सत्य निकेतन हादसा: मलबे में घंटों जिंदगी की जंग लड़ते रहे दो छात्र, नीरज का दोस्त को आखिरी कॉल- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’

सत्य निकेतन हादसा: मलबे में घंटों जिंदगी की जंग लड़ते रहे दो छात्र, नीरज का दोस्त को आखिरी कॉल- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला हॉस्टल बिल्डिंग के अचानक ढहने की घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। कुछ ही सेकेंड में पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई और उसके अंदर मौजूद छात्र मलबे के नीचे दब गए। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 12 लोग घायल हुए। घायलों में नीरज बावा और नितेश भी शामिल हैं, जिन्हें कई घंटे की मशक्कत के बाद जिंदा बाहर निकाला गया। दोनों का इलाज एम्स में चल रहा है।

इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन घंटों की है, जब नीरज और नितेश मलबे के नीचे फंसे हुए जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे थे। एक तरफ नितेश को मलबे और लेंटर के बीच बनी छोटी-सी जगह से सांस लेने के लिए हवा मिल रही थी, तो दूसरी ओर नीरज गंभीर चोटों के साथ धूल और भारी मलबे के बीच फंसा हुआ था। इसी दौरान उसने अपने दोस्त को फोन किया और कहा, ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’

हादसे से पहले ही बिल्डिंग में कुछ ऐसा हो रहा था, जिसने वहां रहने वाले छात्रों को परेशान कर दिया था। हालांकि किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ सेकेंड में पूरी इमारत ढह जाएगी।

दीवारों से आने लगी थी पानी जैसी आवाज

नितेश के मुताबिक, हादसे से कुछ देर पहले वह खाना खाने के बाद अपने कमरे में वापस आया था। रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे वह अपने कमरे में था। तभी उसे दीवार की तरफ से पानी बहने जैसी आवाज सुनाई दी। शुरुआत में आवाज हल्की थी, लेकिन कुछ ही देर में वह तेज होने लगी।

नितेश ने पास के कमरे में रहने वाले नीरज से इस बारे में पूछा। उसने जानना चाहा कि क्या उसे भी दीवार के भीतर से ऐसी आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी आवाज आने की बात कही।

दोनों के बीच यह बातचीत खत्म हुए अभी कुछ ही सेकेंड हुए थे कि अचानक पूरी बिल्डिंग तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरी। नितेश के मुताबिक, उनके पास संभलने तक का समय भी नहीं था। कुछ ही पल में कमरे, दीवारें और लेंटर टूटकर उनके ऊपर आ गिरे।

लेंटर के बीच बनी जगह ने बचाई नितेश की जान

बिल्डिंग गिरने के बाद नितेश मलबे के नीचे फंस गया। उसके ऊपर भारी मलबा और लेंटर गिरा हुआ था। लेकिन संयोग से मलबे के बीच एक छोटा-सा खाली स्थान बन गया। इसी जगह पर उसका चेहरा फंस गया था।

यह छोटा गैप उसके लिए जिंदगी की उम्मीद बन गया। इसी वजह से उसके चेहरे तक हवा पहुंच रही थी और वह सांस ले पा रहा था। उसके पैर हालांकि मलबे के अंदर दबे हुए थे और वह खुद को वहां से निकालने में असमर्थ था।

नितेश ने बताया कि वह मलबे के नीचे से लगातार आवाज लगाता रहा, ताकि बाहर मौजूद लोगों को उसकी मौजूदगी का पता चल सके। अंधेरे और धूल के बीच उसे यह भी नहीं पता था कि बाहर हालात कैसे हैं।

कुछ देर बाद उसे ऊपर से रेस्क्यू टीम के लोगों की आवाजें सुनाई देने लगीं। इससे उसे उम्मीद जगी कि शायद उसे जल्द बाहर निकाला जा सकेगा।

रेस्क्यू टीम की एक बात सुनकर और बढ़ गया डर

नितेश के लिए राहत की बात थी कि बचाव दल उसके आसपास पहुंच चुका था। लेकिन इसी दौरान उसने रेस्क्यू टीम के सदस्यों को आपस में बात करते हुए सुना कि पास की दूसरी इमारत के भी गिरने का खतरा है।

मलबे में दबे नितेश के लिए यह सुनना किसी डरावने सपने से कम नहीं था। वह पहले ही कई टन मलबे के नीचे फंसा हुआ था। उसे डर था कि अगर आसपास की दूसरी बिल्डिंग भी गिर गई तो उसके बचने की संभावना बेहद कम हो जाएगी।

इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार मदद के लिए आवाज लगाता रहा।

दोस्त को आवाज दी तो नीरज ने दर्द में दिया जवाब

मलबे में फंसे नितेश को अपने पास ही नीरज के होने का अंदाजा था। उसने नीरज को आवाज लगाकर उसका हाल जानने की कोशिश की।

कुछ देर बाद नीरज की तरफ से जवाब आया। उसने कहा कि उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है।

नितेश के मुताबिक, नीरज जिस हिस्से में फंसा था, वहां मलबा काफी ज्यादा था। वहां धूल भी भरी हुई थी और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। नितेश खुद भी गंभीर स्थिति में था, लेकिन उसे अपने दोस्त की चिंता लगातार सता रही थी।

दोनों एक-दूसरे की आवाज सुन पा रहे थे, लेकिन एक-दूसरे की मदद करने की स्थिति में नहीं थे। दोनों को बाहर निकलने के लिए सिर्फ रेस्क्यू टीम का इंतजार था।

नीरज ने 1:45 बजे दोस्त को किया फोन

इसी बीच नीरज ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ से संपर्क करने की कोशिश की। वीर के मुताबिक, दोपहर करीब 1:45 बजे उसके फोन पर नीरज की कॉल आई।

फोन उठाते ही नीरज ने बेहद घबराई हुई आवाज में कहा, ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’

नीरज और वीर के बीच इसके बाद कई बार फोन पर बातचीत हुई। वीर ने उसे हिम्मत देते हुए उसकी लोकेशन भेजने के लिए कहा। दोनों के बीच वॉट्सऐप कॉल पर भी करीब 13 सेकेंड तक बातचीत हुई।

करीब 1:55 बजे नीरज ने अपनी लाइव लोकेशन वीर को भेज दी। इससे उसके दोस्तों को यह पता लगाने में मदद मिली कि वह मलबे के किस हिस्से में फंसा हुआ है।

लेकिन इसके बाद हालात और चिंताजनक हो गए। दोपहर करीब 2:16 बजे वीर ने नीरज को दोबारा फोन किया। इस बार फोन तो गया, लेकिन नीरज की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

दोस्तों ने मौके पर पहुंचकर शुरू की मदद की कोशिश

नीरज की कॉल और उसकी भेजी गई लोकेशन मिलने के बाद वीर और उसके अन्य दोस्त घटनास्थल की तरफ निकल पड़े। उनका मकसद किसी भी तरह नीरज तक पहुंचना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना था।

दूसरी तरफ पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें भी मलबा हटाने में लगी थीं। भारी मलबे के कारण बचाव अभियान आसान नहीं था। किसी भी हिस्से को हटाने से पहले यह देखना जरूरी था कि दबे हुए लोगों को और नुकसान न पहुंचे।

वीर ने नीरज को आखिरी बार हिम्मत देते हुए मैसेज किया था। उसने लिखा था कि उसे किसी भी हालत में हिम्मत नहीं हारनी है।

कई घंटों तक चले बचाव अभियान के बाद आखिरकार नीरज को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। नितेश को भी करीब चार घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पहले प्राइमस अस्पताल, फिर एम्स भेजा गया नीरज

मलबे से निकाले जाने के बाद नीरज की हालत गंभीर थी। उसे तत्काल प्राइमस अस्पताल ले जाया गया। वहां करीब 50 मिनट से एक घंटे तक उसका इलाज किया गया।

इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। शाम करीब 6 बजे नीरज को एम्स पहुंचाया गया।

उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने देर रात सर्जरी शुरू की। रात करीब साढ़े 10 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और लगभग 1 बजे तक चला।

नीरज को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। उसकी पीठ में गहरी चोट है। जांघ के ऊपरी हिस्से में भी गंभीर चोट बताई गई है। इसके अलावा पेट में भी गहरे घाव हैं।

एक सर्जरी हो चुकी है, लेकिन उसकी हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, उसके शरीर में इंफेक्शन फैल चुका है और प्रभावित हिस्से की त्वचा भी काली पड़ गई है। डॉक्टरों की ओर से एक और सर्जरी की तैयारी की जा रही है।

हादसे से पहले सामने आया था दरारों का डरावना वीडियो

सत्य निकेतन हादसे को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है। हादसे से कुछ मिनट पहले पास के ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राओं ने अपने कमरे का वीडियो बनाया था।

वीडियो में कमरे की दीवारों और छत पर बड़ी-बड़ी दरारें नजर आ रही थीं। दीवारों पर बनी दरारें काफी लंबी और गहरी दिखाई दे रही थीं। वीडियो बनाने वाली छात्राओं में अर्निका और मानसी शामिल हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी में सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं।

वीडियो में 20 वर्षीय अर्निका की आवाज भी सुनाई देती है। वह कहती है कि ऐसा लग रहा है जैसे बिल्डिंग गिरने वाली है।

इस वीडियो ने हादसे से पहले बिल्डिंग की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस समय छात्राएं दीवारों और छत में आई दरारों को रिकॉर्ड कर रही थीं, उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर बाद आसपास की बिल्डिंग में इतना बड़ा हादसा होने वाला है।

चार घंटे तक मलबे के नीचे चलता रहा जिंदगी बचाने का संघर्ष

सत्य निकेतन हादसे की पूरी कहानी में नीरज और नितेश की आपबीती सबसे भयावह हिस्सा है। एक तरफ नितेश मलबे के बीच बने छोटे से गैप में फंसा रहा और उसी जगह से सांस लेकर बचने की कोशिश करता रहा। दूसरी ओर नीरज गंभीर चोटों के साथ भारी मलबे में दबा था।

दोनों को करीब चार घंटे तक रेस्क्यू का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान हर गुजरता मिनट उनके लिए बेहद मुश्किल था।

नीरज का दोस्त को किया गया फोन और उसका ‘भाई, मैं मर रहा हूं’ कहना इस हादसे की भयावहता को बयां करता है। वहीं नितेश की कहानी बताती है कि किस तरह मलबे के बीच बनी कुछ इंच की जगह भी किसी की जिंदगी बचाने की वजह बन सकती है।

हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लोग घायल हैं। इनमें नीरज और नितेश भी शामिल हैं। दोनों इस वक्त एम्स में इलाज करा रहे हैं। हादसे के बाद बिल्डिंग की सुरक्षा, पहले से मौजूद दरारों और समय रहते संभावित खतरे को पहचानने को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।