पंजाब पुलिस को जल्द मिल सकता है स्थायी नेतृत्व, नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी ने तैयार किया तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल

पंजाब पुलिस को जल्द मिल सकता है स्थायी नेतृत्व, नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी ने तैयार किया तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल

पंजाब में लंबे समय से लंबित नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य पुलिस को लगभग चार वर्षों बाद स्थायी नेतृत्व मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) ने नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही पंजाब सरकार को भेजा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, इस पैनल में शामिल अधिकारियों में वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि अंतिम नियुक्ति का अधिकार पंजाब सरकार के पास होगा, लेकिन सरकार को यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल में शामिल अधिकारियों में से ही किसी एक का चयन करना होगा।

राज्य में पिछले कई वर्षों से डीजीपी का पद कार्यवाहक व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा था। ऐसे में इस नियुक्ति को पंजाब पुलिस के प्रशासनिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूपीएससी की बैठक में चयन प्रक्रिया को मिली मंजूरी

मंगलवार को यूपीएससी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पंजाब के नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में पंजाब सरकार की ओर से मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने राज्य का पक्ष रखा।

वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव स्वयं इस पद के दावेदार हैं, इसलिए वह बैठक में शामिल नहीं हुए।

बैठक के बाद आयोग ने चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हुए तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार किया। माना जा रहा है कि यह पैनल एक-दो दिनों के भीतर औपचारिक रूप से पंजाब सरकार को भेज दिया जाएगा।

इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरा किया गया है, ताकि नियुक्ति में पारदर्शिता बनी रहे।

इन तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पैनल में शामिल

जानकारी के अनुसार, यूपीएससी द्वारा तैयार किए गए पैनल में वर्ष 1992 बैच के तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं।

पैनल में शामिल अधिकारी हैं:

  • गौरव यादव – वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी
  • शरद सत्य चौहान
  • हरप्रीत सिंह सिद्धू

अब पंजाब सरकार को इन्हीं तीन अधिकारियों में से किसी एक को नियमित डीजीपी नियुक्त करना होगा।

तीनों अधिकारी लंबे समय से पुलिस सेवा में हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

वरिष्ठता रही चयन का प्रमुख आधार

सूत्रों के मुताबिक, हाल के वर्षों में यूपीएससी डीजीपी चयन के दौरान वरिष्ठता को प्रमुख आधार मानती रही है।

यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई गंभीर अनुशासनात्मक मामला, भ्रष्टाचार संबंधी जांच या अन्य विवाद लंबित नहीं होता, तो वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाती है।

इसी मानक के आधार पर वर्ष 1992 बैच के सबसे वरिष्ठ पात्र अधिकारियों को पैनल में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

आयोग का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप बनाए रखना है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत होती है डीजीपी नियुक्ति

भारत में डीजीपी की नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार:

  • राज्य सरकार पहले पात्र वरिष्ठ अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजती है।
  • यूपीएससी अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और अन्य मानकों का मूल्यांकन करती है।
  • इसके बाद आयोग तीन अधिकारियों का पैनल तैयार करता है।
  • अंतिम नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकार केवल यूपीएससी द्वारा भेजे गए पैनल में शामिल अधिकारियों में से ही किसी एक को डीजीपी नियुक्त कर सकती है।

गौरव यादव क्यों माने जा रहे हैं सबसे मजबूत दावेदार?

सरकारी सूत्रों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में गौरव यादव की नियुक्ति की संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है।

गौरव यादव जुलाई 2022 से पंजाब पुलिस का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर काम किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना
  • संगठित अपराध के खिलाफ अभियान
  • आतंकवाद विरोधी गतिविधियों की निगरानी
  • सीमा सुरक्षा से जुड़े समन्वय
  • पुलिस प्रशासन में सुधार

उनके प्रशासनिक अनुभव और सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें नियमित डीजीपी पद का मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है।

पुलिस विभाग के भीतर भी उन्हें एक अनुभवी और कार्यकुशल अधिकारी के रूप में देखा जाता है।

चार वर्षों से लंबित थी नियमित नियुक्ति

पंजाब में पिछले कई वर्षों से नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी है।

जुलाई 2022 के बाद से पुलिस विभाग कार्यवाहक व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा था।

सूत्रों के अनुसार, निर्धारित समय पर राज्य सरकार द्वारा पात्र अधिकारियों के नाम यूपीएससी को नहीं भेजे जाने के कारण चयन प्रक्रिया में देरी हुई।

इसी वजह से नियमित नियुक्ति लंबे समय तक लंबित रही और राज्य पुलिस को स्थायी नेतृत्व नहीं मिल पाया।

अब आयोग द्वारा पैनल तैयार किए जाने के बाद इस प्रक्रिया के जल्द पूरी होने की संभावना बढ़ गई है।

स्थायी डीजीपी से क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति से पंजाब पुलिस को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा।

स्थायी नेतृत्व मिलने से:

  • प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
  • दीर्घकालिक पुलिस सुधार योजनाओं को गति मिलेगी।
  • अपराध नियंत्रण की रणनीति बेहतर ढंग से लागू की जा सकेगी।
  • खुफिया तंत्र और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत होगा।
  • सीमा सुरक्षा से जुड़े मामलों में निरंतरता बनी रहेगी।
  • पुलिस आधुनिकीकरण परियोजनाओं को स्थिर नेतृत्व मिलेगा।

स्थायी डीजीपी के कार्यकाल से विभाग में नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने की उम्मीद की जा रही है।

पंजाब पुलिस के सामने मौजूद चुनौतियां

पंजाब पुलिस के सामने वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • नशा तस्करी पर नियंत्रण
  • सीमा पार से होने वाली गतिविधियों की निगरानी
  • साइबर अपराधों में बढ़ोतरी
  • संगठित अपराध के नेटवर्क पर कार्रवाई
  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना
  • आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देना

ऐसे समय में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य सरकार करेगी अंतिम फैसला

अब सभी की नजर पंजाब सरकार के अगले कदम पर है।

जैसे ही यूपीएससी की ओर से तीन अधिकारियों का पैनल औपचारिक रूप से राज्य सरकार को भेजा जाएगा, उसके बाद सरकार उस पर विचार कर अंतिम निर्णय लेगी।

यदि मौजूदा परिस्थितियां और सेवा रिकॉर्ड निर्णायक साबित होते हैं, तो गौरव यादव के नियमित डीजीपी बनने की संभावना सबसे मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि अंतिम फैसला पंजाब सरकार द्वारा यूपीएससी के पैनल पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।

इस नियुक्ति के साथ पंजाब पुलिस को लगभग चार वर्षों बाद स्थायी नेतृत्व मिलने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।