उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शुमार पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) सोमवार को अपना 63वां फाउंडेशन डे मनाएगा। छह दशक से अधिक की अपनी यात्रा में संस्थान ने चिकित्सा उपचार, मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में देशभर में अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में संस्थान पर मरीजों का भारी दबाव है और रोजाना करीब 10 से 12 हजार मरीज विभिन्न विभागों में उपचार और चिकित्सकीय परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में पीजीआई की मजबूत स्थिति बनी हुई है। दिल्ली स्थित एम्स के बाद इसे देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में दूसरे स्थान पर बताया जाता है। संस्थान की बढ़ती जिम्मेदारियों और मरीजों की जरूरतों को देखते हुए अब आने वाले वर्षों के लिए चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ तकनीकी विकास, नवाचार और वैज्ञानिक शोध को और गति देने पर जोर दिया जा रहा है।
फाउंडेशन डे समारोह से पहले पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने संस्थान की छह दशक से अधिक की उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि 63 वर्षों का सफर केवल बीते समय को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने और आने वाले वर्षों के लिए नई दिशा निर्धारित करने का भी समय है।
मरीज सेवा बनी संस्थान की सबसे बड़ी पहचान
पीजीआई निदेशक के मुताबिक संस्थान की प्रतिष्ठा केवल यहां उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और सुविधाओं की वजह से नहीं बनी है। इसके पीछे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों, अन्य कर्मचारियों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की सामूहिक मेहनत और मरीजों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बड़ी वजह है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार संस्थान पर बड़ी जिम्मेदारी डालती है। देश के अलग-अलग राज्यों से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मरीज यहां पहुंचते हैं। ऐसे में संस्थान के प्रत्येक सदस्य की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रो. लाल ने कहा कि मरीज केंद्रित चिकित्सा व्यवस्था पीजीआई की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चिकित्सा क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बावजूद मरीज की जरूरत को केंद्र में रखना संस्थान की प्राथमिकता बनी रहेगी।
रोजाना हजारों मरीजों का इलाज
पीजीआई में प्रतिदिन 10 से 12 हजार मरीजों का उपचार और परामर्श होना इस बात को दर्शाता है कि संस्थान पर स्वास्थ्य सेवाओं की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। ओपीडी से लेकर अत्याधुनिक जांच, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के उपचार तक विभिन्न स्तरों पर मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
संस्थान में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गंभीर और जटिल मामलों में पीजीआई को एक बड़े रेफरल सेंटर के रूप में देखा जाता है।
मरीजों की इस बड़ी संख्या के बीच चिकित्सा सेवाओं को प्रभावी बनाए रखना संस्थान के लिए लगातार चुनौती भी है। यही वजह है कि आने वाले समय में तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक की बड़ी भूमिका
प्रो. विवेक लाल ने भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कहा कि आने वाले वर्षों में तकनीक, नवाचार और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ, आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, रोबोटिक्स और डेटा आधारित चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में मेडिकल संस्थानों के लिए नई तकनीकों को अपनाना और उन्हें मरीजों की जरूरत के अनुरूप इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है।
पीजीआई भी बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य के अनुरूप नई तकनीकों को अपनी चिकित्सा व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इसका उद्देश्य उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ बीमारी की जल्द पहचान, बेहतर डायग्नोसिस और मरीजों को अधिक प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है।
मेडिकल शिक्षा और रिसर्च पर भी रहेगा फोकस
पीजीआई की पहचान सिर्फ उपचार केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के बड़े केंद्र के तौर पर भी रही है। यहां देशभर से विद्यार्थी और चिकित्सक उच्च स्तरीय मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए पहुंचते हैं।
निदेशक ने संकेत दिया कि भविष्य में चिकित्सा शिक्षा को नई तकनीकों और बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के साथ जोड़ना जरूरी होगा। विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में नई बीमारियों, उपचार की आधुनिक पद्धतियों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों पर काम करना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीज सेवा के बीच बेहतर तालमेल को भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
63 साल की उपलब्धियों पर होगा मंथन
फाउंडेशन डे संस्थान के लिए अपनी अब तक की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने का अवसर भी होगा। छह दशक से अधिक की अवधि में पीजीआई ने चिकित्सा शिक्षा, उपचार और अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किए हैं।
इस अवसर पर संस्थान से जुड़े वर्तमान और पूर्व सदस्यों को एक मंच पर आने का मौका मिलेगा। फैकल्टी, कर्मचारी, विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी समारोह में हिस्सा लेंगे। इससे संस्थान की पुरानी और नई पीढ़ी के बीच जुड़ाव को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फाउंडेशन डे समारोह में संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही उन कर्मचारियों के योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संस्थान की सेवाओं को मजबूत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
बीएचयू के कुलपति होंगे मुख्य अतिथि
63वें फाउंडेशन डे के अवसर पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम नाइन ऑडिटोरियम में होगा। समारोह में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।
कार्यक्रम में पीजीआई के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। समारोह के दौरान संस्थान की उपलब्धियों को याद करने के साथ चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर भी विचार-विमर्श होगा।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्कृष्ट कर्मचारियों का सम्मान होगा। संस्थान की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य और उल्लेखनीय योगदान देने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके जरिए संस्थान की रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा।
मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच नई रणनीति जरूरी
पीजीआई के सामने आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौतियों में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या भी शामिल है। देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल होने के कारण यहां गंभीर रोगियों का दबाव लगातार बना रहता है।
ऐसे में भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पताल की क्षमता बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी समाधानों, बेहतर रेफरल सिस्टम, डिजिटल सेवाओं और शोध आधारित उपचार से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। संस्थान इसी दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
निदेशक के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा का भविष्य बहु-विषयक सहयोग पर भी निर्भर करेगा। अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञताओं, शोध संस्थानों और तकनीकी क्षेत्रों के बीच सहयोग के जरिए जटिल बीमारियों के उपचार में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
पीजीआई के लिए अगला पड़ाव और भी महत्वपूर्ण
63वां फाउंडेशन डे ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। एक तरफ मरीजों की संख्या और गंभीर बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ चिकित्सा विज्ञान में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों का तेजी से विकास हो रहा है।
पीजीआई जैसे संस्थान के सामने चुनौती यह है कि वह अपनी पुरानी विशेषज्ञता और मजबूत अकादमिक परंपरा को बनाए रखते हुए भविष्य की तकनीकों को भी तेजी से अपनाए। प्रो. विवेक लाल के संदेश से स्पष्ट है कि संस्थान आने वाले वर्षों में मरीज सेवा, मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के तीनों क्षेत्रों को समान महत्व देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
63 वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद पीजीआई अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। फाउंडेशन डे समारोह इस यात्रा की उपलब्धियों को याद करने के साथ संस्थान के भविष्य के लक्ष्य तय करने का अवसर बनेगा। हजारों मरीजों की रोजाना जिम्मेदारी संभाल रहे इस संस्थान के लिए आने वाला दौर तकनीक, शोध, नवाचार और मरीज केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का होगा।



