भारत के डेटा सेंटर कारोबार में बड़ी डील की तैयारी, टाटा ग्रुप समेत तीन दिग्गज कंपनियां बेच सकती हैं अपनी हिस्सेदारी

भारत के डेटा सेंटर कारोबार में बड़ी डील की तैयारी, टाटा ग्रुप समेत तीन दिग्गज कंपनियां बेच सकती हैं अपनी हिस्सेदारी

भारत में तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर उद्योग के बीच एक बड़े कारोबारी सौदे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। देश के प्रमुख डेटा सेंटर ऑपरेटरों में शामिल एसटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (STT GDC India) को बेचने की तैयारी चल रही है। इस संभावित सौदे में टाटा ग्रुप के साथ प्राइवेट इक्विटी कंपनी केकेआर (KKR) और सिंगापुर की दूरसंचार कंपनी सिंगटेल (Singtel) भी शामिल हैं। तीनों निवेशक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के विकल्प पर काम कर रहे हैं। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इस पूरी डील का मूल्य 5.5 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।

इस प्रस्तावित बिक्री को भारतीय डेटा सेंटर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि देश में डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन कारोबार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में डेटा सेंटर कंपनियों की संपत्तियों को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में पहली बार इतने बड़े स्तर पर डेटा सेंटर संपत्तियों का पोर्टफोलियो बिक्री के लिए उपलब्ध हो सकता है।

इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सलाहकार कंपनियों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। हालांकि, अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से सौदे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। केकेआर और एसटीटी जीडीसी इंडिया ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस की ओर से भी पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया गया है।

10 शहरों में फैला है कंपनी का बड़ा नेटवर्क

एसटीटी जीडीसी इंडिया की सबसे बड़ी ताकत भारत में फैला उसका डेटा सेंटर नेटवर्क है। कंपनी देश के 10 प्रमुख शहरों में कुल 34 डेटा सेंटर संचालित करती है। इन सभी केंद्रों की संयुक्त क्षमता 613 मेगावाट बताई गई है। इतने बड़े नेटवर्क के कारण कंपनी भारतीय डेटा सेंटर उद्योग की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती है।

कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल ऐसी संस्थाएं करती हैं जिन्हें अपने डिजिटल सिस्टम और सर्वर के संचालन के लिए सुरक्षित तथा आधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इसके कारोबार में हाइपरस्केलर कंपनियों की भूमिका भी काफी अहम है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एसटीटी जीडीसी इंडिया के कुल राजस्व का लगभग 75 फीसदी हिस्सा हाइपरस्केलर ग्राहकों से आता है।

हाइपरस्केलर ऐसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां होती हैं जिन्हें क्लाउड सेवाओं, इंटरनेट प्लेटफॉर्म और विशाल डिजिटल नेटवर्क के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत पड़ती है। इन कंपनियों को अपने सर्वर और दूसरे उपकरणों के लिए लगातार जगह और बिजली की उपलब्धता चाहिए होती है। यही वजह है कि डेटा सेंटर कारोबार में बड़े ग्राहकों के साथ लंबे समय के व्यावसायिक समझौते काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

क्या होता है को-लोकेशन डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर का कारोबार केवल कंप्यूटर या सर्वर रखने तक सीमित नहीं है। इसके लिए विशेष प्रकार की इमारतें तैयार की जाती हैं, जहां बिजली की निर्बाध आपूर्ति, तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था, सुरक्षा और तेज नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है।

को-लोकेशन मॉडल में कंपनियों को अपना पूरा डेटा सेंटर बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे किसी स्थापित ऑपरेटर की सुविधा में अपनी जरूरत के अनुसार जगह किराए पर ले सकती हैं। इस जगह में सर्वर रखने के लिए रैक, कैबिनेट या अलग से सुरक्षित केज जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ग्राहक अपने उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि डेटा सेंटर ऑपरेटर उन्हें जरूरी भौतिक ढांचा और संबंधित सुविधाएं मुहैया कराता है।

यह मॉडल उन कंपनियों के लिए फायदेमंद है जो अपने डिजिटल कारोबार का विस्तार करना चाहती हैं, लेकिन खुद डेटा सेंटर बनाने और उसका रखरखाव करने में बड़ा निवेश नहीं करना चाहतीं। भारत में इसी तरह की सेवाओं की मांग बढ़ने से एसटीटी जीडीसी इंडिया जैसी कंपनियों की संपत्तियों का रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

जानिए किस कंपनी के पास कितनी हिस्सेदारी

इस संभावित सौदे को समझने के लिए कंपनी के मौजूदा मालिकाना ढांचे पर नजर डालना जरूरी है। एसटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स के वैश्विक कारोबार में केकेआर की लगभग 75 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि शेष हिस्सेदारी सिंगटेल के पास है।

दूसरी ओर, भारत में संचालित इसकी इकाई एसटीटी जीडीसी इंडिया में एसटी टेलीमीडिया की 74 फीसदी और टाटा कम्युनिकेशंस की 26 फीसदी हिस्सेदारी है। इस तरह भारतीय कारोबार में टाटा कम्युनिकेशंस भी एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

इससे पहले फरवरी में केकेआर और सिंगटेल के कंसोर्टियम ने एसटी टेलीमीडिया ग्लोबल डेटा सेंटर्स का पूरा नियंत्रण हासिल करने के लिए 5.2 अरब डॉलर के नकद बायआउट की घोषणा की थी। अब भारतीय कारोबार को अलग से बेचने की संभावित योजना इस क्षेत्र में निवेशकों की रणनीति को लेकर नए संकेत दे रही है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित बिक्री में पूरी कंपनी का सौदा होगा या हिस्सेदारी के अलग-अलग हिस्सों को खरीदारों के सामने रखा जाएगा। अंतिम संरचना और मूल्यांकन का पता प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही चल सकेगा।

टाटा ग्रुप क्यों बदल रहा है अपनी रणनीति?

टाटा ग्रुप की डेटा सेंटर कारोबार को लेकर रणनीति में बदलाव को भी इस संभावित बिक्री से जोड़कर देखा जा रहा है। समूह एक तरफ अपनी पूंजी की जरूरतों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के डिजिटल कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना पर भी काम कर रहा है।

टाटा कम्युनिकेशंस उन शुरुआती भारतीय कंपनियों में शामिल रही है, जिन्होंने डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को पहचाना था। साल 2016 में सिंगापुर की एसटीटी ने भारत में इस क्षेत्र में प्रवेश करते हुए टाटा कम्युनिकेशंस के डेटा सेंटर कारोबार की 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी। उस समय इस कारोबार का मूल्य करीब 3,140 करोड़ रुपये आंका गया था।

इसके बाद एसटीटी ने भारतीय बाजार में अपना नेटवर्क बढ़ाया और अलग-अलग शहरों में डेटा सेंटर सुविधाओं का विस्तार किया। अब करीब एक दशक बाद इसी कारोबार की संभावित बिक्री की चर्चा हो रही है। इस बदलाव को टाटा ग्रुप की पूंजी प्रबंधन और भविष्य की कारोबारी प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

कमाई बढ़ी, लेकिन मुनाफे में आई गिरावट

एसटीटी के भारतीय कारोबार के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो राजस्व के मामले में कंपनी ने अच्छी वृद्धि दर्ज की है। टाटा कम्युनिकेशंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में एसटीटी के भारतीय कारोबार का राजस्व 2,747.5 करोड़ रुपये रहा।

यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 17.8 फीसदी अधिक है। हालांकि, राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली। वित्त वर्ष 2026 में इसका लाभ घटकर 126 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल कंपनी ने 163.5 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

इस तरह सालाना आधार पर कंपनी के प्रॉफिट में 22.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। राजस्व में तेजी और मुनाफे में गिरावट का यह अंतर संभावित खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी भी बड़े अधिग्रहण से पहले निवेशक कंपनी की कमाई, परिचालन लागत, कर्ज, भविष्य की विस्तार योजनाओं और ग्राहकों से होने वाली आय का मूल्यांकन करते हैं।

रिलायंस और ग्लोबल टेक कंपनियां भी बढ़ा रही हैं निवेश

भारत में डेटा सेंटर उद्योग का आकर्षण केवल मौजूदा ऑपरेटरों तक सीमित नहीं है। देश और दुनिया की कई बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ गूगल और ओपनएआई जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने करीब 30 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की घोषणा की है। वहीं, गूगल और ओपनएआई भी भारत में अपने विस्तार को लेकर योजनाएं बना रहे हैं। इन कंपनियों की दिलचस्पी से साफ है कि आने वाले वर्षों में डेटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत काफी बढ़ सकती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने इस मांग को और तेज किया है। एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और उन्हें चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। इसके लिए सामान्य सर्वर सुविधाओं की तुलना में अधिक क्षमता वाले डेटा सेंटर और बिजली की बड़ी उपलब्धता जरूरी होती है।

2027 तक 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश का अनुमान

भारत के डेटा सेंटर बाजार के भविष्य को लेकर कई बड़े अनुमान सामने आए हैं। उपलब्ध उद्योग अनुमानों के अनुसार, अगले दो वर्षों में देश की डेटा सेंटर क्षमता 1.26 गीगावाट से बढ़कर 2 गीगावाट से अधिक हो सकती है।

सीबीआरई ग्रुप के अनुमान के मुताबिक, 2027 तक इस उद्योग में कुल निवेश 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। इस वृद्धि के पीछे डिजिटल सेवाओं का विस्तार, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स, वीडियो स्ट्रीमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों की बढ़ती जरूरतें प्रमुख कारण हैं।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दुनिया के कुल डेटा में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी बताई जाती है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश का हिस्सा लगभग 3 फीसदी है। यानी भारत में डेटा तैयार होने और इस्तेमाल होने की मात्रा के मुकाबले उसे स्टोर और प्रोसेस करने वाला बुनियादी ढांचा अभी काफी कम है।

यह अंतर आने वाले समय में नए निवेश और कारोबार के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकता है। डेटा सेंटर कंपनियों के लिए भारत इसलिए भी आकर्षक बाजार बन रहा है क्योंकि यहां इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या, डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल और टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

संभावित डील पर क्यों टिकी हैं बाजार की नजरें?

एसटीटी जीडीसी इंडिया की बिक्री की संभावित योजना इसलिए अहम है क्योंकि इससे भारतीय डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े निवेशकों की रणनीति प्रभावित हो सकती है। अगर यह सौदा 5.5 अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन पर आगे बढ़ता है, तो यह देश के डेटा सेंटर उद्योग की सबसे बड़ी कारोबारी गतिविधियों में से एक बन सकता है।

इससे यह भी पता चलेगा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारतीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भविष्य की संभावनाओं को कितनी अहमियत दे रहे हैं। बड़े पोर्टफोलियो के अधिग्रहण से नए खरीदार को पहले से स्थापित नेटवर्क, ग्राहक आधार और परिचालन क्षमता मिल सकती है।

फिलहाल सौदे की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और संबंधित कंपनियों की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। लेकिन भारत में तेजी से बढ़ती डेटा सेंटर क्षमता और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों की योजनाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश दोनों बढ़ने की संभावना है। टाटा ग्रुप, केकेआर और सिंगटेल से जुड़ा यह संभावित सौदा इसी बदलते कारोबारी परिदृश्य का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।