेटा को एक साथ जोड़ा जाएगा।
यह तकनीक रेडियो इंटरफेरोमेट्री के सिद्धांत पर आधारित है। सरल भाषा में समझें तो अलग-अलग जगह मौजूद रेडियो टेलीस्कोप एक ही स्रोत को देखते हैं और उनके बीच प्राप्त संकेतों के अंतर का विश्लेषण करके वैज्ञानिक किसी स्रोत की दिशा और उसकी संरचना को ज्यादा बारीकी से निर्धारित कर सकते हैं।
30 गुना ज्यादा पावरफुल होने का क्या मतलब है?
FAST को ’30 गुना ज्यादा पावरफुल’ कहने का मतलब यह नहीं है कि इसकी मूल डिश का आकार 30 गुना बढ़ जाएगा या यह हर मामले में 30 गुना ज्यादा संवेदनशील हो जाएगी। यहां मुख्य बात रेजोल्यूशन में संभावित बड़े सुधार से जुड़ी है।
रेजोल्यूशन का मतलब है कि टेलीस्कोप अंतरिक्ष में दो पास-पास मौजूद स्रोतों या किसी एक स्रोत के छोटे-छोटे विवरणों को कितनी स्पष्टता से अलग कर सकता है। प्रस्तावित नेटवर्क के कारण FAST को किसी रेडियो स्रोत की दिशा और स्थिति पहले से ज्यादा सटीकता के साथ निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।
इससे वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में आसानी हो सकती है कि कोई खास रेडियो संकेत अंतरिक्ष के किस क्षेत्र से आया है। इसके बाद उस क्षेत्र का अध्ययन दूसरी ऑप्टिकल, एक्स-रे या अन्य प्रकार की दूरबीनों से भी किया जा सकता है।
तेज रेडियो विस्फोटों पर भी नजर
FAST के नए नेटवर्क से जिन वैज्ञानिक क्षेत्रों को फायदा होने की उम्मीद है, उनमें Fast Radio Bursts यानी FRBs भी शामिल हैं। ये अंतरिक्ष से आने वाले बेहद शक्तिशाली लेकिन बहुत कम समय तक रहने वाले रेडियो संकेत होते हैं।
इन संकेतों के स्रोत और उनकी उत्पत्ति को लेकर अभी भी वैज्ञानिक शोध जारी है। यदि किसी FRB की दिशा ज्यादा सटीक तरीके से निर्धारित की जा सके, तो वैज्ञानिक उसके संभावित स्रोत वाले क्षेत्र की अन्य उपकरणों से जांच कर सकते हैं।
इसके अलावा पल्सर, सुपरनोवा और ब्लैक होल से जुड़ी घटनाओं के अध्ययन में भी इस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। अंतरिक्ष में मौजूद गैस और अणुओं से जुड़े रेडियो संकेतों का अध्ययन भी रेडियो खगोल विज्ञान का अहम हिस्सा है।
FAST सिर्फ अंतरिक्ष की खोज तक सीमित नहीं
इस परियोजना के संभावित इस्तेमाल का दायरा केवल दूर-दराज की आकाशगंगाओं और तारों के अध्ययन तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। छोटे सौर-मंडलीय पिंडों की निगरानी, गहरे अंतरिक्ष में मौजूद यानों से संचार और अंतरिक्ष की परिस्थितियों पर नजर रखने जैसे क्षेत्रों में भी ऐसी रेडियो तकनीक उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, इन सभी संभावित उपयोगों को सीधे वैज्ञानिक उपलब्धि मानना अभी जल्दबाजी होगी। किसी नई प्रणाली की वास्तविक उपयोगिता उसके निर्माण और संचालन के बाद ही स्पष्ट होती है। खासतौर पर इतने बड़े नेटवर्क में अलग-अलग टेलीस्कोप से आने वाले डेटा को एक साथ प्रोसेस करना एक बड़ी तकनीकी चुनौती होगी।
रेडियो इंटरफेरेंस से बचना भी बड़ी चुनौती
रेडियो खगोल विज्ञान में एक बड़ी समस्या आसपास मौजूद रेडियो सिग्नलों का हस्तक्षेप है। मोबाइल नेटवर्क, संचार उपकरण और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से निकलने वाली रेडियो तरंगें वैज्ञानिक अवलोकन को प्रभावित कर सकती हैं।
FAST को ऐसे क्षेत्र में बनाया गया है जहां रेडियो हस्तक्षेप को सीमित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके आसपास एक रेडियो-शांत वातावरण बनाए रखने की कोशिश की जाती है। नई डिशों को इसी क्षेत्र में स्थापित किए जाने से उन्हें भी इस कम-हस्तक्षेप वाले वातावरण का फायदा मिल सकता है।
लेकिन जैसे-जैसे टेलीस्कोपों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे पूरे नेटवर्क के संचालन और रेडियो फ्रीक्वेंसी प्रबंधन को लेकर सावधानी भी जरूरी होगी।
चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
FAST पहले ही चीन को रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी वैज्ञानिक सुविधा उपलब्ध करा चुका है। अब इसके आसपास नई डिशों को जोड़ने की योजना इसे एक अकेली विशाल दूरबीन से आगे ले जाकर एक व्यापक अवलोकन प्रणाली में बदल सकती है।
दुनिया के कई हिस्सों में बड़े रेडियो टेलीस्कोप और इंटरफेरोमेट्री नेटवर्क विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे समय में FAST Core Array जैसी परियोजना चीन की रेडियो खगोल विज्ञान संबंधी तकनीकी और अनुसंधान क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
इसका वैज्ञानिक महत्व केवल चीन तक सीमित नहीं है। खगोल विज्ञान से प्राप्त आंकड़ों और खोजों का इस्तेमाल दुनिया भर के शोधकर्ता करते हैं। FAST पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के शोध प्रस्ताव भी स्वीकार किए जाते रहे हैं। हालांकि, भविष्य में नई व्यवस्था तक अंतरराष्ट्रीय पहुंच किस स्तर पर होगी, यह परियोजना के संचालन नियमों और उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
आगे क्या बदलेगा?
अगर FAST के साथ प्रस्तावित 24 नई रेडियो डिश सफलतापूर्वक तैयार होकर एकीकृत तरीके से काम करती हैं, तो वैज्ञानिकों के पास अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो संकेतों का अध्ययन करने के लिए पहले से कहीं अधिक सक्षम नेटवर्क होगा।
सबसे बड़ा बदलाव किसी संकेत को सिर्फ पकड़ने में नहीं, बल्कि उसके स्रोत की दिशा और संरचना को अधिक सटीकता से समझने में हो सकता है। यही क्षमता FRB, पल्सर, सुपरनोवा और ब्लैक होल जैसी घटनाओं के अध्ययन में नए रास्ते खोल सकती है।
हालांकि, फिलहाल प्रस्तावित क्षमता को अंतिम उपलब्धि के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। परियोजना को पूरा करने के लिए नई डिशों का निर्माण, अत्याधुनिक रिसीवर और अन्य उपकरण लगाना, सभी टेलीस्कोपों के बीच तालमेल स्थापित करना और बड़ी मात्रा में वैज्ञानिक डेटा को प्रोसेस करना जरूरी होगा।
FAST ने अपनी विशाल 500 मीटर की डिश के कारण पहले ही रेडियो खगोल विज्ञान में अलग पहचान बनाई है। अब चीन की योजना इसके चारों ओर 24 अतिरिक्त डिश जोड़कर इस सुविधा को एक बड़े नेटवर्क में बदलने की है। यदि यह व्यवस्था योजना के मुताबिक विकसित होती है, तो दूर अंतरिक्ष से आने वाले कमजोर रेडियो संकेतों की दिशा और सूक्ष्म विवरण को समझने की वैज्ञानिक क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है। इसकी वास्तविक क्षमता और वैज्ञानिक प्रभाव परियोजना पूरी होने तथा नियमित संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।




