जब भी ब्लड शुगर बढ़ने की बात आती है, सबसे पहले खान-पान पर ध्यान जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ज्यादा मिठाई, मीठे पेय या कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाने से शुगर बढ़ती है। लेकिन हर बार इसकी वजह सिर्फ डाइट नहीं होती। कई बार व्यक्ति मीठे से पूरी तरह परहेज करने के बावजूद बढ़ी हुई ब्लड शुगर का सामना कर सकता है। इसके पीछे तनाव भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।
दरअसल, शरीर और दिमाग के बीच हार्मोन के जरिए गहरा संबंध होता है। जब किसी व्यक्ति पर काम, परिवार, आर्थिक स्थिति या किसी अन्य वजह से लगातार दबाव रहता है, तो शरीर इसे एक चुनौती की तरह लेता है। इसके जवाब में तनाव से जुड़े हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इनमें कोर्टिसोल और एड्रेनालिन प्रमुख हैं।
इन हार्मोनों का एक अहम काम शरीर को मुश्किल परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार करना है। इसके लिए शरीर को तुरंत ऊर्जा चाहिए होती है। यही वजह है कि तनाव के समय लिवर से ग्लूकोज रक्त में ज्यादा मात्रा में पहुंच सकता है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति ने उस समय कोई मीठी चीज न भी खाई हो, फिर भी उसकी ब्लड शुगर ऊपर जा सकती है।
तनाव में शरीर खुद बढ़ा देता है ग्लूकोज की सप्लाई
तनाव के दौरान शरीर की प्राकृतिक ‘फाइट या फ्लाइट’ यानी ‘लड़ो या भागो’ प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। यह एक ऐसी जैविक व्यवस्था है जो इंसान को संभावित खतरे के लिए तैयार करती है। पुराने समय में यह प्रतिक्रिया अचानक आने वाले शारीरिक खतरे से बचने के लिए बेहद जरूरी थी।
ऐसी स्थिति में शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाई जाती है। लिवर में जमा ग्लूकोज रक्तप्रवाह में छोड़ा जा सकता है, ताकि मांसपेशियों और दूसरे जरूरी अंगों को तत्काल ऊर्जा मिल सके। भावनात्मक तनाव ही नहीं, बल्कि बीमारी, संक्रमण और शरीर पर पड़ने वाला शारीरिक तनाव भी रक्त शर्करा में बदलाव ला सकता है।
इसलिए केवल यह देखना कि दिनभर में कितना मीठा खाया गया, ब्लड शुगर को समझने के लिए पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति की नींद, मानसिक दबाव, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति भी ग्लूकोज नियंत्रण पर असर डाल सकती है।
आखिर कोर्टिसोल करता क्या है?
कोर्टिसोल को अक्सर ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है। यह शरीर की तनाव प्रतिक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तनाव की स्थिति में इसका स्तर बढ़ सकता है और यह शरीर को उपलब्ध ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए तैयार करता है। कोर्टिसोल का उद्देश्य शरीर को नुकसान पहुंचाना नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में यह शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है। यह मेटाबॉलिज्म, तनाव की प्रतिक्रिया और ऊर्जा के प्रबंधन सहित कई प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
लेकिन समस्या तब हो सकती है जब तनाव कभी-कभार होने वाली स्थिति न रहकर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए। लगातार मानसिक दबाव, खराब नींद और लंबे समय तक सक्रिय तनाव प्रतिक्रिया शरीर के ग्लूकोज नियंत्रण को प्रभावित कर सकती है।
तनाव के दौरान कोर्टिसोल के अलावा एड्रेनालिन, नॉरएड्रेनालिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन भी ग्लूकोज के संतुलन में भूमिका निभाते हैं। तनाव हार्मोनों और ब्लड शुगर पर उपलब्ध शोध के मुताबिक इन हार्मोनल बदलावों का उद्देश्य शरीर को तनाव से निपटने के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
यानी तनाव के समय बढ़ी हुई शुगर हमेशा मीठा खाने का परिणाम नहीं होती। शरीर खुद अपनी ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव करके रक्त में ग्लूकोज बढ़ा सकता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बात?
तनाव और ब्लड शुगर का संबंध डायबिटीज वाले लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इसका कारण यह है कि डायबिटीज में पहले से ही शरीर के ग्लूकोज और इंसुलिन संतुलन को बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है। इसका अर्थ है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देतीं। वहीं टाइप-1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन बनाने में असमर्थ होता है।
ऐसी परिस्थितियों में यदि तनाव के कारण शरीर में ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा पहुंचती है, तो उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। एनसीबीआई में प्रकाशित जानकारी भी डायबिटीज और तनाव के बीच इस संबंध को समझने में मदद करती है।
इसी कारण डायबिटीज वाले किसी व्यक्ति को तनावपूर्ण दिन के बाद अपनी शुगर सामान्य दिनों की तुलना में अलग मिल सकती है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता।
क्या सिर्फ तनाव को जिम्मेदार मान लेना सही है?
नहीं। ब्लड शुगर बढ़ने पर केवल तनाव को कारण मान लेना सही तरीका नहीं है। कई दूसरे कारण भी ग्लूकोज स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। खान-पान, दवाओं का सही तरीके से न लेना, कम शारीरिक गतिविधि, बीमारी, संक्रमण, खराब नींद और हार्मोनल बदलाव जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
इसलिए यदि किसी व्यक्ति की ब्लड शुगर लगातार बढ़ी हुई मिल रही है, तो सिर्फ यह सोचकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि ‘मैं तो मीठा नहीं खाता, शायद तनाव की वजह से है।’ लगातार बढ़ी शुगर की वास्तविक वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह और आवश्यक जांच जरूरी हो सकती है।
लंबे समय का तनाव क्यों बन सकता है परेशानी?
कभी-कभार किसी परीक्षा, इंटरव्यू, महत्वपूर्ण मीटिंग या अचानक आई परेशानी के कारण तनाव होना शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है। ऐसी स्थिति खत्म होने के बाद तनाव प्रतिक्रिया भी सामान्य हो सकती है।
दिक्कत तब बढ़ती है जब व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है। रोजाना काम का दबाव, पर्याप्त आराम न मिलना, नींद का बिगड़ना और लगातार चिंता शरीर को लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रख सकते हैं।
ऐसे में केवल मानसिक थकान ही महसूस नहीं होती, बल्कि शरीर की दूसरी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। ब्लड शुगर का नियंत्रण उनमें से एक है। इसलिए डायबिटीज मैनेजमेंट में तनाव को नजरअंदाज करना सही रणनीति नहीं माना जाता।
तनाव कम करने के लिए किन बातों पर ध्यान दें?
ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए तनाव कम करने वाली आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए किसी बहुत जटिल तरीके की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले नींद पर ध्यान देना जरूरी है। रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें। सोने-जागने का समय बहुत ज्यादा बदलने से बचें।
इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि भी उपयोगी हो सकती है। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार वॉकिंग या अन्य उपयुक्त एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकें भी तनाव को संभालने में मदद कर सकती हैं। कुछ लोगों को कुछ मिनट शांत बैठने, गहरी सांस लेने या ध्यान करने से मानसिक दबाव कम महसूस होता है।
परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना भी तनाव से निपटने का एक सरल तरीका हो सकता है। लगातार अकेले तनाव झेलने के बजाय भरोसेमंद लोगों से बातचीत करना मानसिक दबाव कम करने में मदद कर सकता है।
साथ ही संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या को बनाए रखना भी जरूरी है। तनाव कम करने के लिए यात्रा या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने में तनाव को भी दें जगह
ब्लड शुगर का नियंत्रण केवल चीनी और मिठाइयों से दूरी बनाने तक सीमित नहीं है। शरीर की हार्मोनल प्रतिक्रिया, नींद, तनाव और शारीरिक गतिविधि भी इसमें भूमिका निभाते हैं। तनाव के दौरान कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन शरीर को तुरंत ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए रक्त में ग्लूकोज बढ़ा सकते हैं। थोड़े समय के लिए यह शरीर की सामान्य और उपयोगी प्रतिक्रिया है। लेकिन लगातार तनाव रहने पर ग्लूकोज नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति मीठा खाने से बचने के बावजूद बार-बार बढ़ी हुई ब्लड शुगर देख रहा है, तो उसे अपनी पूरी दिनचर्या पर नजर डालनी चाहिए। तनाव और नींद के पैटर्न को भी समझना जरूरी है।
हालांकि, बढ़ी हुई ब्लड शुगर को केवल तनाव के खाते में डालना ठीक नहीं होगा। अगर शुगर लगातार सामान्य से अधिक आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करके कारण की जांच कराना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं, खान-पान, जांच और जीवनशैली में जरूरी बदलाव की सलाह दे सकते हैं।
याद रखें, तनाव शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। ब्लड शुगर को स्वस्थ सीमा में रखने के लिए सही भोजन के साथ पर्याप्त नींद, नियमित गतिविधि और तनाव प्रबंधन को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है।




