उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार सुर्खियों में है। कुंजापुरी मेले में गायकी के दौरान मंत्री की ओर से मंच पर जताई गई नाराजगी के बाद मनोरंजन जगत की कई हस्तियां दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आई हैं। अब सुबोध उनियाल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि गायक की तबीयत खराब थी, तो उन्हें आयोजकों को इसकी जानकारी पहले ही देनी चाहिए थी।
मंत्री का कहना है कि दलेर मेहंदी जैसे बड़े कलाकार से दर्शकों को अच्छी प्रस्तुति की उम्मीद थी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान उन्हें लगा कि गायक लाइव गाने के बजाय रिकॉर्ड किए गए संगीत पर केवल लिप-सिंक कर रहे हैं। उनियाल ने यह भी कहा कि उन्हें बाद में पता चला कि मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी। उनके मुताबिक, कलाकार को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देकर कार्यक्रम में प्रस्तुति देने से मना कर देना चाहिए था।
इस मामले ने अब दो अलग-अलग पक्ष सामने ला दिए हैं। मंत्री जहां कार्यक्रम की गुणवत्ता, खर्च और कलाकार की जिम्मेदारी का सवाल उठा रहे हैं, वहीं मीका सिंह, राजपाल यादव और मनोरंजन जगत की अन्य हस्तियां सार्वजनिक मंच पर वरिष्ठ कलाकार के साथ किए गए व्यवहार पर आपत्ति जता रही हैं।
क्या बोले सुबोध उनियाल?
सुबोध उनियाल ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि दलेर मेहंदी को अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी पहले ही देनी चाहिए थी। मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान गायक को बोलने और चलने में परेशानी होती दिखाई दी। उन्हें यह भी लगा कि प्रस्तुति के दौरान गायक अपनी आवाज में नहीं गा रहे थे, बल्कि पहले से रिकॉर्ड किए गए गीतों पर लिप-सिंक कर रहे थे।
उनियाल ने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम बड़ा है और इसी वजह से उन्हें कुंजापुरी मेले में आमंत्रित किया गया था। लेकिन प्रस्तुति के दौरान उन्हें लगा कि कार्यक्रम दर्शकों की अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं चल रहा है। मंत्री का दावा है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और आयोजन समिति से जुड़े होने के कारण उन पर उन लोगों की ओर से सवाल उठाने का दबाव था, जो कार्यक्रम में हो रही प्रस्तुति से संतुष्ट नहीं थे।
उनियाल ने अपनी सफाई में कहा कि उनका गायक के साथ कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दलेर मेहंदी को दुख पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था। उनके अनुसार, यदि उन्हें पहले से गायक की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बारे में बताया गया होता, तो स्थिति को दूसरे तरीके से संभालने पर विचार किया जा सकता था।
मंत्री की इस सफाई के बावजूद विवाद थमा नहीं है। आलोचकों का कहना है कि यदि प्रस्तुति को लेकर कोई शिकायत थी, तो उसे मंच के पीछे या आयोजकों के माध्यम से भी उठाया जा सकता था।
35 लाख रुपये की फीस का जिक्र क्यों हो रहा है?
विवाद में दलेर मेहंदी की कथित फीस भी चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। सुबोध उनियाल ने दावा किया कि कार्यक्रम में प्रस्तुति के लिए गायक को 35 लाख रुपये दिए जाने थे। उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों और होटल बुकिंग का भी उल्लेख किया।
मंत्री के मुताबिक, इतने बड़े आयोजन में जब किसी प्रसिद्ध कलाकार को बुलाया जाता है, तो आयोजकों को उम्मीद रहती है कि प्रस्तुति निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी। उनका तर्क है कि यदि कलाकार अस्वस्थ होने के कारण गाने की स्थिति में नहीं थे, तो उन्हें आयोजकों को समय रहते बता देना चाहिए था।
हालांकि, फीस को लेकर मंत्री के बयान को उनके दावे के रूप में ही समझना चाहिए। सार्वजनिक रिपोर्टों में 35 लाख रुपये की रकम का उल्लेख है, लेकिन भुगतान की पूरी प्रक्रिया, अनुबंध की शर्तों और रकम के वास्तविक हस्तांतरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कार्यक्रम के लिए तय की गई फीस और किसी कलाकार की उस दिन की स्वास्थ्य स्थिति दो अलग-अलग विषय हैं। फीस को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन उससे किसी व्यक्ति के नशे में होने का आरोप अपने आप साबित नहीं होता।
कुंजापुरी मेले में मंच पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 की रात उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के नरेंद्रनगर क्षेत्र में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुई। दलेर मेहंदी यहां प्रस्तुति देने पहुंचे थे। कार्यक्रम नवरात्रि के सांस्कृतिक आयोजनों का हिस्सा था।
प्रस्तुति के बीच सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और गायक के गाने की क्षमता पर सवाल उठाने लगे। सामने आए वीडियो में मंत्री को यह कहते हुए सुना गया कि जब गायक ठीक से बोल भी नहीं पा रहे हैं, तो गाना कैसे गाएंगे। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि दर्शकों को मनोरंजन के लिए बुलाए गए बड़े कलाकार से अपेक्षित प्रस्तुति नहीं मिल रही थी।
मंत्री ने उस समय आरोप लगाया था कि गायक नशे की हालत में दिखाई दे रहे थे। उन्होंने धार्मिक आयोजन के संदर्भ में भी इस व्यवहार पर आपत्ति जताई। वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद घटना ने व्यापक रूप ले लिया और लोगों ने मंत्री के रवैये तथा गायक की स्थिति पर चर्चा शुरू कर दी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नशे में होने का आरोप मंत्री की ओर से लगाया गया था। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने मंत्री के हस्तक्षेप को अनुचित बताया, जबकि कुछ लोगों ने यह सवाल उठाया कि यदि दर्शकों को अपेक्षित प्रस्तुति नहीं मिल रही थी, तो आयोजकों को अपनी शिकायत रखने का अधिकार है या नहीं।
मीका सिंह ने भाई के समर्थन में उठाई आवाज
दलेर मेहंदी के छोटे भाई और गायक मीका सिंह ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने मंत्री से माफी मांगने की मांग की और कहा कि उनके भाई के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह उचित नहीं था।
मीका ने दलेर मेहंदी की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके भाई हाल ही में सर्जरी से गुजरे थे। उनके अनुसार, किसी कलाकार की तबीयत खराब होने पर उसकी परिस्थिति को समझना चाहिए और उसके साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए।
मीका की प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल गायकी की गुणवत्ता या कार्यक्रम की फीस तक सीमित नहीं रहा। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी कलाकार के प्रदर्शन पर असंतोष जताने और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के बीच अंतर कहां है।
दलेर मेहंदी भारतीय पंजाबी पॉप संगीत का जाना-पहचाना नाम हैं। ‘तुनक तुनक तुन’, ‘बोलो ता रा रा’ और ‘हो जाएगी बल्ले बल्ले’ जैसे गीतों से उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली। इसी वजह से इस घटना पर संगीत और फिल्म जगत की प्रतिक्रियाओं को भी काफी महत्व दिया जा रहा है।
राजपाल यादव समेत कई कलाकारों ने जताई नाराजगी
अभिनेता राजपाल यादव ने भी दलेर मेहंदी का समर्थन करते हुए मंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने संदेश में कलाकार के सम्मान और कला की अहमियत पर जोर दिया। राजपाल का कहना था कि किसी कलाकार की प्रतिष्ठा और उसके योगदान को देखते हुए उसके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए।
इससे पहले अनुपम खेर, बादशाह, कपिल शर्मा और हरदीप कौर सहित मनोरंजन जगत की अन्य हस्तियों ने भी दलेर मेहंदी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दी थीं। इन कलाकारों की टिप्पणियों में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि किसी प्रस्तुति को लेकर शिकायत हो सकती है, लेकिन उसे रखने का तरीका भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इस मामले पर सभी की राय एक जैसी नहीं रही। गायिका सोना महापात्रा ने कलाकार के सम्मान के साथ-साथ पेशेवर जवाबदेही का सवाल भी उठाया। उनका तर्क था कि दर्शकों और आयोजकों की अपेक्षाओं पर चर्चा करना गलत नहीं है। किसी वरिष्ठ कलाकार का सम्मान जरूरी है, लेकिन इससे कार्यक्रम की गुणवत्ता पर सवाल उठाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।
इस तरह विवाद में एक तरफ सार्वजनिक मंच पर हुए व्यवहार की आलोचना है, तो दूसरी तरफ कार्यक्रम के प्रति कलाकार और आयोजकों की जिम्मेदारियों पर बहस भी है।
क्या दलेर मेहंदी की सेहत को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई?
दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर उनके समर्थन में आए कलाकारों ने हालिया सर्जरी का जिक्र किया है। सुबोध उनियाल ने भी कहा कि उन्हें बाद में गायक के अस्वस्थ होने की जानकारी मिली थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता कि कार्यक्रम के समय उनकी स्वास्थ्य स्थिति क्या थी और उसका प्रस्तुति पर कितना असर पड़ा।
इसी तरह, मंच पर गायक की स्थिति देखकर मंत्री ने जो नशे से संबंधित आरोप लगाया था, उसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति के बोलने या चलने में परेशानी दिखाई देने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। केवल वीडियो के आधार पर किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।
इस मामले में दलेर मेहंदी या उनकी टीम की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर घटनाक्रम को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। फिलहाल, सार्वजनिक चर्चा मुख्य रूप से मंत्री के बयान और अन्य कलाकारों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है।
विवाद के बीच अब आगे क्या?
सुबोध उनियाल ने अपनी ओर से स्पष्ट किया है कि उन्हें दलेर मेहंदी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। उनका कहना है कि कार्यक्रम के दौरान जो स्थिति बनी, उसमें उन्होंने आयोजन से जुड़े लोगों और दर्शकों की शिकायतों के मद्देनजर हस्तक्षेप किया। दूसरी ओर, गायक के समर्थन में आए कलाकारों का मानना है कि शिकायत रखने के लिए अधिक सम्मानजनक तरीका अपनाया जा सकता था।
इस पूरे प्रकरण से यह सवाल सामने आता है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में किसी कलाकार की तबीयत खराब होने पर आयोजकों को क्या कदम उठाने चाहिए। यदि कोई कलाकार प्रस्तुति देने की स्थिति में नहीं है, तो आयोजकों को पहले से जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। वहीं, कार्यक्रम के दौरान कोई समस्या आने पर बातचीत के जरिए समाधान निकालना भी एक विकल्प है।
फिलहाल, दलेर मेहंदी और सुबोध उनियाल के बीच विवाद पर चर्चा जारी है। एक ओर 35 लाख रुपये की फीस और प्रस्तुति को लेकर मंत्री के सवाल हैं, तो दूसरी ओर कलाकारों के सम्मान, स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर उठ रही आपत्तियां हैं। मामले की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए संबंधित पक्षों की स्पष्ट जानकारी और आरोपों की पुष्टि जरूरी होगी।




