जिंदा शख्स को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मार’ दिया, अनिल विज बोले- तुम यमराज हो क्या?

जिंदा शख्स को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मार’ दिया, अनिल विज बोले- तुम यमराज हो क्या?

यमुनानगर। सरकारी रिकॉर्ड में एक जिंदा व्यक्ति को मृत दर्ज किए जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यमुनानगर के तेजली स्थित सुंदर नगर फेस-2, वार्ड नंबर 11 निवासी 70 प्रतिशत दिव्यांग रवि किरण की दिव्यांग पेंशन जनवरी 2026 में अचानक बंद हो गई। जब उन्होंने विभाग से पेंशन बंद होने का कारण पूछा तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु दर्ज हो चुकी है।

रवि किरण वर्ष 2010 से दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे थे। उनकी पेंशन कई वर्षों से नियमित रूप से मिल रही थी, लेकिन जनवरी में भुगतान बंद होने के बाद उन्होंने विभाग से संपर्क किया। जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि रिकॉर्ड में उन्हें मृत व्यक्ति के तौर पर दर्ज किया गया है। इसके बाद उन्होंने अपनी पेंशन दोबारा शुरू करवाने के लिए विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया।

मामला तब और गंभीर हो गया, जब सामने आया कि रवि किरण वास्तव में अपने बेटे की दिव्यांग पेंशन बंद करवाने के लिए विभाग में गए थे। विभागीय प्रक्रिया के दौरान बेटे के बजाय उनकी अपनी पेंशन बंद हो गई और रिकॉर्ड में रवि किरण को मृत दर्ज कर दिया गया।

बेटे की पेंशन बंद कराने गए थे, खुद की पेंशन हो गई बंद

रवि किरण ने अपनी शिकायत में बताया कि वह 70 प्रतिशत दिव्यांग हैं और वर्ष 2010 से दिव्यांग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। जनवरी 2026 में उनकी पेंशन अचानक बंद कर दी गई। पेंशन नहीं आने पर उन्होंने संबंधित विभाग से जानकारी लेने का प्रयास किया।

विभाग से संपर्क करने पर उन्हें जो जानकारी मिली, उससे वह हैरान रह गए। उन्हें बताया गया कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु दर्ज है। इसके बाद उन्होंने विभाग के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पेंशन बहाल करने की मांग की।

शिकायत के अनुसार, रवि किरण अपने बेटे की दिव्यांग पेंशन बंद करवाने के लिए विभाग में पहुंचे थे। किसी कारण से बेटे के रिकॉर्ड में बदलाव करने की प्रक्रिया के दौरान रवि किरण का ही रिकॉर्ड प्रभावित हो गया। नतीजा यह हुआ कि बेटे के बजाय पिता की पेंशन बंद हो गई।

मामला केवल पेंशन बंद होने तक सीमित नहीं रहा। सरकारी रिकॉर्ड में रवि किरण को मृत दर्ज किए जाने के कारण वह पेंशन योजना के रिकॉर्ड में जीवित लाभार्थी के तौर पर ही बाहर हो गए।

मंत्री अनिल विज के सामने पहुंचा मामला

रवि किरण का मामला हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के सामने पहुंचा। जिंदा व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज किए जाने की जानकारी मिलने पर मंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा और इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई।

अधिकारियों को फटकार लगाते हुए अनिल विज ने सवाल किया कि जिंदा आदमी को ही मार दिया गया, क्या अधिकारी यमराज हैं? उन्होंने इस तरह की गलती को गंभीर मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति की स्थिति बदलने से पहले संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए कि रवि किरण को मृत किस स्तर पर दर्ज किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

दो सदस्यीय कमेटी और एसडीएम के नेतृत्व में जांच

मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसके अलावा एसडीएम के नेतृत्व में भी एक टीम बनाई गई है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि रवि किरण के रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज करने की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि उनके बेटे की पेंशन बंद करने के आवेदन या प्रक्रिया में किस तरह की त्रुटि हुई और किस स्तर पर बेटे के बजाय पिता के रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया गया।

अधिकारियों को यह भी पता लगाना होगा कि किसी लाभार्थी को मृत घोषित करने से पहले रिकॉर्ड में सत्यापन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

मामले में जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

कई महीने बाद बहाल हुई पेंशन

मामला सामने आने के बाद विभाग की ओर से रवि किरण की पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से की गई जांच में बताया गया कि रवि किरण की दिव्यांग पेंशन आईडी 2234938 को स्वीकृति के लिए 22 अप्रैल 2026 को निदेशालय भेजा गया था।

इसके बाद 22 सितंबर 2026 को मुख्यालय से पेंशन को मंजूरी मिलने पर उनकी दिव्यांग पेंशन दोबारा चालू कर दी गई। विभाग के अनुसार अगले महीने पेंशन की राशि रवि किरण के बैंक खाते में भेजी जाएगी। विभाग की ओर से उन्हें फोन के माध्यम से पेंशन बहाल होने की जानकारी भी दे दी गई है।

इस तरह जनवरी से बंद पड़ी पेंशन को करीब आठ महीने बाद दोबारा शुरू किया गया है। हालांकि पेंशन बहाल होने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किए जाने का सवाल बना हुआ है।

रिकॉर्ड में गलती कैसे हुई, जांच में होगा खुलासा

रवि किरण का मामला सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों के रिकॉर्ड के सत्यापन और उसमें दर्ज जानकारी की शुद्धता पर भी सवाल खड़ा करता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु दर्ज होने के बाद संबंधित सरकारी योजनाओं में उसके लाभ प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में रिकॉर्ड में बदलाव से पहले सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस मामले में रवि किरण स्वयं विभाग के पास पहुंचे और उन्हें पता चला कि रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किया गया है। उन्होंने विभाग के सामने अपनी शिकायत रखी और पेंशन बहाल करने की मांग की। बाद में मामले को उच्च स्तर पर उठाए जाने के बाद जांच के आदेश दिए गए।

अब दो सदस्यीय कमेटी और एसडीएम के नेतृत्व वाली टीम की जांच से यह सामने आने की उम्मीद है कि रिकॉर्ड में यह बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ। जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

पेंशन मिली, लेकिन जवाबदेही का इंतजार

रवि किरण की दिव्यांग पेंशन अब बहाल कर दी गई है और विभाग के अनुसार अगले महीने उनके बैंक खाते में राशि भेजी जाएगी। इससे उनकी तत्काल आर्थिक समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में एक जीवित और 70 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्ति को मृत दर्ज किए जाने की गलती ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रवि किरण के मामले में अब मुख्य सवाल यही है कि बेटे की पेंशन बंद कराने के लिए किए गए अनुरोध का असर उनके रिकॉर्ड पर कैसे पड़ा और बिना वास्तविक सत्यापन के उनकी मृत्यु सरकारी रिकॉर्ड में किस आधार पर दर्ज कर दी गई।

जांच समिति और एसडीएम के नेतृत्व वाली टीम की रिपोर्ट के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। पेंशन बहाल होने के बावजूद रिकॉर्ड में हुई इस गंभीर त्रुटि के लिए कार्रवाई का इंतजार है।