आजकल बदलती जीवनशैली, खानपान की गलत आदतों और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण फैटी लिवर की समस्या को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआत में इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन लंबे समय तक समस्या बनी रहने पर कुछ लोगों में लिवर में सूजन और गंभीर नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय रहते खानपान में सुधार करना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना महत्वपूर्ण है।
फैटी लिवर होने पर केवल तेल-मसाले छोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है। रोजाना क्या खाते हैं, कितनी मात्रा में खाते हैं और पेय पदार्थों में कितनी चीनी लेते हैं, इन सभी बातों का असर सेहत पर पड़ सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) और अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर डिजीज (AASLD) की सलाह के अनुसार, संतुलित आहार, वजन को नियंत्रित रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते हैं।
फैटी लिवर में खानपान की रैंकिंग: किन चीजों से बनाएं दूरी?
डॉक्टर सलीम जैदी ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों को 10 में से अंक देकर उनके संभावित फायदे और नुकसान समझाए हैं। इस रैंकिंग में पैकेज्ड फ्रूट जूस को सबसे कम और हल्दी वाले दूध को ज्यादा अंक दिए गए हैं। हालांकि, यह व्यक्तिगत आकलन है, इसे सभी मरीजों के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रैंकिंग नहीं मानना चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ का असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, उसकी मात्रा और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।
1. पैकेज्ड फ्रूट जूस: 10 में से 1 अंक
फैटी लिवर की समस्या में मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना एक जरूरी कदम हो सकता है। बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड फ्रूट जूस में अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है। ऐसे पेय पदार्थों को नियमित रूप से पीने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा प्रभावित हो सकता है।
फलों में मौजूद प्राकृतिक शर्करा के साथ उनका फाइबर भी महत्वपूर्ण होता है। जब फल का जूस बनाया जाता है, तो फाइबर की मात्रा काफी कम हो सकती है। वहीं, जूस को जल्दी और अधिक मात्रा में पी लेना आसान होता है। इस कारण साबुत फल खाना आम तौर पर बेहतर विकल्प है।
डॉक्टर सलीम जैदी ने पैकेज्ड जूस को 10 में से 1 अंक दिया है। फैटी लिवर वाले लोगों को खासतौर पर ऐसे पेय पदार्थों के लेबल पर मौजूद अतिरिक्त चीनी की मात्रा देखनी चाहिए। केवल फ्रूट जूस लिखा होना यह गारंटी नहीं देता कि वह लिवर के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। मीठे सोडा, एनर्जी ड्रिंक और चीनी वाली चाय-कॉफी का अधिक सेवन भी कम करना उपयोगी हो सकता है।
2. सफेद चावल, मैदा और बिस्किट: 10 में से 3 अंक
सफेद चावल और मैदा से बनी चीजें भारतीय खानपान का आम हिस्सा हैं। हालांकि, इनका अधिक सेवन करने और भोजन में फाइबर की कमी रहने पर कुल कैलोरी तथा ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। मैदे से बनी ब्रेड, बिस्किट, नमकीन और बेकरी उत्पादों में अतिरिक्त चीनी, नमक या वसा भी हो सकती है।
डॉक्टर सलीम जैदी ने सफेद चावल और मैदे जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों को 10 में से 3 अंक दिए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि फैटी लिवर के हर मरीज के लिए सफेद चावल पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। उनकी मात्रा, भोजन के साथ ली जाने वाली दूसरी चीजें और व्यक्ति की ब्लड शुगर की स्थिति भी मायने रखती है।
बेहतर विकल्प के तौर पर भोजन में दलिया, ओट्स, साबुत अनाज की रोटी, ब्राउन राइस या अन्य फाइबर युक्त अनाज शामिल किए जा सकते हैं। प्लेट में सब्जियों और प्रोटीन स्रोतों की पर्याप्त मात्रा रखने से भोजन अधिक संतुलित बनता है। यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज भी है, तो उसके लिए कार्बोहाइड्रेट की मात्रा तय करने में डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह उपयोगी होगी।
फैटी लिवर में कौन-सी चीजें हो सकती हैं फायदेमंद?
3. दही और छाछ: 10 में से 8 अंक
दही और छाछ भारतीय भोजन में आसानी से शामिल किए जा सकने वाले विकल्प हैं। दही में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जबकि जीवित लाभकारी बैक्टीरिया वाले दही को प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ भी माना जा सकता है। ये आंतों के माइक्रोबायोम को सहारा दे सकते हैं। आंतों और लिवर के बीच संबंध पर वैज्ञानिक शोध जारी है, लेकिन केवल दही या छाछ खाने से फैटी लिवर ठीक होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
डॉक्टर सलीम जैदी ने दही और छाछ को 10 में से 8 अंक दिए हैं। इन्हें डाइट में शामिल करते समय बिना अतिरिक्त चीनी वाला सादा दही और कम नमक वाली छाछ चुनना बेहतर हो सकता है। मीठे फ्लेवर्ड योगर्ट या बहुत अधिक नमक वाली छाछ का नियमित सेवन उतना उपयुक्त नहीं है, खासकर जब व्यक्ति को दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हों।
दही या छाछ को भोजन के साथ लिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दोपहर के खाने में दाल, सब्जी, रोटी और सादा दही एक संतुलित संयोजन हो सकता है। जिन लोगों को दूध से एलर्जी है या लैक्टोज पचाने में परेशानी होती है, उन्हें अपने अनुसार विकल्प चुनना चाहिए।
4. हल्दी वाला दूध: 10 में से 9 अंक
हल्दी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला है। इसमें करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है, जिस पर इसके एंटीऑक्सिडेंट और सूजन से जुड़े संभावित प्रभावों के लिए शोध किया गया है। कुछ अध्ययनों और वैज्ञानिक समीक्षाओं में करक्यूमिन सप्लीमेंट लेने वाले फैटी लिवर के मरीजों में लिवर एंजाइम के स्तर में सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि, शोध के नतीजे पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं और बड़े, बेहतर गुणवत्ता वाले अध्ययनों की अभी जरूरत है।
डॉक्टर सलीम जैदी ने हल्दी वाले दूध को 10 में से 9 अंक दिए हैं। इसे घर पर तैयार करते समय दूध में थोड़ी हल्दी मिलाई जा सकती है। स्वाद के लिए चीनी या शहद अधिक मात्रा में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेय में अतिरिक्त शुगर बढ़ सकती है। कुछ लोग हल्दी के साथ चुटकी भर काली मिर्च भी मिलाते हैं, लेकिन यह मिश्रण फैटी लिवर का प्रमाणित इलाज नहीं है।
यह समझना भी जरूरी है कि सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और अधिक मात्रा में लिए जाने वाले करक्यूमिन सप्लीमेंट एक जैसी चीजें नहीं हैं। सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह लें, खासकर यदि आप पहले से दवाएं ले रहे हैं या लिवर से जुड़ी बीमारी का इलाज करा रहे हैं।
केवल चार खाद्य पदार्थ नहीं, पूरी डाइट पर दें ध्यान
फैटी लिवर को संभालने के लिए कुछ चीजों को खाने या छोड़ने से अधिक जरूरी है कि रोजाना का भोजन संतुलित हो। NIDDK के मुताबिक, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ, जैसे अधिकतर साबुत फल, सब्जियां और साबुत अनाज, भोजन का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं। संतृप्त और ट्रांस फैट की जगह असंतृप्त वसा वाले विकल्प अपनाना भी उपयोगी है।
दालें, चना, राजमा, अंडे, मछली और बिना ज्यादा चर्बी वाला मांस प्रोटीन के स्रोत हो सकते हैं। शाकाहारी लोग अपनी जरूरत के अनुसार दालों, फलियों, टोफू और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल कर सकते हैं। मेवे और बीज भी संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं, क्योंकि इनमें उपयोगी वसा और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं।
इसके साथ ही तली हुई चीजें, फास्ट फूड, अत्यधिक मीठे डेजर्ट और ज्यादा कैलोरी वाले पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन सीमित रखना चाहिए। शराब का सेवन भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है; फैटी लिवर के मरीजों को इसके बारे में अपने डॉक्टर से स्पष्ट सलाह लेनी चाहिए।
वजन कम करना और व्यायाम भी है जरूरी
फैटी लिवर के प्रबंधन में खानपान के साथ शारीरिक गतिविधि का भी महत्वपूर्ण योगदान है। यदि किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, तो डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे वजन कम करना लिवर में जमा फैट घटाने में मदद कर सकता है। हालांकि, बहुत तेजी से वजन घटाने या बिना सलाह के सख्त डाइट अपनाने से बचना चाहिए।
रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को भी कम करना चाहिए। व्यायाम का चुनाव उम्र, शारीरिक क्षमता और अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
फैटी लिवर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
फैटी लिवर के शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता हो सकती है, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर इस बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या दूसरे परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं।
यदि जांच में फैटी लिवर की पुष्टि होती है, तो यह जानना जरूरी है कि बीमारी किस स्तर पर है और क्या साथ में डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या मोटापे जैसी समस्याएं भी मौजूद हैं। उसी के अनुसार उपचार और डाइट प्लान तैयार किया जा सकता है।
निष्कर्ष: फैटी लिवर में पैकेज्ड मीठे जूस और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित करना, साबुत फल खाना, संतुलित भोजन लेना और नियमित व्यायाम करना उपयोगी कदम हो सकते हैं। दही, छाछ और हल्दी वाला दूध डाइट का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अकेले बीमारी को ठीक करने का निश्चित उपाय नहीं है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं। फैटी लिवर की समस्या होने पर डाइट में बड़े बदलाव करने या किसी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर अथवा योग्य डाइटीशियन से सलाह लें।
(Photo : AI Generated)




