भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरे वनडे मुकाबले में 8 विकेट से बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में जिम्बाब्वे का 3-0 से सूपड़ा साफ कर दिया। वडोदरा में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों, दोनों ने अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। स्पिन गेंदबाज वैष्णवी शर्मा ने अपनी फिरकी का जादू दिखाते हुए पहली बार वनडे क्रिकेट में पांच विकेट हासिल किए। वहीं, लक्ष्य का पीछा करते हुए शेफाली वर्मा और प्रतीका रावल ने नाबाद अर्धशतक लगाकर टीम को आसानी से जीत तक पहुंचा दिया।
जिम्बाब्वे की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी और 39.5 ओवर में 131 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। छोटे लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने महज 17 ओवर में दो विकेट गंवाकर 133 रन बना लिए। शेफाली और प्रतीका की आक्रामक बल्लेबाजी के कारण मुकाबला एकतरफा हो गया। भारतीय टीम ने इस दौरे पर पहले ही टी-20 सीरीज में 3-0 से जीत हासिल की थी। अब वनडे सीरीज में भी क्लीन स्वीप करके टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा।
वैष्णवी शर्मा ने गेंद से मचाया धमाल, पहली बार वनडे में झटके पांच विकेट
भारत की जीत में सबसे अहम भूमिका युवा स्पिनर वैष्णवी शर्मा ने निभाई। उन्होंने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजी क्रम को लगातार झटके देकर टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया। वनडे क्रिकेट में पहली बार पांच विकेट हासिल करना उनके लिए एक खास उपलब्धि रही। उनकी सटीक गेंदबाजी और दबाव बनाने की क्षमता ने जिम्बाब्वे की पारी को बिखेरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वैष्णवी ने अपने स्पेल के दौरान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने पहले बेलव्ड बिजा को सिर्फ एक रन के निजी स्कोर पर आउट किया। इसके बाद मॉडेस्टर मुपाचिकवा को स्टंप कराकर भारतीय टीम को एक और सफलता दिलाई। मुपाचिकवा ने 48 गेंदों में सात चौकों की मदद से 37 रन बनाए थे और वह जिम्बाब्वे की ओर से उपयोगी पारी खेलने वाली बल्लेबाजों में शामिल थीं।
वैष्णवी ने इसके बाद भी अपनी गेंदबाजी का असर बनाए रखा। उन्होंने चिएद्जा धुरुरु को आउट करके पांचवें विकेट के लिए बन रही साझेदारी समाप्त की। इसके बाद मिशेल मावुंगा और न्याशा ग्वांजुरा भी उनकी गेंदों पर अपना विकेट गंवा बैठीं। इस तरह उन्होंने जिम्बाब्वे की पारी के अहम चरण में लगातार विकेट लेकर विपक्षी टीम को दबाव से बाहर निकलने का अवसर नहीं दिया।
वैष्णवी के अलावा भारतीय तेज गेंदबाज सयाली सतघरे और क्रांति गौड़ ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दोनों ने दो-दो विकेट अपने नाम किए। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रयास का नतीजा रहा कि जिम्बाब्वे की टीम 150 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।
शुरुआती झटकों से नहीं उबर पाया जिम्बाब्वे का बल्लेबाजी क्रम
मुकाबले में टॉस जीतकर जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में ही विपक्षी टीम को परेशानी में डाल दिया। सयाली सतघरे ने लॉरीन फिरी को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया। इसके बाद क्रांति गौड़ ने चिपो मुगेरी-तिरिपानो का विकेट हासिल कर जिम्बाब्वे को दूसरा बड़ा झटका दिया।
तीसरे ओवर तक जिम्बाब्वे का स्कोर केवल 12 रन था और टीम अपने दो महत्वपूर्ण विकेट गंवा चुकी थी। शुरुआती विकेट गिरने से बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ गया। भारतीय गेंदबाज लगातार अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी कर रहे थे, जिससे जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल हो रहा था।
शुरुआती नुकसान के बाद जिम्बाब्वे की टीम ने पारी को संभालने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने उसे किसी बड़ी साझेदारी की ओर बढ़ने नहीं दिया। वैष्णवी शर्मा के आक्रमण पर आने के बाद मुश्किलें और बढ़ गईं। उन्होंने दसवें ओवर में गेंदबाजी शुरू की और जल्द ही बेलव्ड बिजा को आउट कर दिया। कुछ समय बाद मुपाचिकवा भी उनकी गेंद पर स्टंप हो गईं।
लगातार विकेट गिरने से जिम्बाब्वे की पारी लड़खड़ाती रही। हालांकि, टीम की ओर से कुछ बल्लेबाजों ने संघर्ष दिखाया और स्कोर को सम्मानजनक स्तर तक ले जाने की कोशिश की। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजों के सामने उनका प्रयास नाकाफी साबित हुआ।
नकोमो और धुरुरु ने की पारी संभालने की कोशिश
लगातार विकेट गंवाने के बाद जिम्बाब्वे को एक ऐसी साझेदारी की जरूरत थी, जो पारी को स्थिरता दे सके। जोसफिन नकोमो और चिएद्जा धुरुरु ने पांचवें विकेट के लिए 43 रन जोड़कर टीम को संभालने का प्रयास किया। इस साझेदारी से जिम्बाब्वे को कुछ राहत मिली और टीम का स्कोर आगे बढ़ा।
दोनों बल्लेबाजों ने विकेटों के पतन को रोकने की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने इस साझेदारी को ज्यादा देर तक चलने नहीं दिया। वैष्णवी शर्मा ने धुरुरु को आउट करके इस जोड़ी को तोड़ दिया। उनके विकेट के बाद जिम्बाब्वे की पारी एक बार फिर दबाव में आ गई।
इस सफलता के बाद वैष्णवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार विकेट हासिल करती रहीं। मिशेल मावुंगा और न्याशा ग्वांजुरा के आउट होने से जिम्बाब्वे की वापसी की उम्मीदों को भी झटका लगा। दूसरी ओर, सतघरे और क्रांति गौड़ ने अपने हिस्से के विकेट लेकर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को और मजबूत बनाया।
जिम्बाब्वे की टीम आखिरकार 39.5 ओवर में 131 रन पर सिमट गई। भारतीय गेंदबाजों ने यह सुनिश्चित किया कि विपक्षी टीम आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाकर चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा न कर सके। अब भारतीय बल्लेबाजों के सामने जीत के लिए 132 रन का लक्ष्य था, जिसे हासिल करने में उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।
यास्तिका भाटिया पहली ही गेंद पर आउट, भारत को लगा शुरुआती झटका
132 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। दो साल बाद वनडे टीम में वापसी करने वाली यास्तिका भाटिया अपनी पहली ही गेंद पर आउट हो गईं। इस विकेट से जिम्बाब्वे को शुरुआती सफलता जरूर मिली, लेकिन भारतीय टीम पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
यास्तिका के जल्दी आउट होने के बाद प्रतीका रावल ने हरलीन देओल के साथ पारी को आगे बढ़ाया। दोनों बल्लेबाजों ने संभलकर खेलते हुए टीम को शुरुआती झटके से उबारने की कोशिश की। हालांकि, हरलीन की पारी ज्यादा लंबी नहीं चली। वह 19 गेंदों में 19 रन बनाकर आउट हो गईं।
नौवें ओवर में भारत का स्कोर 59 रन था और टीम अपने दो विकेट गंवा चुकी थी। लक्ष्य छोटा होने के कारण भारतीय टीम को किसी बड़े जोखिम की जरूरत नहीं थी, लेकिन तेजी से रन बनाने का मौका भी मौजूद था। हरलीन के आउट होने के बाद शेफाली वर्मा क्रीज पर आईं और उन्होंने प्रतीका के साथ मिलकर मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।
शेफाली वर्मा का तूफानी अर्धशतक, 24 गेंदों में पूरा किया पचासा
शेफाली वर्मा ने मैदान पर उतरते ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और तेजी से रन बटोरने शुरू कर दिए। उनकी बल्लेबाजी में चौकों और छक्कों का शानदार तालमेल देखने को मिला। शेफाली ने केवल 24 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया, जो महिला वनडे क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज की दूसरी सबसे तेज फिफ्टी है।
उन्होंने 26 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 51 रन बनाए। इस पारी में छह चौके और तीन छक्के शामिल रहे। शेफाली की तेज बल्लेबाजी ने लक्ष्य का पीछा करने की भारतीय टीम की रफ्तार को काफी बढ़ा दिया। उनके आक्रामक रुख के कारण जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को वापसी का मौका नहीं मिल सका।
दूसरे छोर पर प्रतीका रावल ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की। उन्होंने विकेट संभालकर खेलते हुए रन गति को बनाए रखा और शेफाली को खुलकर खेलने का अवसर दिया। प्रतीका ने 56 गेंदों पर नाबाद 59 रन बनाए। उनकी पारी में धैर्य और आक्रामकता का अच्छा संतुलन देखने को मिला।
दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 50 गेंदों में 74 रन की अटूट साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत की जीत को पूरी तरह सुनिश्चित कर दिया। प्रतीका और शेफाली ने बिना कोई और विकेट गंवाए टीम को लक्ष्य के पार पहुंचा दिया।
भारत ने 17 ओवर में हासिल किया लक्ष्य, सीरीज में क्लीन स्वीप
भारतीय महिला टीम ने 132 रन के लक्ष्य को केवल 17 ओवर में हासिल कर लिया। टीम का स्कोर दो विकेट पर 133 रन रहा और भारत ने मुकाबला आठ विकेट से अपने नाम किया। प्रतीका रावल और शेफाली वर्मा अंत तक नाबाद रहीं। दोनों की शानदार पारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि छोटे लक्ष्य का पीछा करते समय भारतीय टीम कितनी प्रभावशाली बल्लेबाजी कर सकती है।
इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 3-0 से जीत ली। पूरी सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन सभी विभागों में मजबूत रहा। गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका, जबकि बल्लेबाजों ने मिले हुए लक्ष्य को आसानी से हासिल किया।
इससे पहले भारतीय टीम टी-20 सीरीज में भी जिम्बाब्वे को 3-0 से हरा चुकी थी। इस तरह भारतीय महिला टीम ने दौरे पर दोनों प्रारूपों में विपक्षी टीम का क्लीन स्वीप किया। तीसरे वनडे में वैष्णवी शर्मा के पांच विकेट और शेफाली वर्मा के तूफानी अर्धशतक ने जीत को खास बना दिया। वहीं, प्रतीका रावल की नाबाद अर्धशतकीय पारी ने टीम को मजबूती प्रदान की।
भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। वैष्णवी ने वनडे में पहली बार पांच विकेट लेकर अपनी क्षमता दिखाई, जबकि शेफाली और प्रतीका ने लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार तालमेल का प्रदर्शन किया। जिम्बाब्वे के खिलाफ 3-0 की जीत ने भारतीय महिला टीम के दौरे को यादगार बना दिया।




