पंजाब की राजनीति में धार्मिक आस्था और उससे जुड़े कानून हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सम्मान संशोधन बिल 2026 को स्वीकृति मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे धार्मिक ग्रंथों के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
सुनील जाखड़ ने कहा कि किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथ, धार्मिक प्रतीक या आस्था से जुड़े स्थलों का सम्मान लोकतांत्रिक समाज की मूल भावना का हिस्सा है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में प्रभावी कानूनी व्यवस्था होने से समाज में विश्वास मजबूत होता है और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामलों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि राज्य में ऐसा कानूनी ढांचा विकसित होना चाहिए जो धार्मिक ग्रंथों के अपमान से जुड़े मामलों में स्पष्ट प्रक्रिया और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कर सके। उनके अनुसार यह केवल एक धर्म का विषय नहीं है, बल्कि सभी समुदायों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
बिल को बताया महत्वपूर्ण कदम
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सम्मान संशोधन बिल 2026 को स्वीकृति मिलना धार्मिक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सकेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक ग्रंथ या आस्था के प्रतीक के साथ छेड़छाड़ या अपमान की घटनाएं सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम करना भी होना चाहिए।
सोशल मीडिया के माध्यम से जताया आभार
सुनील जाखड़ ने अपने संदेश में बिल को स्वीकृति दिए जाने पर संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निर्णय समाज में धार्मिक सम्मान और संवेदनशीलता को लेकर सकारात्मक संदेश देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कानून का प्रभाव तभी अधिक दिखाई देगा जब उसका निष्पक्ष और समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उनके अनुसार किसी भी प्रकार के धार्मिक अपमान के मामलों में जांच और कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
अन्य धर्मों के लिए भी कानून लाने की अपील
सुनील जाखड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि राज्य सरकार को अन्य धर्मों से जुड़े अपमान के मामलों के लिए तैयार किए गए कानूनी मसौदे पर भी जल्द आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विषय पर लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए संबंधित विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी एक धर्म के पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाया जा सकता है, तो समान भावना के साथ अन्य सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों और प्रतीकों की सुरक्षा के लिए भी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
सिलेक्ट कमेटी में विचाराधीन मसौदे का किया उल्लेख
उन्होंने बताया कि धार्मिक अपमान से जुड़े व्यापक कानून का मसौदा पहले विचार के लिए सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया था। जाखड़ ने आशा व्यक्त की कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा ताकि सभी समुदायों को समान कानूनी संरक्षण मिल सके।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून बनाने की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है और विभिन्न पक्षों की राय लेने के बाद ही अंतिम स्वरूप तय किया जाता है। ऐसे मामलों में व्यापक सहमति बनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक सौहार्द बनाए रखने पर दिया जोर
भाजपा नेता ने कहा कि पंजाब विविध धार्मिक परंपराओं वाला राज्य है, जहां अलग-अलग समुदाय लंबे समय से मिलकर रहते आए हैं। ऐसे में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक धर्म की आस्था का समान सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखना समाज और प्रशासन दोनों की साझा जिम्मेदारी है। यदि सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ कार्य करें तो विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।
कानून का उद्देश्य केवल दंड नहीं, रोकथाम भी
जाखड़ ने कहा कि प्रभावी कानून का उद्देश्य केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट संदेश देना भी आवश्यक है। उनका मानना है कि कठोर कानूनी प्रावधान भविष्य में कानून तोड़ने वालों के लिए निवारक भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि कानून का पालन समान रूप से किया जाए तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होता है।
सभी धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की आवश्यकता
अपने बयान में सुनील जाखड़ ने दोहराया कि केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों से जुड़े प्रतीकों, पूजा स्थलों और आस्था के केंद्रों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की बेअदबी या अपमानजनक गतिविधि समाज में तनाव पैदा कर सकती है, इसलिए इस दिशा में स्पष्ट और प्रभावी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखने के लिए सभी समुदायों के प्रति समान सम्मान की भावना विकसित करना जरूरी है।
धार्मिक संगठनों की मांग का भी किया उल्लेख
जाखड़ ने कहा कि विभिन्न धार्मिक संगठनों और समाज के अलग-अलग वर्गों की ओर से लंबे समय से ऐसी मांग उठाई जाती रही है कि धार्मिक ग्रंथों और आस्था के प्रतीकों के सम्मान को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाए जाएं। उनका मानना है कि यदि सभी पक्षों के सुझावों को ध्यान में रखकर व्यापक कानून तैयार किया जाए तो यह समाज के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का उद्देश्य सामाजिक संतुलन, नागरिकों की सुरक्षा और पारस्परिक सम्मान को मजबूत करना होता है। धार्मिक मामलों में भी यही सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए ताकि सभी समुदायों में विश्वास और सद्भाव कायम रहे।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बयानों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित विधेयक, कानूनी प्रावधानों या सरकारी निर्णयों से जुड़ी अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं एवं अधिकृत दस्तावेजों को ही मान्य माना जाना चाहिए।




