दिल्ली में तिरंगा रैली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें शनिवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च शुरू होने से पहले दीपके को हिरासत में लिया गया था। पिछले आठ दिनों के भीतर उनके खिलाफ यह दूसरी पुलिस कार्रवाई है।
इस मामले में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने शनिवार सुबह लगभग पांच बजे उन्हें छोड़ दिया। वहीं, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए अन्य लोगों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। CJP ने दीपके की गिरफ्तारी और उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, AISA ने नेहा बोरा को हिरासत में रखे जाने के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं।
आठ दिनों में दूसरी बार पुलिस की कार्रवाई, पहले एयरपोर्ट पर हुई थी हिरासत
अभिजीत दीपके को इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था। उस समय भी पुलिस की कार्रवाई चर्चा में रही थी। अगले दिन उन्हें रिहा कर दिया गया था। अब एक बार फिर दिल्ली में तिरंगा रैली से पहले उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
शुक्रवार को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने दीपके को हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई के बाद उनकी पार्टी और समर्थकों की ओर से सवाल उठाए गए। पार्टी का कहना है कि दीपके को हिरासत में लेने के बाद उनके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।
फिलहाल, अदालत में पेशी के बाद उनके मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह कोर्ट की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। हिरासत और गिरफ्तारी से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी और पार्टी के आरोपों के बीच कई सवाल अब भी बने हुए हैं।
CJP का आरोप- कई घंटे तक नहीं मिली दीपके की लोकेशन
कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया है कि अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के कई घंटे बाद तक उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, दीपके की तलाश में संपर्क किए जाने पर संसद मार्ग थाने ने उनके वहां होने से इनकार किया। इसके बाद दूसरे पुलिस थाने में जानकारी लेने के लिए कहा गया।
CJP का आरोप है कि इस दौरान दीपके के वकीलों को भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया है और उन्हें कहां रखा गया है। पार्टी ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए पुलिस से जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
NCP (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गांडे ने भी दीपके की रिहाई की मांग की। उनके मुताबिक, दीपके तिरंगा लेकर जा रहे थे और उन्होंने पुलिस से किसी दूसरी जगह जाने का विकल्प देने का अनुरोध किया था। गांडे का दावा है कि इसके बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दीपके के परिवार और कानूनी प्रतिनिधियों को उनकी लोकेशन तथा हिरासत में लेने के कारणों के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी गई। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। ऐसे में हिरासत के दौरान हुई पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
नेहा बोरा को सुबह पांच बजे छोड़ा गया, AISA ने लगाए गंभीर आरोप
तिरंगा मार्च से जुड़े घटनाक्रम में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 लोगों को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह लगभग पांच बजे बोरा को रिहा कर दिया। पुलिस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया।
हालांकि, AISA ने आरोप लगाया कि नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद करीब पांच घंटे तक दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। संगठन के मुताबिक, बाद में उन्हें आरके पुरम थाने पहुंचाया गया। इस दौरान उनके साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इसे लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।
AISA का दावा है कि आधी रात के आसपास जब वकील थाने पहुंचे, तो शुरुआत में उन्हें नेहा बोरा से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। संगठन के मुताबिक, बाद में मुलाकात की इजाजत मिलने पर वहां पुलिसकर्मी मौजूद थे और रिकॉर्डिंग कैमरों के बीच बातचीत हुई।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि नेहा बोरा पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं और पुलिस को उनकी तबीयत की जानकारी थी। इसके बावजूद उन्हें दवाइयां उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया। AISA का कहना है कि हिरासत के दौरान उनकी रिहाई के समय को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इन आरोपों के सामने आने के बाद हिरासत की प्रक्रिया और प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, नेहा बोरा से संबंधित इन दावों को AISA के आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में इन सभी आरोपों पर दिल्ली पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तिरंगा रैली के बाद दिल्ली पुलिस ने जारी कीं राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल की हिदायतें
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़े विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय ध्वज को फहराने, प्रदर्शित करने और संभालने के तरीके को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य तिरंगे के सम्मान और उसके इस्तेमाल से जुड़े नियमों की जानकारी देना है।
पुलिस की ओर से जारी हिदायतों में कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थिति में रखा जाना चाहिए। उसे जमीन पर गिरने या पानी में घिसटने नहीं देना चाहिए। तिरंगे को उल्टा फहराना भी प्रतिबंधित है। इसका अर्थ है कि केसरिया पट्टी नीचे की ओर नहीं होनी चाहिए।
दिशानिर्देशों के मुताबिक, राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाकर फहराने की अनुमति सामान्य परिस्थितियों में नहीं है। ऐसा केवल तभी किया जा सकता है, जब इसके लिए सरकार की ओर से विशेष निर्देश दिए गए हों।
पुलिस ने कपड़ों और दूसरी वस्तुओं पर तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर भी नियमों का उल्लेख किया है। राष्ट्रीय ध्वज को किसी पोशाक या यूनिफॉर्म के हिस्से के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह इसे कुशन, रुमाल और नैपकिन जैसी वस्तुओं पर छापने से भी मना किया गया है।
तिरंगे पर किसी प्रकार का लेखन करना या उसे सजावटी कपड़े की तरह इस्तेमाल करना भी नियमों के विरुद्ध बताया गया है। निजी अंतिम संस्कार के दौरान भी झंडे का ऐसा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, किसी वस्तु को ढकने, उठाने या पकड़ने के लिए तिरंगे का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसमें सीमित अपवाद के तौर पर विशेष अवसरों पर ध्वजारोहण से पहले झंडे के भीतर फूलों की पंखुड़ियां रखने का उल्लेख है।
दिशानिर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय ध्वज से मूर्तियों, स्मारकों, भाषण देने के लिए इस्तेमाल होने वाले डेस्क या मंच को नहीं ढका जाना चाहिए। किसी वाहन, ट्रेन, नाव या विमान के हिस्से पर तिरंगा लपेटना और किसी इमारत को ढकने के लिए उसका इस्तेमाल करना भी प्रतिबंधित है।
इन नियमों का संबंध राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखने से है। हालांकि, इन दिशानिर्देशों का जारी होना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई दो अलग-अलग पहलू हैं। पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब संबंधित मामले की आधिकारिक जानकारी और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल में, पांच दिन की न्यायिक हिरासत
इस घटनाक्रम से जुड़े एक अन्य मामले में CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों को 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। अदालत के आदेश के मुताबिक, उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया है।
बताया गया है कि दोनों की न्यायिक हिरासत 18 अक्टूबर को समाप्त होगी। इसके बाद पुलिस उन्हें दोबारा अदालत में पेश करेगी। आगे की कार्रवाई के संबंध में फैसला न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।
अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी, नेहा बोरा की रिहाई और सौरव दास तथा आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत के घटनाक्रम ने तिरंगा मार्च से जुड़े मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ CJP और AISA पुलिस की कार्रवाई तथा हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पुलिस ने नेहा बोरा की रिहाई के संबंध में कानूनी औपचारिकताओं का हवाला दिया है।
अब अभिजीत दीपके की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेशी पर नजर रहेगी। इस पेशी के बाद उनकी हिरासत और मामले की आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की हिरासत, उनके वकीलों को जानकारी मिलने और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित विवाद के कई पहलुओं पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।




