आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को समय रहते मजबूत करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने चुनाव प्रशासन से जुड़े सेवा नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले को चुनावी ढांचे को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि चुनाव संबंधी कार्यों के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चुनाव विभाग में लंबे समय से रिक्त पड़े महत्वपूर्ण पदों को भरने की प्रक्रिया आसान बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे मतदाता सूची पुनरीक्षण, निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों और भविष्य के चुनावी प्रबंधन में तेजी आएगी।
पदोन्नति नियमों में दी गई राहत
कैबिनेट ने चुनाव विभाग के सेवा नियमों में संशोधन करते हुए चुनाव कानूनगो से चुनाव तहसीलदार पद पर पदोन्नति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को कम करने का फैसला लिया है। पहले इस पदोन्नति के लिए 15 वर्ष का अनुभव अनिवार्य था, जिसे अब घटाकर 12 वर्ष कर दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार विभाग में चुनाव तहसीलदारों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े थे। वर्तमान नियमों के कारण उपलब्ध कर्मचारियों में से कोई भी पदोन्नति के लिए पात्र नहीं बन पा रहा था, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही थी। नए संशोधन के बाद कई अनुभवी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा और विभाग को आवश्यक अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण को मिलेगा लाभ
राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान का कार्य लगातार चल रहा है। चुनाव विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में चुनाव तहसीलदारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पात्र मतदाताओं का पंजीकरण, रिकॉर्ड का सत्यापन, दावों एवं आपत्तियों का निपटारा और निर्वाचन संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं के संचालन में इन अधिकारियों की जिम्मेदारी अहम होती है।
सरकार का मानना है कि समय पर रिक्तियां भरने से चुनावी कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी और चुनाव आयोग की आवश्यकताओं के अनुरूप सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी की जा सकेंगी।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर
मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभागीय संरचना को अधिक कार्यक्षम बनाने और अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव प्रबंधन से जुड़े पदों को समय पर भरना भविष्य की चुनावी तैयारियों को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक है। इससे विभाग पर अतिरिक्त कार्यभार भी कम होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट को भी मिली स्वीकृति
बैठक के दौरान मंत्रिमंडल ने जल संसाधन विभाग की वर्ष 2025-26 की वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट को भी मंजूरी प्रदान की। इस रिपोर्ट में विभाग द्वारा वर्षभर के दौरान किए गए कार्यों, परियोजनाओं, उपलब्धियों और प्रशासनिक गतिविधियों का विस्तृत विवरण शामिल है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट की स्वीकृति से विभागीय कार्यों की समीक्षा, भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायता मिलेगी। इसके अलावा विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने तथा आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्राथमिकताएं तय करने में भी यह दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य में प्रशासनिक सुधार, चुनावी तैयारियों की मजबूती और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




