चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते यानी डीए से जुड़े विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक रंग ले लिया है। डीए की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान पानी की बौछार किए जाने की निंदा करते हुए कहा कि महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों का जायज अधिकार है और सरकार को इसे रोकने के बजाय उनके लंबित भुगतान का समाधान करना चाहिए।
राजा वड़िंग ने कहा कि कर्मचारी अपनी मेहनत और सेवाओं के बदले सरकार से कोई अतिरिक्त राजनीतिक लाभ नहीं मांग रहे हैं, बल्कि महंगाई बढ़ने के कारण मिलने वाले वैधानिक और स्वीकृत लाभ की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अपनी मांग रखने के लिए सड़कों पर उतरे कर्मचारियों के साथ पुलिस बल का इस्तेमाल करना सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा करता है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार कर्मचारियों से किए गए अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे लंबे समय से लंबित डीए का भुगतान हो सके।
वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पारिवारिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पिता भी सरकारी कर्मचारी रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस परिवार ने खुद सरकारी सेवा की परिस्थितियों को करीब से देखा है, उसी सरकार के कार्यकाल में कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है और जवाब में उन पर पानी की बौछारें की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को बल प्रयोग से नहीं सुलझाया जा सकता। यदि किसी कर्मचारी संगठन की ओर से अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है तो सरकार को उसके प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए। वड़िंग ने कहा कि बातचीत और सहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, जबकि पुलिस कार्रवाई से कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ सकता है।
राजा वड़िंग ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पास दूसरे राज्यों में चुनावी गतिविधियों और राजनीतिक प्रचार के लिए संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन जब अपने ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लंबित डीए का भुगतान करने की बात आती है तो आर्थिक संकट का हवाला दिया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि गुजरात और गोवा में चुनाव प्रचार के लिए पैसा खर्च किया जा सकता है तो पंजाब के कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए वित्तीय व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में पंजाब के कर्मचारियों के हित पीछे चले गए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते और अन्य सेवा लाभ उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी कर्मचारी को महंगाई के अनुरूप मिलने वाला भत्ता वर्षों तक नहीं मिलता तो उसका सीधा असर उसके परिवार के घरेलू बजट पर पड़ता है।
वड़िंग ने डीए के भुगतान से जुड़े कानूनी विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेशों के बाद भी कर्मचारियों को उनका लाभ देने के बजाय सरकार मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाकर भुगतान में देरी कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों को लंबा खींचने के बजाय सरकार तत्काल समाधान की दिशा में क्यों नहीं बढ़ती।
उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय की ओर से कर्मचारियों के हित में कोई फैसला आता है तो सरकार को उसका सम्मान करना चाहिए। अदालतों में लगातार कानूनी लड़ाई जारी रहने से कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलने में देरी होती है और सरकार तथा कर्मचारियों के बीच अविश्वास भी बढ़ता है।
राजा वड़िंग ने कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारियों ने कोरोना महामारी समेत विभिन्न कठिन परिस्थितियों में सरकार और आम जनता के लिए सेवाएं दी हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशासन, पुलिस, स्थानीय निकाय और अन्य विभागों के कर्मचारियों ने सरकारी योजनाओं और सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे कर्मचारियों को उनके अधिकारों के लिए आंदोलन करने की स्थिति में पहुंचाना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार के पुराने चुनावी वादों को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने सरकारी कर्मचारियों के साथ कई बड़े वादे किए थे। इनमें पुरानी पेंशन योजना की बहाली भी प्रमुख मुद्दा था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार बनने के बाद उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान किया जाएगा, लेकिन अब भी कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
वड़िंग ने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों की मांगों से पीछे नहीं हटेगी। यदि सरकार ने कर्मचारियों के बकाया डीए का जल्द समाधान नहीं किया तो पंजाब कांग्रेस उनके आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होगी और उनके अधिकारों की लड़ाई को राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जाएगा।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों को उनका हक देने में ज्यादा देरी नहीं की जानी चाहिए। वड़िंग के अनुसार, कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने पक्ष रखते आ रहे हैं। यदि बातचीत के माध्यम से समाधान संभव है तो सरकार को इसके लिए तत्काल पहल करनी चाहिए।
राजा वड़िंग ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के मुद्दे को केवल किसी एक कर्मचारी संगठन की मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े फैसलों का असर सीधे हजारों परिवारों पर पड़ता है। इसलिए इन मामलों में सरकार को संवेदनशीलता और वित्तीय स्पष्टता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने पंजाब सरकार के खर्चों को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए। उनके मुताबिक, एक तरफ राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देकर कर्मचारियों के लंबित भुगतान को टाला जा रहा है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक प्रचार और अन्य गतिविधियों पर खर्च जारी है। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक रूप से यह बताने की मांग की कि कर्मचारियों के बकाया डीए का भुगतान करने के लिए कितनी राशि की जरूरत है और इसे जारी करने में क्या बाधा है।
वड़िंग ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वित्त विभाग को कर्मचारियों की लंबित मांगों पर स्पष्ट रोडमैप सामने रखना चाहिए। कर्मचारियों को यह पता होना चाहिए कि उनका बकाया कब और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा। केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता केवल एक वित्तीय लाभ नहीं है, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पेट्रोल, खाद्य पदार्थ, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों की लागत बढ़ने के साथ कर्मचारियों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है। ऐसे में डीए में देरी उनके घरेलू बजट को प्रभावित करती है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को उनके प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक वार्ता करनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विभागवार चर्चा की जा सकती है और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध भुगतान का रास्ता भी निकाला जा सकता है। लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीति की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी। यदि कर्मचारियों के साथ सरकार का रवैया नहीं बदलता तो कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी। वड़िंग ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल और सरकार के बीच की लड़ाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से इसका समाधान निकलना चाहिए।
पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा उठाते हुए वड़िंग ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों से किया गया यह वादा भी सरकार को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली जरूरी है। कांग्रेस सत्ता में आने पर इस मुद्दे पर अपना वादा पूरा करेगी और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देगी।
वड़िंग ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के साथ टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है कि वह असहमति की आवाज को सुने और समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान तलाशे। कर्मचारियों पर पुलिस कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि असंतोष और बढ़ सकता है।
पंजाब में डीए और अन्य सेवा लाभों को लेकर कर्मचारी संगठनों की नाराजगी लंबे समय से सामने आती रही है। ऐसे में कांग्रेस का खुलकर कर्मचारियों के पक्ष में उतरना आने वाले समय में इस मुद्दे को और राजनीतिक महत्व दे सकता है। सरकार के सामने अब एक ओर कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव का जवाब देने की भी जरूरत होगी।
राजा वड़िंग ने अंत में कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के विरोधी नहीं हैं। वे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और जनता को सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि वह व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करें, कर्मचारी संगठनों को बातचीत के लिए बुलाएं और लंबित डीए के भुगतान को लेकर स्पष्ट निर्णय लें।
उन्होंने दोहराया कि यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं करती तो पंजाब कांग्रेस उनके साथ आंदोलन में शामिल होगी। वड़िंग ने कहा कि कर्मचारियों को उनका अधिकार मिलने तक पार्टी उनकी आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और पुरानी पेंशन योजना समेत कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठाया जाएगा।




