धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का कब है सबसे अच्छा मौका? जानें 6 नवंबर का शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और जरूरी नियम

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का कब है सबसे अच्छा मौका? जानें 6 नवंबर का शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और जरूरी नियम

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगती है। घरों की साफ-सफाई से लेकर खरीदारी और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। दीपावली से पहले आने वाला धनतेरस हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व रखता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी नई वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस पर खरीदी गई चीजें घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं। यही वजह है कि इस दिन ज्वेलरी की दुकानों से लेकर बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामान के बाजारों तक ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती है।

साल 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार भी सोना-चांदी खरीदने के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। अगर आप भी इस अवसर पर गोल्ड ज्वेलरी, चांदी के सिक्के या अन्य कीमती सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर हासिल कर लें। पंचांग के अनुसार, धनतेरस पर सोना खरीदने का विशेष समय 6 नवंबर की सुबह से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा। वहीं शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए भी खास मुहूर्त निर्धारित किया गया है।

क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार?

धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब उसमें से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। उनके प्रकट होने की घटना कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुई थी। इसी कारण इस दिन को धनतेरस के अलावा धन्वंतरि त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

इस पर्व का संबंध केवल धन और संपत्ति से ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से भी है। भगवान धन्वंतरि की पूजा करके लोग अपने और परिवार के सदस्यों के स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही माता लक्ष्मी को धन-संपत्ति की देवी और भगवान कुबेर को धन का संरक्षक मानकर उनकी आराधना की जाती है।

धनतेरस को लेकर मान्यता है कि इस दिन नई वस्तु घर लाने से परिवार की समृद्धि में वृद्धि होती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में खरीदी गई वस्तुओं के शुभ फल में तेरह गुना वृद्धि होने की बात भी कही जाती है। इसी विश्वास के चलते लोग इस दिन छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी खरीदारी को शुभ मानते हैं।

6 नवंबर को इस समय शुरू होगी त्रयोदशी तिथि

धनतेरस की तारीख निर्धारित करने में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी। इसका समापन अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा।

धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए निर्धारित मुख्य शुभ समय शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक बताया गया है।

इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों के साथ पूजा करना शुभ माना जाता है। घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को साफ करके दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवार इस दिन घर के बाहर यम दीप भी जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

सोना खरीदने के लिए कौन सा समय रहेगा शुभ?

धनतेरस के दिन सोने और चांदी की खरीदारी का विशेष चलन है। इस अवसर पर लोग नए आभूषण, सोने के सिक्के और चांदी के बर्तन खरीदना पसंद करते हैं। अगर आप भी इस साल गोल्ड खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो 6 नवंबर का शुभ समय आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से सोना खरीदने का शुभ समय शुरू होगा। यह अवधि 7 नवंबर को सुबह 6 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। यानी श्रद्धालुओं को सोना खरीदने के लिए लगभग पूरे दिन और रात का समय उपलब्ध रहेगा।

हालांकि, खरीदारी करते समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग और मुहूर्त को भी ध्यान में रखना चाहिए। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में भी बदलाव हो सकता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर सोना खरीदना शुभता और आर्थिक उन्नति का प्रतीक है। वहीं व्यावहारिक रूप से खरीदारी करते समय सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जांच करना भी जरूरी है। केवल शुभ दिन होने के कारण बिना जांच-पड़ताल के कोई कीमती सामान नहीं खरीदना चाहिए।

धनतेरस पर इन चौघड़िया मुहूर्तों में भी कर सकते हैं खरीदारी

धनतेरस के दिन शुभ कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त का भी काफी महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया में किए गए कार्य अच्छे परिणाम देने वाले होते हैं। वर्ष 2026 में धनतेरस के अवसर पर ये समय बताए गए हैं:

  • प्रातः काल (चर, लाभ और अमृत): सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक।
  • दोपहर का शुभ चौघड़िया: दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 1 बजकर 27 मिनट तक।
  • अपराह्न काल (चर): शाम 4 बजकर 11 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक।
  • रात्रि काल (लाभ): रात 8 बजकर 49 मिनट से 10 बजकर 27 मिनट तक।
  • रात्रि काल (शुभ, अमृत और चर): रात 12 बजकर 5 मिनट से सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक, 7 नवंबर को।

इन समयों को ध्यान में रखकर लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी और अन्य शुभ कार्यों की योजना बना सकते हैं।

देश के प्रमुख शहरों में धनतेरस पूजा का शुभ समय

धनतेरस पर पूजा के मुहूर्त में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसकी वजह अलग-अलग स्थानों पर सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग की गणना में अंतर होना है। ऐसे में अपने शहर के हिसाब से पूजा का समय जानना जरूरी है।

6 नवंबर 2026 को प्रमुख शहरों के लिए बताए गए पूजा मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • पुणे: शाम 6 बजकर 32 मिनट से रात 8 बजकर 31 मिनट तक।
  • नई दिल्ली: शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक।
  • चेन्नई: शाम 6 बजकर 14 मिनट से रात 8 बजकर 10 मिनट तक।
  • जयपुर: शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक।
  • हैदराबाद: शाम 6 बजकर 15 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक।
  • गुरुग्राम: शाम 6 बजकर 3 मिनट से रात 7 बजकर 59 मिनट तक।
  • चंडीगढ़: शाम 6 बजे से रात 7 बजकर 54 मिनट तक।
  • कोलकाता: शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 7 बजकर 26 मिनट तक।
  • मुंबई: शाम 6 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 35 मिनट तक।
  • बेंगलुरु: शाम 6 बजकर 25 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक।
  • अहमदाबाद: शाम 6 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 28 मिनट तक।
  • नोएडा: शाम 6 बजकर 1 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि पूजा से पहले अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान कर लें।

धनतेरस पर किन चीजों को घर लाना माना जाता है शुभ?

इस दिन खरीदारी का उद्देश्य केवल महंगी वस्तुएं खरीदना नहीं होता, बल्कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार घर में शुभता और सकारात्मकता का स्वागत करना भी है। यही वजह है कि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से अलग-अलग चीजें खरीदते हैं।

धनतेरस पर आमतौर पर इन वस्तुओं को खरीदना शुभ माना जाता है:

  1. सोने और चांदी के आभूषण: इस दिन सोने की अंगूठी, चेन, कंगन और चांदी की पायल जैसी चीजें खरीदी जाती हैं।
  2. सोने-चांदी के सिक्के: कई परिवार माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर वाले सिक्के खरीदकर उनकी पूजा करते हैं।
  3. पीतल के बर्तन: पीतल के बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इन्हें शुभता का प्रतीक माना जाता है।
  4. झाड़ू: धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इसे खरीदना घर से दरिद्रता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
  5. नमक: कुछ परंपराओं में धनतेरस पर नमक खरीदना भी शुभ माना जाता है।
  6. लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां: दीपावली की पूजा के लिए इस दिन नई मूर्तियां खरीदने का चलन है।
  7. मकान और जमीन: कुछ लोग इस शुभ अवसर पर प्रॉपर्टी खरीदने या नए घर की बुकिंग करने की योजना बनाते हैं।

धनतेरस पर किन चीजों की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है?

जहां इस त्योहार पर कई वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।

इनमें चीनी मिट्टी से बनी वस्तुएं, स्टील के बर्तन, प्लास्टिक का सामान, कांच और शीशे की चीजें शामिल हैं। इसके अलावा लोहे का सामान, एल्युमिनियम की वस्तुएं, काले रंग के कपड़े और चाकू-कैंची जैसी नुकीली चीजों को भी धनतेरस पर नहीं खरीदने की परंपरा है।

हालांकि, ये बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए खरीदारी करते समय अपनी जरूरत, बजट और सुविधा को प्राथमिकता देना चाहिए।

पूजा और खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस का पर्व धन, आरोग्य और खुशहाली की कामना से जुड़ा है। इस दिन बाजारों में काफी भीड़ रहती है, इसलिए खरीदारी की योजना पहले से बनाना बेहतर रहेगा। सोना या चांदी लेते समय उसकी शुद्धता और प्रमाणित हॉलमार्क जरूर देखें। दुकानदार से पक्का बिल लें और कीमत की तुलना भी कर लें।

पूजा के लिए घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और शाम को दीपक जलाएं। माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को दिखावे या जरूरत से ज्यादा खर्च करने का अवसर न बनाएं। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार खरीदारी करें और परिवार के साथ इस पर्व की खुशियां मनाएं।

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