बैलेट पेपर से चुनाव में भी कांग्रेस पिछड़ी, 4 राज्यों की 28 MLC सीटों के नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

बैलेट पेपर से चुनाव में भी कांग्रेस पिछड़ी, 4 राज्यों की 28 MLC सीटों के नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए एमएलसी चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने कुल 16 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को केवल एक सीट महाराष्ट्र के नागपुर में मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाया।

इन नतीजों की खास बात यह रही कि अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक तस्वीर एक जैसी नहीं रही। जहां कर्नाटक में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बिहार में भी मुकाबला कई दलों के बीच बंटा रहा और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद में अपना खाता खोल लिया। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने नागपुर की सीट बचाकर अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखा।

बैलेट पेपर का मुद्दा फिर चर्चा में, पीएम मोदी ने कांग्रेस से पूछा सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एमएलसी चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर तंज कसा। उन्होंने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुई वोटिंग का हवाला दिया और कहा कि इन चार बड़े राज्यों की 28 सीटों पर चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं।

मोदी की टिप्पणी ऐसे समय आई, जब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने विभिन्न चुनावों के दौरान मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी और वोटों में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। कुछ विपक्षी दल लोकसभा और विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी करते रहे हैं।

बीजेपी ने इन नतीजों को विपक्ष के आरोपों के जवाब के तौर पर पेश किया। पार्टी नेताओं का तर्क रहा कि जब इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ, तब भी कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। हालांकि, चुनाव परिणामों से अपने आप किसी चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता या किसी दल के आरोपों की सत्यता साबित नहीं होती। इन पहलुओं का आकलन करने के लिए संबंधित चुनावों के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों को अलग से देखना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी को छह और सपा को पांच सीटें

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला चर्चा में रहा। उपलब्ध अंतिम नतीजों के अनुसार, बीजेपी ने छह सीटों पर जीत हासिल की, जबकि सपा पांच सीटें जीतने में सफल रही। इससे राज्य में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अंदाजा मिलता है।

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला बेहद करीबी रहा। बीजेपी से जुड़े ध्रुव त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को केवल 307 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ त्रिपाठी लगातार चौथी बार विधान परिषद पहुंचे। नतीजे के बाद राजीव यादव ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके लगभग एक हजार वोटों की चोरी हुई। यह उनका आरोप है; इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में वाराणसी की सीटों पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहीं। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहां समाजवादी पार्टी की सफलता को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। सपा ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। राज्य में बीजेपी की छह सीटों की जीत के साथ सपा की पांच सीटों पर सफलता ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया।

बिहार में जन सुराज की एंट्री, आरजेडी को भी मिली सफलता

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में किसी एक दल का दबदबा नहीं रहा। बीजेपी ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल यूनाइटेड को एक सीट मिली। राष्ट्रीय जनता दल ने भी एक सीट अपने नाम की। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को एक सीट पर जीत मिली, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार सफल रहे। इस तरह बिहार में एनडीए को कुल चार सीटें मिलीं।

इन नतीजों में दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला खास रहा। जन सुराज के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को 324 वोटों से हरा दिया। इस जीत के साथ जन सुराज ने बिहार विधान परिषद में पहली बार प्रतिनिधित्व हासिल किया। पार्टी के लिए यह परिणाम इसलिए अहम रहा, क्योंकि उसने स्थापित राजनीतिक दलों के बीच अपनी जगह बनाने की शुरुआत की।

पटना शिक्षक सीट पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। आरजेडी के संजीव कुमार ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और लगातार पांच बार जीत चुके नवल किशोर यादव को हराया। यह नतीजा लंबे समय से इस सीट पर कायम राजनीतिक समीकरण में बदलाव के रूप में देखा गया। वहीं, पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। बिहार के नतीजों ने दिखाया कि यहां एनडीए के साथ-साथ विपक्षी दलों, नए राजनीतिक विकल्पों और निर्दलीय उम्मीदवारों को भी मतदाताओं का समर्थन मिला।

कर्नाटक में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विधान परिषद की चारों सीटें बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के खाते में चली गईं। बीजेपी ने अपनी तीन सीटें बरकरार रखीं, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को हराकर एक सीट छीन ली। यह परिणाम कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण झटका माना गया।

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने पुट्टन्ना को 908 वोटों से पराजित किया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना के खाते में 9,902 वोट आए। इस मुकाबले में बीजेपी और जेडीएस के बीच तालमेल गठबंधन के लिए फायदेमंद रहा।

उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के मौजूदा एमएलसी शशिल जी. नामोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को हराया। नामोशी को 15,596 वोट मिले, जबकि मत्तूर को 12,299 वोट हासिल हुए। इस तरह बीजेपी उम्मीदवार ने 3,297 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक, नामोशी ने इस सीट पर लगातार पांचवीं बार सफलता हासिल की।

कर्नाटक के नतीजों ने कांग्रेस के सामने संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा को बढ़ाया। खास बात यह रही कि विधानसभा में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी विधान परिषद की इन चार सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सकी। दूसरी ओर, बीजेपी और जेडीएस ने मिलकर सभी सीटें जीत लीं।

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने नागपुर बचाया, महायुति को दो सीटें

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव में सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबला रहा। अंतिम नतीजों में महायुति को दो सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी गठबंधन ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की और चार राज्यों के चुनावों में अपनी एकमात्र सीट इसी राज्य से निकाली।

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के कौस्तुभ गावडे विजयी रहे। वहीं, अमरावती शिक्षक सीट पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किरण सरनाईक ने जीत दर्ज की। इन दोनों सीटों पर महायुति ने सफलता हासिल की।

विपक्ष की ओर से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को पुणे स्नातक सीट पर जीत मिली। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर भी शरद पवार गुट ने सफलता हासिल की। नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को पराजित किया। यह जीत कांग्रेस के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है।

नागपुर में मतगणना लंबी चली और दूसरे वरीयता वाले वोटों की गिनती के बाद नतीजा सामने आया। वंजारी ने अपनी सीट बरकरार रखी। इससे कांग्रेस को चार राज्यों में पूरी तरह खाली हाथ रहने से बचने का मौका मिला। महाराष्ट्र के नतीजों में यह भी सामने आया कि चुनावी मुकाबले में गठबंधन के साथ-साथ स्थानीय उम्मीदवारों और बागी प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, विपक्ष के सामने आत्ममंथन की चुनौती

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी समेत पार्टी के नेताओं ने चुनाव नतीजों को कांग्रेस के लिए जनता के समर्थन की कमी से जोड़कर पेश किया। बीजेपी का कहना रहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को सीमित सफलता मिली, इसलिए पार्टी को अपने प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी भी इसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा रही।

दूसरी ओर, इन चुनावों के नतीजों को केवल एक राष्ट्रीय राजनीतिक संदेश तक सीमित रखना सही नहीं होगा। चारों राज्यों में स्थानीय मुद्दे, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की प्राथमिकताएं, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और गठबंधन की रणनीति भी परिणामों को प्रभावित करती हैं। विधान परिषद के चुनावों का मतदाता वर्ग आम विधानसभा चुनावों से अलग होता है, इसलिए इन नतीजों को सीधे सभी मतदाताओं की पसंद का प्रतिनिधि मानना भी उचित नहीं होगा।

कुल मिलाकर, 28 सीटों के परिणामों में एनडीए ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को केवल नागपुर में सफलता मिली। उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा के बीच करीबी मुकाबला रहा, बिहार में कई दलों ने सीटें हासिल कीं, कर्नाटक में बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने चारों सीटें जीतीं और महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन को बढ़त मिली। इन नतीजों ने चुनावी प्रक्रिया, बैलेट पेपर बनाम ईवीएम की बहस और राजनीतिक दलों की संगठनात्मक तैयारियों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।