भारत-कनाडा व्यापार समझौते की रफ्तार तेज, 2030 तक 50 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य, तीसरे दौर की वार्ता सफल

भारत-कनाडा व्यापार समझौते की रफ्तार तेज, 2030 तक 50 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य, तीसरे दौर की वार्ता सफल

भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) को लेकर बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हाल ही में ओटावा में आयोजित पांच दिवसीय गहन वार्ता के तीसरे चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौर की चर्चा 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक चली, जिसमें व्यापार से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने इस प्रक्रिया में हुई प्रगति पर संतोष जताते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनका लक्ष्य वर्ष 2026 के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप देना है।

भारत और कनाडा के बीच यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों देशों का साझा उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वार्ता के प्रत्येक दौर में विभिन्न आर्थिक, तकनीकी और नियामकीय पहलुओं पर गंभीरता से चर्चा की जा रही है।

वाणिज्य विभाग ने तीसरे दौर की बातचीत समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वार्ता सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई और कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली। विभाग के अनुसार, दोनों देशों के नेतृत्व की मंशा के अनुरूप वार्ता को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आगामी दौर भी इसी गति से आगे बढ़ते हैं, तो व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति बनने की संभावना काफी मजबूत हो जाएगी।

इस पांच दिवसीय वार्ता में वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार से जुड़े नियमों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा बौद्धिक संपदा अधिकार, ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ यानी उत्पादों की वास्तविक उत्पत्ति निर्धारित करने के नियम, सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी उपाय, तकनीकी मानकों से संबंधित व्यापारिक बाधाएं और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषय भी एजेंडे में शामिल रहे। इन सभी बिंदुओं का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारियों के लिए व्यापार को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CEPA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच शुल्क संबंधी बाधाएं कम हो सकती हैं। इससे निर्यातकों और आयातकों को बेहतर अवसर मिलेंगे, निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और नए क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते खुलेंगे। खासतौर पर कृषि, विनिर्माण, डिजिटल सेवाएं, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी क्षेत्र को इस समझौते से उल्लेखनीय लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिशों के बीच हाल के वर्षों में दोनों देशों के व्यापारिक आंकड़ों में कुछ गिरावट भी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत और कनाडा के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार घटकर 7.95 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। इससे पहले 2024-25 में यह आंकड़ा 8.66 अरब डॉलर था। यानी एक वर्ष के भीतर लगभग 8.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में भारत का कनाडा को कुल निर्यात लगभग 4.67 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि कनाडा से भारत का आयात करीब 3.28 अरब डॉलर दर्ज किया गया। वहीं 2024-25 में भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर और आयात 4.44 अरब डॉलर था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षित गति से नहीं बढ़ सकीं, जिसके चलते व्यापक आर्थिक समझौते की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CEPA लागू होने के बाद व्यापारिक लागत कम होगी, बाजार तक पहुंच आसान बनेगी और कई उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलने से कारोबारियों को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी। इससे द्विपक्षीय व्यापार में नई तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।

कनाडा को दुनिया के सबसे विकसित और उच्च आय वाले बाजारों में गिना जाता है। वर्ष 2025 के अनुमान के अनुसार वहां की आबादी लगभग 4 करोड़ 16 लाख से अधिक है। वहीं परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर उसकी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 2.34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए कनाडा एक बड़ा और आकर्षक बाजार माना जाता है, जहां गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और सेवाओं की लगातार मांग बनी रहती है।

भारत से कनाडा भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में फार्मास्यूटिकल्स, लोहा और इस्पात, समुद्री खाद्य पदार्थ, सूती वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विभिन्न प्रकार के रसायन शामिल हैं। भारतीय दवाइयों और इंजीनियरिंग उत्पादों की कनाडाई बाजार में अच्छी मांग देखी जाती है। इसके अलावा टेक्सटाइल और समुद्री उत्पाद भी भारतीय निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।

दूसरी ओर भारत कनाडा से जिन प्रमुख वस्तुओं का आयात करता है, उनमें दालें, कोयला, उर्वरक, कच्चा पेट्रोलियम, कागज, मोती और अर्ध-कीमती पत्थर प्रमुख हैं। भारतीय कृषि और उद्योग के लिए इनमें से कई उत्पाद रणनीतिक महत्व रखते हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच इनका नियमित व्यापार होता है।

सेवा क्षेत्र भी भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों का एक मजबूत आधार बन चुका है। भारत की ओर से दूरसंचार सेवाएं, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, आईटी समाधान, परामर्श सेवाएं तथा अन्य व्यावसायिक सेवाएं कनाडा को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जाती हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और CEPA के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क भी इस रिश्ते को मजबूती प्रदान करते हैं। कनाडा में चार लाख पच्चीस हजार से अधिक भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा वहां रहने वाला भारतीय मूल का बड़ा समुदाय दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि व्यापारिक समझौते के साथ-साथ शिक्षा, कौशल विकास और निवेश सहयोग को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है।

वार्ता प्रक्रिया का नेतृत्व दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा कर रहे हैं, जबकि कनाडा की ओर से मुख्य वार्ताकार की जिम्मेदारी ब्रूस क्रिस्टी संभाल रहे हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर तकनीकी स्तर पर भी विस्तृत चर्चा की, ताकि भविष्य में समझौते के क्रियान्वयन के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि वर्ष 2026 के भीतर CEPA पर अंतिम सहमति बन जाती है, तो यह भारत और कनाडा के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय साबित हो सकता है। इससे व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। साथ ही 2030 तक 50 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह समझौता सबसे महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

फिलहाल तीसरे दौर की सफल वार्ता के बाद दोनों देशों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। अब उद्योग जगत और व्यापारिक समुदाय की निगाहें अगले दौर की बातचीत पर टिकी हैं, जहां कई लंबित मुद्दों पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद की जा रही है। यदि वार्ता इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।