रिकॉर्ड बिजली मांग के बावजूद पंजाब में हालात काबू में, सभी थर्मल यूनिट पूरी क्षमता से चालू: मंत्री सौंध

रिकॉर्ड बिजली मांग के बावजूद पंजाब में हालात काबू में, सभी थर्मल यूनिट पूरी क्षमता से चालू: मंत्री सौंध

पंजाब में पिछले दिनों गहराए बिजली संकट के बीच राज्य सरकार ने अब स्थिति सामान्य होने का दावा किया है। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने सोमवार को कहा कि तकनीकी दिक्कतों को दूर कर प्रदेश के सभी 10 थर्मल यूनिट पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक राज्य में अब बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट का दौर निकल चुका है और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

लुधियाना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सौंध ने कहा कि पंजाब में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और इस साल कई बार पिछले रिकॉर्ड टूटे हैं। इसके बावजूद सरकार ने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखा है। उन्होंने दावा किया कि रविवार सुबह सात बजे से सोमवार तक राज्य में किसी तरह की बिजली कटौती नहीं की गई।

मंत्री ने बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को अपेक्षित मात्रा में कोयले की आपूर्ति नहीं की गई और राज्य को 1,000 मेगावाट बिजली भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण संकट की स्थिति बनी।

17,423 मेगावाट तक पहुंची बिजली की मांग

सौंध के अनुसार पंजाब में इस वर्ष बिजली की खपत और मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग 12,025 मेगावाट थी। इसके बाद गर्मी और कृषि क्षेत्र की जरूरत बढ़ने के साथ मांग में लगातार इजाफा होता गया।

जुलाई में अधिकतम मांग बढ़कर 17,277 मेगावाट तक पहुंच गई। इसके बाद 13 सितंबर को पंजाब में बिजली की मांग ने एक और नया रिकॉर्ड बना दिया। इस दिन अधिकतम मांग 17,423 मेगावाट दर्ज की गई।

मंत्री ने कहा कि अप्रैल से सितंबर के बीच बनी पिछली अधिकतम मांग के मुकाबले यह आंकड़ा 146 मेगावाट अधिक है। इतनी अधिक मांग के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था को संभालना राज्य के लिए बड़ी चुनौती थी।

उनके मुताबिक बढ़ती मांग के साथ उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबियों ने भी स्थिति को प्रभावित किया था। अब इन दिक्कतों को दूर कर उत्पादन क्षमता को फिर से बहाल कर दिया गया है।

सभी 10 थर्मल यूनिट से उत्पादन

बिजली मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के सभी 10 थर्मल यूनिट पूरी क्षमता पर चल रहे हैं। हाल में कुछ संयंत्रों में तकनीकी खराबी आने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिससे मांग और उपलब्ध बिजली के बीच अंतर बढ़ गया था।

उन्होंने कहा कि दो निजी थर्मल प्लांटों में आई तकनीकी खराबियों के चलते उत्पादन पर असर पड़ा था। इसके बाद तकनीकी टीमों ने खराबियों को दूर करने के लिए काम किया और अब उत्पादन व्यवस्था को सामान्य कर लिया गया है।

एक अन्य निजी बिजली संयंत्र की इकाई भी दोबारा चालू हो गई है। इससे राज्य के बिजली ग्रिड को लगभग 100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगी है। सरकार के अनुसार इससे मांग के दबाव को कम करने में मदद मिली है।

गुरु अमरदास थर्मल प्लांट का फैसला बताया अहम

तरुणप्रीत सिंह सौंध ने पंजाब सरकार की ओर से गुरु अमरदास थर्मल प्लांट खरीदने के फैसले को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के मौजूदा बिजली संकट के दौरान इस प्लांट ने बड़ी भूमिका निभाई है।

उनका कहना था कि यदि यह थर्मल प्लांट पंजाब के पास उपलब्ध नहीं होता तो बिजली आपूर्ति की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। सरकार के मुताबिक अपने बिजली उत्पादन स्रोत मजबूत करने का यह फैसला संकट के समय राज्य के लिए मददगार साबित हुआ है।

मंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में भी पंजाब को अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध संयंत्रों का बेहतर इस्तेमाल करने पर ध्यान देना होगा।

किसानों के लिए अतिरिक्त बिजली का इंतजाम

पंजाब में कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति सरकार की प्राथमिकताओं में बनी हुई है। सौंध ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर किसानों को रविवार से सामान्य आपूर्ति के मुकाबले दो घंटे अतिरिक्त बिजली दी जा रही है। कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद किसानों की जरूरत को पूरा करने के लिए यह अतिरिक्त आपूर्ति शुरू की गई है।

मंत्री ने कहा कि बिजली संकट के दौरान किसान संगठनों और उद्योगपतियों की ओर से भी सरकार से संपर्क किया गया था। सरकार ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया।

केंद्र पर कोयले की कम आपूर्ति का आरोप

बिजली संकट पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। सौंध ने कहा कि पंजाब में पैदा हुई मुश्किलों का एक प्रमुख कारण केंद्र की ओर से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति न होना रहा।

उन्होंने दावा किया कि कोयले की कम उपलब्धता के कारण थर्मल प्लांटों के संचालन पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा केंद्र की ओर से पंजाब को 1,000 मेगावाट बिजली जारी नहीं किए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया।

मंत्री के मुताबिक जब राज्य में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही थी, उस समय बाहरी स्रोतों से पर्याप्त बिजली उपलब्ध न होना चुनौती को और गंभीर बना रहा था। हालांकि अब राज्य में अपने उत्पादन और उपलब्ध अन्य स्रोतों के सहारे स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है।

रविवार से नहीं लगा बिजली कट

सौंध ने दावा किया कि बिजली आपूर्ति में सुधार का असर जमीन पर भी दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार रविवार सुबह सात बजे से सोमवार तक प्रदेश में कोई बिजली कट नहीं लगाया गया।

उन्होंने कहा कि इस अवधि में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को भी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। बिजली की रिकॉर्ड मांग के बावजूद कटौती से बचना सरकार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मंत्री ने कहा कि बिजली संकट का सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट चुका है और राज्य में स्थिति नियंत्रण में है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले दिनों में भी मांग बढ़ने की स्थिति में पर्याप्त बिजली उपलब्ध रहे।

उद्योग और खेती दोनों पर फोकस

पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बिजली संकट का सीधा असर इन दोनों क्षेत्रों पर पड़ सकता है। उद्योगों के लिए निर्बाध बिजली जरूरी है, जबकि किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था काफी हद तक बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहती है।

सौंध ने कहा कि सरकार ने दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। उद्योगपतियों और किसान संगठनों की ओर से आए फोन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के दौरान सरकार ने उनकी समस्याओं को समझते हुए जरूरी कदम उठाए।

उनके मुताबिक अब उत्पादन इकाइयां चालू होने और तकनीकी समस्याएं दूर होने से बिजली व्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

मांग बढ़ने की रफ्तार ने बढ़ाई चुनौती

पंजाब में इस साल बिजली की मांग में जिस तेजी से वृद्धि हुई, उसने सरकार और बिजली विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी की। अप्रैल में जहां अधिकतम मांग 12,025 मेगावाट थी, वहीं कुछ ही महीनों में यह बढ़कर 17 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंच गई।

मांग में करीब पांच महीने के दौरान हुई इस वृद्धि से बिजली उत्पादन और आपूर्ति तंत्र पर स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ा। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र की जरूरत, गर्मी और अन्य उपभोक्ता क्षेत्रों की बढ़ती खपत ने कुल मांग को ऊपर पहुंचाया।

13 सितंबर का 17,423 मेगावाट का आंकड़ा इस बढ़ती खपत को दर्शाता है। इसके बावजूद राज्य सरकार का कहना है कि उत्पादन इकाइयों को उपलब्ध कराने और तकनीकी खराबियों को समय पर ठीक करने से स्थिति को संभाल लिया गया।

90 प्रतिशत उपभोक्ताओं को शून्य बिजली बिल का दावा

बिजली मंत्री ने सरकार की मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं को शून्य बिजली बिल मिल रहा है।

सरकार लंबे समय से घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है। सौंध ने कहा कि बढ़ती बिजली मांग के बीच भी सरकार इस सुविधा को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि, बिजली की खपत बढ़ने के साथ राज्य के सामने उत्पादन और वित्तीय प्रबंधन दोनों की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सरकार के लिए एक ओर उपभोक्ताओं को राहत देना और दूसरी ओर बढ़ती मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन तथा उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

संकट से सबक, भविष्य की मांग के लिए तैयारी जरूरी

मौजूदा बिजली संकट ने पंजाब की बिजली व्यवस्था के सामने बढ़ती मांग और उत्पादन क्षमता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को फिर सामने ला दिया है। आने वाले वर्षों में राज्य में बिजली की जरूरत और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में थर्मल प्लांटों की उपलब्धता, कोयले की आपूर्ति, निजी संयंत्रों की तकनीकी विश्वसनीयता और बाहरी बिजली स्रोतों पर निर्भरता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।

फिलहाल सरकार का दावा है कि तकनीकी खराबियां दूर हो चुकी हैं, सभी 10 थर्मल यूनिट चल रहे हैं और प्रदेश में बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई है। किसानों को अतिरिक्त बिजली देने के साथ घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

तरुणप्रीत सिंह सौंध के मुताबिक रिकॉर्ड 17,423 मेगावाट की मांग के बावजूद अब पंजाब में बिजली संकट नियंत्रण में है। सरकार के सामने अगली चुनौती यही होगी कि बढ़ती मांग के बीच यह स्थिरता आगे भी कायम रहे और उत्पादन, कोयला आपूर्ति तथा बिजली खरीद के स्तर पर किसी नए संकट की स्थिति पैदा न हो।